- हरियाणा के छोटे गांव की रहने वाली सिमरन कैडर गुजरात कैडर में साल 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं.
- Gen Z आईपीएस सिमरन भारद्वाज ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पहले ही प्रयास में AIR 172 हासिल की.
- सिमरन भारद्वाज ने बताया कि उनके भाई ने एक दोस्त को मजाक में कहा था बहन आईपीएस है, भाई की बात आज सच हो गई.
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में 'जनरेशन जेड' वाले युवा अधिकारियों की सूची में आईपीएस जया शर्मा के साथ ही सिमरन भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से शामिल है. हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर 'पत्रकार' की डिग्री लेने के बाद आईपीएस बनीं सिमरन भारद्वाज की सफलता की कहानी इतनी शानदार है कि हर युवा को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए. उनकी कहानी से यह समझा जा सकता है कि स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे की जाए और कॉलेज पूरा होते ही पहले ही प्रयास में IPS कैसे बना जा सकता है.
हरियाणा के छोटे से गांव से IPS बनने तक का सफर
सिमरन भारद्वाज की सफलता की यात्रा बेहद खास है. साल 2015 में वे दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थीं और 2022 से वे गुजरात कैडर में भारतीय पुलिस सेवा की युवा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. हरियाणा के रेवाड़ी जिले के एक छोटे से गांव में 8 फरवरी 2000 को जन्मी सिमरन भारद्वाज ने यूपीएससी परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास की है. 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वालों को जनरेशन जेड कहा जाता है.

आईपीएस सिमरन भारद्वाज ने दिल्ली विवि के कॉलेज से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 के परिणाम के बाद सिमरन भारद्वाज ने 'जोश टॉक्स' के मंच पर अपनी सफलता की कहानी साझा की थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने यूपीएससी 2021 में अखिल भारतीय स्तर पर 172वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा कैडर मिला.
सेना का विकल्प छोड़कर चुनी पुलिस सेवा
सिमरन भारद्वाज की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने साल 2021 में संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा में भी अखिल भारतीय स्तर पर 6वीं रैंक हासिल की थी. उन्होंने यूपीएससी और सीडीएस दोनों परीक्षाएं बिना किसी कोचिंग के, अपने पहले ही प्रयास में पास कीं. सीडीएस पास करने के बाद सिमरन के पास भारतीय सेना में जाने का बेहतरीन मौका था, लेकिन उन्होंने पुलिस सेवा को चुना. वे खुद एक आर्मी बैकग्राउंड वाले परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

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पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान शुरू की यूपीएससी की तैयारी
सिमरन भारद्वाज ने अपनी स्कूली शिक्षा ग्वालियर से पूरी की और दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. कॉलेज में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू कर दी थी. परिवार में माता-पिता और भाई के अलावा किसी को भी यह पता नहीं था कि वे यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं. जब यूपीएससी का परिणाम आया और उन्हें 172वीं रैंक मिली, तब उनका आईपीएस बनना तय हुआ. यह खबर सुनकर हर कोई हैरान रह गया.
भाई की मजाक में कही बात और मां की विश-लिस्ट हुई सच
यूट्यूब चैनल 'SSC Factory by Ankit Sharma' से बातचीत में सिमरन भारद्वाज ने अपनी तैयारी के दौरान का एक मजेदार वाकया साझा किया. उन्होंने बताया कि एक बार जब वे दौड़ रही थीं, तब उनके भाई के दोस्त ने कहा, "ये दीदी एकदम कमांडो जैसी लग रही हैं." दोस्त को यह नहीं पता था कि वे उसी की बहन हैं. इस पर उनके भाई ने मजाक में कह दिया कि यह उसकी बहन है और एक आईपीएस अधिकारी है जबकि उस समय तक सिमरन ने यूपीएससी की मुख्य परीक्षा भी नहीं दी थी. इत्तेफाक देखिए कि भाई की कही वह बात आगे चलकर सच साबित हुई.
इसी तरह का एक और वाकया साझा करते हुए सिमरन ने बताया कि साल 2015 में जब वे दसवीं कक्षा में थीं, तब उनकी मां ने अपनी एक 'विश-लिस्ट' में सिमरन को सिविल सर्वेंट के रूप में देखने की इच्छा लिखी थी. आगे चलकर मां की यह इच्छा भी पूरी हो गई.
लगातार दो बार यूपीएससी में सफलता
सिमरन के लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वे दो बार यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर चुकी हैं. यूपीएससी 2021 में 172वीं रैंक हासिल करने के अलावा, उन्होंने यूपीएससी 2022 में भी 96वीं रैंक हासिल की. गुजरात पुलिस में बतौर आईपीएस, सिमरन भारद्वाज ने 9 नवंबर 2024 को एएसपी, धोराजी राजकोट के पद पर कार्यभार संभाला.

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40-50 टॉपर्स के इंटरव्यू देखकर बनाई रणनीति
गुजरात कैडर की 2022 बैच की जेन जेड आईपीएस अधिकारी सिमरन भारद्वाज ने बताया कि पहले ही प्रयास में सफलता पाने के लिए उन्होंने यूट्यूब पर उपलब्ध 40-50 यूपीएससी टॉपर्स के वीडियो देखे. उन्होंने समझा कि टॉपर्स ने किस रणनीति से परीक्षा पास की और उसी आधार पर अपना खुद का स्टडी प्लान तैयार किया.
इसी दौरान, कॉलेज की एक भाषण प्रतियोगिता में उन्हें आईपीएस ईलमा अफरोज के हाथों पुरस्कार मिला, जिससे उनका रुझान यूपीएससी की तरफ और बढ़ गया. आईपीएस ईलमा अफरोज ने भी उन्हें सही मार्गदर्शन दिया और उनका हौसला बढ़ाया.
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