- आत्मनिर्भर बनने निकलीं महिलाएं कर्ज में डूबीं, बैंक ने भेजा अंतिम नोटिस
- न मशरूम उगा, न कमाई हुई... अब महिलाओं से मांगा जा रहा लाखों का कर्ज
- बैंक का अल्टीमेटम: 15 दिन में चुकाएं कर्ज, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई
बिहार सरकार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की महत्वाकांक्षी मशरूम क्लस्टर योजना अब मुजफ्फरपुर की 10 गरीब महिलाओं के लिए आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बन गई है. बोचहां प्रखंड की मझौली पंचायत के कर्णपुर-वाजितपुर गांव की जीविका दीदियों ने स्वावलंबन के सपने के साथ योजना में हिस्सा लिया था, लेकिन तीन साल बाद वे 33 लाख रुपये से अधिक के बैंक ऋण के बोझ तले दब गई हैं. महिलाओं का आरोप है कि योजना के नाम पर लोन तो स्वीकृत करा दिया गया, लेकिन जमीन पर मशरूम उत्पादन शुरू ही नहीं हो सका. अब उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक ने ऋण चुकाने के लिए अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
आत्मनिर्भरता का सपना बना आर्थिक संकट
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित मझौली पंचायत की 10 महिलाओं ने जीविका समूह के माध्यम से मशरूम उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखा था. महिलाओं ने "फूलमाला जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड" के नाम से समूह बनाकर सरकारी योजना में भाग लिया. योजना का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और ग्रामीण स्तर पर मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देना था. लेकिन अब यही योजना महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है.
33.20 लाख रुपये का ऋण हुआ स्वीकृत
वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, बोचहां शाखा से 10 महिलाओं के नाम पर कुल 33 लाख 20 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था. प्रत्येक महिला सदस्य के नाम पर 3 लाख 32 हजार रुपये का लोन लिया गया. मशरूम उत्पादन के लिए 8 कट्ठा 32 धुर जमीन वार्षिक 28 हजार रुपये किराये पर ली गई थी.
कंपनी ने किए थे बड़े वादे
महिलाओं के अनुसार "जक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी" नामक कंपनी के साथ पांच वर्ष का समझौता हुआ था. कंपनी ने मशरूम उत्पादन के लिए स्पॉन उपलब्ध कराने और तैयार उत्पाद को 20 प्रतिशत लाभ के साथ खरीदने की गारंटी दी थी. लेकिन महिलाओं का आरोप है कि न तो उत्पादन के लिए आवश्यक ढांचा तैयार हुआ और न ही मशरूम उत्पादन शुरू कराया गया.

Bihar mushroom cluster scheme: शेड नहीं बना, उत्पादन भी शुरू नहीं
न शेड बना, न शुरू हुआ उत्पादन
महिलाओं का कहना है कि बैंक से ऋण की पूरी राशि निकासी दिखा दी गई, जबकि जमीन पर कोई वास्तविक उत्पादन गतिविधि शुरू नहीं हो सकी. मशरूम उत्पादन के लिए तैयार किया गया बांस-बल्ली का ढांचा अब जर्जर होकर टूटने लगा है. इसके साथ ही महिलाओं का आत्मनिर्भर बनने का सपना भी बिखरता नजर आ रहा है.
बैंक ने जारी किया अंतिम नोटिस
उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां शाखा ने सभी महिलाओं को अंतिम नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मशरूम उत्पादन के लिए न तो उचित शेड बना है और न ही किसी प्रकार की प्रगति दिखाई दे रही है. बैंक ने 15 दिनों के भीतर ब्याज सहित संपूर्ण ऋण राशि जमा कर खाता बंद कराने का निर्देश दिया है. अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
महिलाओं पर बढ़ा चौतरफा दबाव
बैंक की नोटिस के बाद महिलाओं की परेशानी और बढ़ गई है. उनका कहना है कि एक तरफ बैंक ऋण वसूली का दबाव बना रहा है, दूसरी तरफ जमीन मालिक किराया मांग रहा है. इसके अलावा परिवार के भीतर भी उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है. महिलाओं का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना पर भरोसा करके कदम उठाया था, लेकिन अब वे कर्ज और अनिश्चितता के बीच फंस गई हैं.
प्रशासन से लगाई गुहार
पीड़ित महिलाओं ने जिलाधिकारी और प्रखंड परियोजना प्रबंधक (BPIU) बोचहां को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. महिलाओं का कहना है कि या तो मशरूम क्लस्टर परियोजना को चालू कराया जाए ताकि वे उत्पादन शुरू कर सकें, या फिर उन्हें बैंक ऋण से राहत दिलाकर "नो ड्यूज" प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाए.
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