- बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन ट्रैफिक जाम और कड़े नियमों के कारण छात्रों को परेशानी हुई.
- छात्र देर से आने पर कई जगहों पर दीवार फांदकर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने की कोशिश करते पाए गए.
- आरा, नवादा, छपरा जैसे जिलों में प्रवेश द्वार पर भीड़ और भगदड़ की स्थिति बनी.
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन राज्य के विभिन्न जिलों से अफरा-तफरी और परीक्षार्थियों की बेबसी की खबरें सामने आईं. कड़े नियमों और निर्धारित समय से पहले केंद्र पहुंचने की बाध्यता के कारण कई छात्र-छात्राएं मुश्किलों में घिरे नजर आए. परीक्षा में शामिल होने की जद्दोजहद इस कदर दिखी कि कुछ केंद्रों पर छात्र जान जोखिम में डालकर ऊंची दीवारें फांदते और बंद गेटों को तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश करते पाए गए. विलंब का मुख्य कारण सड़कों पर लगा भारी ट्रैफिक और जाम बताया गया, जिसकी वजह से दूर-दराज से आए परीक्षार्थी महज कुछ मिनटों की देरी से अपने भविष्य की इस बड़ी परीक्षा से वंचित होने की कगार पर पहुंच गए.
राजधानी पटना के मिलर हाई स्कूल में एक छात्र देर से पहुंचा तो गेट बंद मिलने पर उसने दीवार फांदकर अंदर प्रवेश किया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और केंद्र अधिकारियों ने इस तरह के गैरकानूनी कदम पर सख्ती बरतने की चेतावनी दी. बोर्ड ने कहा है कि नियमों के अनुसार देर से आने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा और केंद्र प्रबंधन को निर्देशित किया गया है.
आरा में दीवार पार करने की कोशिश
आरा के कुछ केंद्रों पर भी देर से पहुंचने वाले छात्रों ने दीवार पार करने की कोशिश की. यहां भी सुरक्षा कर्मियों और स्कूल स्टाफ ने स्थिति को संभाला और कई छात्रों को बाहर रोक दिया गया. कुछ स्थानों पर अभिभावक के साथ बहस भी देखी गई, जिससे माहौल तनावपूर्ण रहा.
बेगूसराय और गोपालगंज जिलों में परीक्षा-केंद्र के पास भारी भीड़ बन गई. कुछ केंद्रों पर गेट समय से पहले बंद करने की शिकायत आई, जबकि दूसरे केंद्रों पर ट्रैफिक जाम के कारण छात्र देर हुए. पुलिस और कर्मियों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत किया, पर कई छात्रों का मानना था कि बेहतर सूचना नहीं दी गई थी.
छात्रों की भीड़ के कारण प्रवेश द्वार पर भगदड़ की स्थिति
नवादा में भी देर से आने वालों ने दीवार फांदी. पिछले साल के मामलों की पृष्ठभूमि के कारण यहां प्रशासन ने खास सतर्कता बरती थी. कुछ छात्रों के खिलाफ नोटिस जारी करने की जानकारी मिली है और स्थानिक पुलिस ने जांच की बात कही है. छपरा और सारण के इलाकों में कुछ केंद्रों पर अभिभावक और छात्रों की भीड़ के कारण प्रवेश द्वार पर भगदड़ की स्थिति बन गई. केंद्र स्टाफ ने अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी ताकि परीक्षा शांतिपूर्वक शुरू हो सके. कई माता-पिताओं ने कहा कि स्थानीय प्रशासन को परीक्षा से पहले परिवहन और समय संबंधी सही दिशा-निर्देश देने चाहिए थे.
बस-ट्रेन देरी की वजह से छात्र देर से पहुंचे
भागलपुर में बस-ट्रेन देरी की वजह से छात्र देर से पहुंचे. रेलवे या सड़क परिवहन में विलंब के कारण परीक्षा-केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हुआ. स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों के लिए विशेष बस का इंतज़ाम करने की कोशिश की. मुजफ़्फरपुर और दरभंगा जैसे जिलों में भी कुछ छात्रों के देर से पहुंचने के कारण केंद्र द्वार पर खिंचतान देखी गई. कई जगहों पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर वहां के शिक्षकों ने मामले सुलझा दिए और कुछ छात्रों को प्रवेश नहीं दिया गया.
पूर्णिया और सीवान के ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को रास्ते की कठिनाइयों और परिवहन की कमी का सामना करना पड़ा. कई अभिभावकों ने कहा कि गांवों में पहले से सूचना और स्कूल-स्तर पर व्यवस्था को और मज़बूत किया जाना चाहिए ताकि परीक्षा-दिवस पर इस प्रकार की आपात स्थितियाँ न बनें. कुल मिलाकर देखा जाए तो इन घटनाओं की मुख्य वजहें तीन प्रकार की दिखीं—पहली, ट्रैफिक या परिवहन की समस्याएं; दूसरी, परीक्षाकेंद्रों पर समय-सीमा और गेट बंद करने के नियम; और तीसरी, छात्रों और अभिभावकों तक समय-सम्बंधी स्पष्ट सूचना का अभाव. कई जगहों पर प्रशासन ने समय रहते पुलिस और केंद्र स्टाफ तैनात कर के स्थिति को नियंत्रित कर लिया, पर वायरल वीडियो और तस्वीरों ने चिंता बढ़ा दी.
बोर्ड ने बयान जारी कर क्या कहा?
बोर्ड ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन संगीन मामला है और केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि रिपोर्टिंग-टाइम के बाद किसी को भी प्रवेश ना दिया जाए. इन घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि विद्यार्थियों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कितना तेज है. इसी वजह से कई बार वे जोखिम भरे कदम उठा बैठते हैं, जैसे दीवार कूदना और लोहे के बड़े बड़े फाँद के अंदर जाने की कोसिश करना.
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