- IPS कुहू गर्ग ने 22 सितंबर 2026 को अपना 28वां जन्मदिन मनाया. इनहोंने UPSC 2023 में AIR 178 हासिल की थी.
- कुहू गर्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं और 56 राष्ट्रीय तथा 19 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं
- घुटने में लगी गंभीर चोट के बाद कुहू ने लगभग दस घंटे रोजाना यूपीएससी की तैयारी की और पहले प्रयास में सफलता पाई
भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी कुहू गर्ग ने 22 सितंबर 2026 को अपना 28वां जन्मदिन मनाया. आईपीएस जया शर्मा और सिमरन भारद्वाज की तरह जनरेशन जेड की आईपीएस अधिकारियों में शामिल कुहू गर्ग की सफलता की कहानी बेहद शानदार और प्रेरणादायक है. इन्होंने घुटने में लगी चोट की आपदा को अवसर में बदला. बेड रेस्ट के दौरान तैयारी करके यूपीएससी क्रैक क डाली. उनके पिता भी आईपीएस अधिकारी रहे हैं, जबकि कुहू खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं.
जिस वर्ष उनके पिता अशोक कुमार उत्तराखंड के डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए, उसी वर्ष बेटी कुहू गर्ग का चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हो गया. कुहू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन में दर्जनों मेडल अपने नाम किए हैं. खेल के दौरान घुटने में लगी चोट के कारण बैडमिंटन तो छूट गया, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा. लगभग ढाई साल बाद शानदार वापसी करते हुए कुहू गर्ग आईपीएस अधिकारी बन गईं.
इंस्टाग्राम पर साझा की सफलता की कहानी
जेन जी आईपीएस कुहू गर्ग का जन्म 22 सितंबर 1998 को हुआ है. उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए लिखा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2023 में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 178वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर आवंटित हुआ. इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि यह पोस्ट काफी देरी से आ रही है, क्योंकि नई चीजों को समझने और व्यवस्थित होने में थोड़ा समय लग गया.
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1989 बैच के पूर्व आईपीएस अशोक कुमार की बेटी कुहू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड के देहरादून स्थित सेंट थॉमस कॉलेज से की और दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री प्राप्त की. महज 9 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलने वाली कुहू गर्ग ने अपने खेल करियर में 56 राष्ट्रीय और 19 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं. वर्ष 2018 में कुहू विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं.
चोट बनी टर्निंग पॉइंट, रोजाना 8-10 घंटे की पढ़ाई
खेलते समय घुटने में गंभीर चोट (ACL इंजरी) लगने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी. इसी दौरान कुहू ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. वह रोजाना लगभग 8 से 10 घंटे यूपीएससी की पढ़ाई करती थीं और अपनी लगन के दम पर पहले ही प्रयास में 178वीं रैंक लाकर आईपीएस बन गईं.
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अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कुहू ने लिखा, "यूपीएससी का रिजल्ट बहुत शानदार रहा. हर तरफ से जो प्यार और दुआएं मिलीं, उनसे मैं बेहद धन्य और आभारी महसूस कर रही थी. जो बात इसे और भी खास बनाती है, वह है मेरे पिता (@ashok_kumar_ips89) की विरासत को आगे बढ़ाने का मौका, जिन्होंने अपनी 35 साल की शानदार सेवा में अनगिनत लोगों की मदद की और बिना किसी स्वार्थ के देश की सेवा की. उनका खाकी वर्दी से बाहर निकलना और मेरा एक साल के भीतर उसे पहनना, ऐसा लगता है जैसे यह कुदरत का ही मास्टर प्लान हो."
"बदलाव आसान नहीं था, लेकिन सब अच्छे के लिए होता है"
30 जुलाई 2024 को की गई अपनी पोस्ट में कुहू गर्ग आगे लिखती हैं, "3 साल पहले, सिविल सर्विसेज ऐसा रास्ता नहीं था जिसके बारे में मैंने सोचा भी हो, और बैडमिंटन एक ऐसा खेल था जिसके बिना मैं एक दिन रहने की कल्पना भी नहीं कर सकती थी. लेकिन जो लोग मुझे जानते हैं, वे समझते हैं कि उस दौरान बहुत कुछ बदला, जिसमें घुटने की ACL इंजरी तो बस एक शुरुआत थी. मुझे प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन से ब्रेक लिए 2.5 साल से ज्यादा हो चुके हैं और इस परीक्षा की तैयारी शुरू किए 2 साल से अधिक का समय हो गया है. ईश्वर की कृपा से परिणाम बहुत अच्छा रहा."

उन्होंने आगे लिखा, "एक ही लक्ष्य पर केंद्रित रहने वाले मेरे स्वभाव को देखते हुए यह बदलाव बिल्कुल भी आसान नहीं था. लेकिन जिंदगी हमें वहीं ले जाती है जहाँ हमें होना चाहिए. मेरा सच में मानना है कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है, भले ही यह बात हमें बाद में समझ आए."
परिवार, डॉक्टरों और समर्थकों का जताया आभार
कुहू ने अपनी इस यात्रा में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए लिखा, "मैं उन सभी लोगों की दिल से शुक्रगुजार हूँ जो इस सफर का हिस्सा रहे- मेरा परिवार, मेरे डॉक्टर्स और थेरेपिस्ट, बड़े-बुजुर्ग जिन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया, सीनियर्स जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया और वे दोस्त जिन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया. सबसे खास मेरी माँ (@alak.nanda), जो हर कदम पर मेरे साथ मजबूती से खड़ी रहीं और मुझे सब कुछ कर गुजरने की हिम्मत दी."
उन्होंने आगे जोड़ा, "मैं ईश्वर की भी आभारी हूं कि उन्होंने मुझे मजबूत बनाए रखा और जीवन के कुछ कठिन फैसले लेने में मदद की. उन पर मेरे विश्वास ने मुझे मुश्किल दौर से बाहर निकाला."
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