UGC New Guidelines Highlight: यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई शुरू हुई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत केवल प्रावधानों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की ही जांच कर रही है.
याचिकाकर्ताओं की दलील: सेक्शन 3(c) असंवैधानिक
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने मुख्य रूप से UGC Act के सेक्शन 3(c) को चुनौती दी. उनकी प्रमुख दलीलें:
- यह प्रावधान असंवैधानिक है.
- यह इस धारणा पर आधारित है कि भेदभाव सिर्फ सामान्य (General) वर्ग के छात्र ही करते हैं.
- सेक्शन 3(c) जाति आधारित भेदभाव को केवल SC, ST, OBC के खिलाफ किए गए भेदभाव के रूप में परिभाषित करता है, जबकि जनरल कैटेगरी के लोग इसमें शामिल ही नहीं हैं.
- कोई भी कानून पूर्वधारणा नहीं बना सकता कि भेदभाव सिर्फ एक ही वर्ग द्वारा किया जाता है.
- यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेशों की भावना के खिलाफ है.
- इससे समाज में वैमनस्य बढ़ने का खतरा है और यह संविधान में दी गई समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है.
CJI का सवाल: भेदभाव से सुरक्षा सभी को मिलनी चाहिए?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया, 'अगर दक्षिण भारत का कोई व्यक्ति उत्तर भारत के किसी कॉलेज में पढ़ने आए और वहाँ कोई उसकी जाति को जानता ही न हो, तो क्या यह कानून उसे भेदभाव से सुरक्षा देता है?'
वकील जैन ने जवाब दिया- हां, कानून जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर होने वाले हर प्रकार के भेदभाव को मानता है और उससे सुरक्षा प्रदान करता है. लेकिन किसी भी कानून को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि भेदभाव करने वाला वर्ग केवल General Category का ही होगा.
देशभर में हो रहा विरोध
इधर, यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है. 13 जनवरी को अधिसूचित इन नियमों ने सियासत और कैंपस दोनों में उथल‑पुथल मचा दी है. वाराणसी, दिल्ली समेत देश के कई शहरों में सवर्ण समाज और छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किए हैं.
LIVE UPDATES:
यह स्वागत योग्य कदम है: सुप्रीम कोर्ट की रोक को लेकर बोले विधायक पंकज सिंह
सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी नियमों पर रोक लगाने पर भाजपा विधायक पंकज सिंह ने कहा कि यह एक ज्वलंत मुद्दा था और सुप्रीम कोर्ट ने लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशंस पर रोक लगा दी है. यह एक स्वागत योग्य निर्णय है.
#WATCH | Noida, UP | On Supreme Court staying UGC's Equity Regulations, BJP MLA Pankaj Singh says, "This was a burning issue, and the Supreme Court has stayed UGC's Equity Regulations, keeping in view the sentiments of millions of people. This is a welcoming decision..." (29.01) pic.twitter.com/wxWiMUnyGV
— ANI (@ANI) January 29, 2026
यह हमारी जीत है... यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने पर बोले याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने के बाद याचिकाकर्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि इस कानून में कई खामियां थीं, इसीलिए हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. मेरी याचिका पर आज मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई की और हमें सकारात्मक फैसला मिला है. आगामी सुनवाई तक पुराने नियम लागू रहेंगे. यह हमारी जीत है. हालांकि, यह जीत तब तक पूरी नहीं होगी जब तक कि कानून पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाता, यह आंशिक जीत है. हम इससे खुश हैं और हमारा संघर्ष रंग ला रहा है. हमने पूरे भारत में आंदोलन चलाया है और यह हम सबकी जीत है. सुप्रीम कोर्ट पर हमारा पूरा भरोसा है, जो और भी बढ़ गया है. हमें अब भी उम्मीद है कि सरकार अपने कुछ सदस्यों द्वारा की गई गलतियों को सुधारेगी और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी.
#WATCH | Varanasi, UP | On Supreme Court stays UGC Equity Regulations 2026, petitioner Mrityunjay Tiwari says, "This law had several shortcomings, which is why we decided to approach the Supreme Court... My petition was heard today by the Chief Justice, and we have received a… pic.twitter.com/ke85zka7AP
— ANI (@ANI) January 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चार कानूनी प्रश्न निर्धारित किए
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं और विचार के लिए ऐसे चार प्रश्न निर्धारित किए हैं. कोर्ट ने परिसरों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के हालिया समानता विनियमों पर रोक लगा दी, यह कहते हुए कि ढांचा "प्रथम दृष्टया अस्पष्ट" है, इसके "बहुत व्यापक परिणाम" हो सकते हैं और अंततः यह समाज को "खतरनाक प्रभाव" के साथ विभाजित कर सकता है.
