- बिहार के छपरा के जवईनियां गांव में एक गरीब महिला की मौत पर कोई ग्रामीण कंधा देने नहीं आया था
- महिला की दो बेटियों ने अकेले ही मां का अंतिम संस्कार और मुखाग्नि दी थी
- परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था और पिछले डेढ़ साल से तंगी में जीवन यापन कर रहा था
बिहार के छपरा से लगभग 22 किलोमीटर दूर मढोरा के पास जवईनियां गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो न सिर्फ दिल दहलाती है, बल्कि इस बात के लिए सोचने पर भी मजबूर करती है कि हम किस तरह का समाज बना रहे हैं. मामला कुछ यूं है कि गांव में एक गरीब महिला की मौत हो जाती है तो गांव से कोई कंधा देने वाला नहीं आया. आखिरकार दो बेटियों ने ही मां को कंधा दिया और मुखाग्नि भी दी.
बताया जा रहा है कि गरीबी इतनी है कि समाज ने मुंह फेर लिया. गांव वाले कंधा देने भी नहीं आए. बेटियों ने जैसे-तैसे अंतिम संस्कार तो कर दिया लेकिन अब तेरहवीं के लिए बेटियां दर-दर भटक रही हैं.

किसी ने क्यों नहीं दिया कंधा?
डेढ़ साल पहले बबीता देवी के पति रविंद्र सिंह की मौत हो गई थी. अब बबीता देवी की भी कुछ दिन पहले मौत हो गई. अब घर में सिर्फ उनकी दो बेटियां ही बची हैं. रविंद्र सिंह की मौत के बाद से ही परिवार आर्थिक तंगी में जीवन काट रहा था. अब मां की मौत के बाद भी कोई कंधा देने तक नहीं आया. इसके बाद बच्चियों ने ही हिम्मत जुटाकर मां का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी. गांव वालों का कहना है कि परिवार बहुत गरीब है और समाज से कट गया था. इसलिए कोई कंधा देने भी नहीं पहुंचा.

श्राद्ध के लिए मांग रहीं मदद
दोनों बेटियां अब गांव के साथ-साथ प्रशासन से मां के श्राद्ध के लिए मदद की गुहार लगा रहीं हैं. उन्होंने जैसे-तैसे अंतिम संस्कार तो कर दिया लेकिन तेरहवीं के लिए न तो पैसे हैं और न कोई सहारा और न ही कोई मदद करने वाला है. लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन और समाज आगे आए तो दोनों बेटियों को थोड़ी राहत मिल सकती है.
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