मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड का आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फाइल फोटो)
पटना:
बिहार के मुजफ्फरपुर बाल गृह में जबसे सेक्स स्कैंडल का पहलू सामने आया है तबसे सभी एक बात पूछ रहे हैं कि ऐसे गिरोहों के मॉनिटरिंग करने वाले कहां सोये थे. हालांकि अब ऐसी जानकारी मिल रही है कि ऐसे बाल गृह की मॉनिटरिंग करने वाले राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दौरे और उनके कहने के बावजूद बाल गृह को दूसरे जगह नहीं शिफ़्ट किया गया.
मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड: ब्रजेश ठाकुर क्या जेल से भी अपने खिलाफ जांच को प्रभावित कर रहा?
मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड : जानें कहां, कब और क्या-क्या हुआ, यहां है पूरा घटनाक्रम
इस आयोग की एक टीम पिछले साल नवंबर महीने के तीसरे हफ़्ते में बालिका गृह का निरीक्षण किया था, जिसमें आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर हरपाल कौर के नेतृत्व में गया और इसने रिपोर्ट में अत्यधिक सुधार की आवश्यकता बताते हुए किसी ऐसे भवन में शिफ़्ट करने का निदेश दिया जहां पर्याप्त जगह हो.
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रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आयोग के सदस्य के सामने कई लड़कियां रोने लगी थी, लेकिन कौर का कहना है कि किसी ने यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं की. लेकिन इसका एक कारण यह था कि ब्रजेश ठाकुर की सहयोगी मधु वहां मौजूद थी और काफ़ी टोका टोकी कर रही थी. इस रिपोर्ट में जो वहां कमियां या ग़लतियां थीं उसपर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई गई, लेकिन ज़िला अधिकारी को और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के सामने इस रिपोर्ट पर चर्चा करने के बावजूद ब्रजेश ने बाल सुधार गृह को हटाया नहीं गया. इससे साबित होता है कि इन अधिकारियों ने दबाब नहीं बनाया या तो ब्रजेश ने उन्हें मैनेज कर लिया था.
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इस आयोग की एक टीम पिछले साल नवंबर महीने के तीसरे हफ़्ते में बालिका गृह का निरीक्षण किया था, जिसमें आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर हरपाल कौर के नेतृत्व में गया और इसने रिपोर्ट में अत्यधिक सुधार की आवश्यकता बताते हुए किसी ऐसे भवन में शिफ़्ट करने का निदेश दिया जहां पर्याप्त जगह हो.
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रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आयोग के सदस्य के सामने कई लड़कियां रोने लगी थी, लेकिन कौर का कहना है कि किसी ने यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं की. लेकिन इसका एक कारण यह था कि ब्रजेश ठाकुर की सहयोगी मधु वहां मौजूद थी और काफ़ी टोका टोकी कर रही थी. इस रिपोर्ट में जो वहां कमियां या ग़लतियां थीं उसपर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई गई, लेकिन ज़िला अधिकारी को और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के सामने इस रिपोर्ट पर चर्चा करने के बावजूद ब्रजेश ने बाल सुधार गृह को हटाया नहीं गया. इससे साबित होता है कि इन अधिकारियों ने दबाब नहीं बनाया या तो ब्रजेश ने उन्हें मैनेज कर लिया था.
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