नए नियम समाज में असमानता पैदा कर रहे थे-दिवाकराचार्य महाराज
अयोध्या में दिवाकराचार्य महाराज ने कहा कि UGC के नए प्रावधान समाज में असमानता को बढ़ा रहे थे, जहां हिन्दुओं को संगठित करने की आवश्यकता है. वहां ये नए नियम समाज में असमानता को पैदा कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगाने का काम किया है.
#WATCH अयोध्या: दिवाकराचार्य महाराज ने कहा, "UGC के नए प्रावधान समाज में असमानता को बढ़ा रहे थे। जहां हिन्दुओं को संगठित करने की आवश्यकता है वहां ये नए नियम समाज में असमानता को पैदा कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगाने का काम किया है।" https://t.co/juPzpH5erd pic.twitter.com/tfegfhLRkh
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा- मंत्री दिलीप जायसवाल
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा.
#WATCH पटना: बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर कहा, "सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा।" pic.twitter.com/Ae1KUvWSy4
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं-गुलाम अली खटाना
UGC इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बीजेपी नेता गुलाम अली खटाना ने कहा कि हमने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की थी कि समाज के पिछड़े वर्गों के साथ कोई नाइंसाफी होती है तो उसके लिए कानून बनाया जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने UGC इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाई है, इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.
#WATCH दिल्ली | UGC इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर भाजपा नेता गुलाम अली खटाना ने कहा, "...हमने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की थी कि समाज के पिछड़े वर्गों के साथ कोई नाइंसाफी होती है तो उसके लिए कानून बनाया जाए...क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने UGC इक्विटी रेगुलेशन पर रोक… pic.twitter.com/e6O7iYn2IL
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने दीजिए-उपेंद्र कुशवाहा
आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर कहा कि कोर्ट में मामला है, सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने दीजिए.
भेदभाव करने वाले दोषियों को छोड़ा न जाए- सपा नेता
समाजवादी पार्टी के नेता अमीक जमई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर कहा कि अखिलेश यादव ने पहले दिन से बहुत साफ कह दिया कि भेदभाव करने वाले दोषियों को छोड़ा न जाए और किसी के साथ अन्याय न हो. वो चाहते हैं कि विविधता हो. लेकिन क्या सरकार बताएगी कि देश के कितने विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े या आदिवासी वाइस चांसलर होंगे.
#WATCH दिल्ली: समाजवादी पार्टी के नेता अमीक जमई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने पर कहा, "अखिलेश यादव ने पहले दिन से बहुत साफ कह दिया कि भेदभाव करने वाले दोषियों को छोड़ा न जाए और किसी के साथ अन्याय न हो। वो चाहते हैं कि विविधता हो। लेकिन क्या… pic.twitter.com/4aWZcZy2E8
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
सरकार की कथनी और करनी में फर्क- चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने सरकार की कथनी और करनी में फर्क बताते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो वह अदालत में नए नियमों पर मजबूती से अपना पक्ष रखती. फिर रोक नहीं लगती बल्कि उल्टा गाइडलाइन ही आ जाती कि समितियां बनाकर इसको लागू किया जाए.
सरकार ने मजबूती ने नहीं रखा पक्ष-चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से उनका कोई सवाल नहीं है. उन्होंने नए नियमों पर रोक लगाने का बड़ा कारण यह बताया कि हमारी सरकार ने गाइडलाइन तो बनाई लेकिन उस पर अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाई
कोर्ट का फैसला संविधान सम्मत होगा- सांसद अरुण भारती
सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाने पर LJP(रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा कि अलग-अलग पक्षों की चिंता सामने आ रही थी. कोर्ट में जाने का मतलब है कि सभी पक्षकारों, हितधारकों से बात किया जाएगा सभी पक्षों को सुना जाएगा और इसके बाद कोर्ट जो फैसला लेगी वो संविधान सम्मत फैसला लेगी. कोर्ट जो भी फैसला लेगी सभी को मंजूर होना चाहिए.
#WATCH पटना, बिहार: सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाने पर LJP(रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा, "अलग-अलग पक्षों की चिंता सामने आ रही थी। कोर्ट में जाने का मतलब है कि सभी पक्षकारों, हितधारकों से बात किया जाएगा सभी पक्षों को सुना जाएगा और इसके बाद कोर्ट जो फैसला… pic.twitter.com/matFVX9GUf
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
कोर्ट जो निर्णय करेगा उसके आधार पर कार्रवाई होगी-दयाशंकर सिंह
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाने पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि मामला कोर्ट में गया है. कोर्ट जो निर्णय करेगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
#WATCH लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाने पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, "मामला कोर्ट में गया है। कोर्ट जो निर्णय करेगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।" pic.twitter.com/JNHAHVK9q6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
अभी रोक लगी है, ये रद्द होना चाहिए-कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार
महाराष्ट्र कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाने पर कहा, "बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा था. आज केंद्र सरकार कुछ भी करने से पहले सोचती नहीं है. मैं सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता हूं, अभी रोक लगी है, ये रद्द होना चाहिए."
अलग-अलग स्कूलों की आशंका पर SC की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने चिंता जताई कि हालात कहीं ऐसे न बन जाएं कि अमेरिका में एक समय की तरह अलग-अलग स्कूल बनाने की नौबत आ जाए, जहां श्वेत और अश्वेत बच्चों को अलग पढ़ाया जाता था. इस पर CJI ने कहा, 'ऐसी स्थिति का शरारती तत्वों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है.'
CJI सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पूरे मुद्दे की समीक्षा के लिए कुछ प्रतिष्ठित कानूनविदों की एक कमेटी बनाने पर विचार होना चाहिए. ताकि समाज में बढ़ते विभाजन को रोका जा सके और सभी समुदाय मिलकर विकास कर सकें.
हम पीछे नहीं जा सकते- UGC मामले पर सुनवाई के दौरान बोले CJI
UGC पर मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कड़े शब्दों में कहा, 'भगवान के लिए! आज हमारे समाज में अंतर-जातीय शादियां भी हो रही हैं. हम खुद हॉस्टल में रहे हैं, जहां सभी लोग साथ रहते थे. हम पीछे नहीं जा सकते.'
रैगिंग पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
रैगिंग को लेकर CJI ने विशेष चिंता व्यक्त की और कहा कि सांस्कृतिक विविधता को लक्ष्य बनाकर टिप्पणियां करना एक खतरनाक प्रवृत्ति है.
CJI ने कहा, 'रैगिंग में सबसे बुरा यह है कि दक्षिण भारत या पूर्वोत्तर से आने वाले बच्चे जब अपनी संस्कृति लेकर आते हैं, तो जो लोग उस संस्कृति से परिचित नहीं होते, वे उन पर टिप्पणियां करने लगते हैं.'
UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
UGC के कुछ नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने समाज में बढ़ते वर्गीय व पहचान आधारित विभाजन पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज़ादी के 75 साल बाद भी समाज में ऐसी प्रवृत्तियां बढ़ना चिंताजनक है.
CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी
CJI ने कहा, '75 साल बाद क्या हम एक वर्गहीन समाज बनाने के लिए जो कुछ भी हासिल कर पाए हैं, उससे पीछे जाते हुए प्रतिगामी समाज बनते जा रहे हैं?'
उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान सामने आए उदाहरण यह दिखाते हैं कि समाज में पहचान और समूह-आधारित विभाजन के संकेत बढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए खतरा है.
यूपी: यूजीसी को लेकर बुलंदशहर में भाजपा के 10 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दिया
बुलंदशहर में भाजपा के 10 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे का मुख्य कारण यूजीसी द्वारा हाल ही में अधिसूचित 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' है, जिसे सवर्ण समाज में भारी रोष का कारण बताया जा रहा है. खुर्जा के मुरारी नगर शक्ति केंद्र से जुड़े ये बूथ अध्यक्ष विनय कुमार गुप्ता (बूथ 268), राजवीर सिंह (261), पुरुषोत्तम चौहान (269), चंद्रशेखर शर्मा (270), नीरज कुमार (202), प्रवीण राधव (271), मुकेश कुमार (272), शिवेंद्र चौहान (263) और सतेंद्र चौहान (274) ने 28 जनवरी 2026 को इस्तीफा पत्र सौंपा. पत्र में लिखा है कि सवर्ण समाज हमेशा से भाजपा का कट्टर समर्थक रहा है, लेकिन यूजीसी के नए नियमों से सवर्ण समाज में भारी रोष व्याप्त है. इसे सवर्णों को अत्याचारी और शोषक बताने वाला कानून करार दिया गया है, जिससे पार्टी की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना असंभव हो गया है.
राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने किया यूजीसी के नए नियमों का विरोध
राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए इसका विरोध किया. मिश्र ने सेक्टर-51 स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि नए नियमों को जल्द वापस लिया जाना चाहिए. मिश्र ने कहा कि इन नियमों के कारण छात्रों के बीच भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और किसी भी तरह के भेदभाव या अभद्र टिप्पणी का शिकार होने पर सभी वर्गों के छात्रों को शिकायत करने का समान अधिकार मिलना चाहिए.
सरकार और UGC को उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव संबंधी मुद्दों को हल करने की जरूरत: दिग्विजय सिंह
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने यूजीसी के नए दिशानिर्देशों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और यूजीसी को उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव से संबंधित मुद्दों को हल करने की आवश्यकता है. एक्स पर साझा पोस्ट में सिंह ने कहा कि पायल ताडवी और रोहित वेमुला की माताओं और सुप्रीम कोर्ट के आग्रह पर मोदी सरकार और यूजीसी ने फरवरी 2025 में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन का मसौदा तैयार किया.
दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर में छात्रों ने यूजीसी के नए दिशानिर्देशों के खिलाफ प्रदर्शन किया
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में सामान्य वर्ग के छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा अधिसूचित नए समानता नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की. प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया कि ये नियम परिसरों में समानता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रतिनिधित्व के लिए कोई बाध्यकारी प्रावधान नहीं है.
भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता नए यूजीसी नियमों के खिलाफ
भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता बृजभूषण सिंह बुधवार को नए यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आए और उन्होंने समाज में जाति आधारित बैर रोकने के लिए इस पर पुनर्विचार की मांग की. कैसरगंज से भाजपा सांसद करण भूषण ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद की जिस स्थायी समिति के वह सदस्य हैं, उस समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है.
यूजीसी गाइडलाइंस के खिलाफ डीयू में भी प्रोटेस्ट
यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ प्रदर्शन बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंच गया. कम से कम 50 छात्रों ने इन नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग करते हुए नॉर्थ कैंपस में आर्ट्स फैकल्टी के पास प्रोटेस्ट किया. छात्रों ने डीयू के प्रॉक्टर ऑफिस को एक ज्ञापन सौंपकर यूजीसी के नए नियमों को पक्षपाती और विभाजनकारी करार दिया. उनका कहना था कि ये नियम भेदभाव खत्म करने के बजाय कॉलेजों में छात्रों के बीच विभाजन को गहरा कर सकते हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों ने भी किया प्रदर्शन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों के एक वर्ग ने यूजीसी के नए नियम के विरोध में प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे में इन्हें वापस नहीं लिया गया तो जनांदोलन किया जाएगा. हाईकोर्ट के पास अंबेडकर चौराहे पर वकीलों ने नारेबाजी करते हुए यूजीसी के नए नियम की कॉपी जलाई और इसे विभाजनकारी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की. उनका कहना था कि ये नियम समाज को विभाजित करने वाले हैं. इससे जातियों के बीच दुश्मनी पैदा होगी.
CJI सूर्यकांत की बेंच गुरुवार को करेगी सुनवाई
UGC के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई करेगी. नए नियमों को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. ये नियम एससी-एसटी या ओबीसी वर्ग के अलावा अन्य समुदायों को उनकी शिकायतों के समाधान और संस्थागत सुरक्षा से वंचित करते हैं.
रायबरेली में बीजेपी नेता ने पद छोड़ा, पीएम को भेजा पत्र
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में रायबरेली में बीजेपी के एक पदाधिकारी ने अपना पद छोड़ दिया. रायबरेली में बीजेपी किसान मोर्चा के सलोन मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री और पार्टी नेताओं को लिखे पत्र में नए नियमों को घातक और विभाजनकारी करार दिया.
यूपी के देवरिया में भी मार्च, वकीलों ने किया समर्थन
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के देवरिया में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया. हजारों की संख्या में लोगों ने नारे लगाते हुए सुभाष चौक से कलक्ट्रेट की तरफ मार्च किया. बाद में डीएम दिव्या मित्तल ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर ज्ञापन लिया और रास्ता खुलवाया. कई वकीलों ने प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए काली पट्टी बांधकर काम किया.
UGC के नए नियमों पर तस्वीर साफ करेगी सरकार
UGC के नए नियमों को लेकर जो आशंकाएं फैली हुई हैं, सरकार उन पर जल्दी ही तस्वीर साफ कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर मंत्रालय के अंदर लगातार मंथन चल रहा है और हर पहलू को गौर से देखा जा रहा है. चूंकि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए सरकार कानूनी दायरे में रहते हुए अपनी बात सामने रखेगी. मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये नियम किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं. जैसे ही इन्हें लेकर SOP यानी गाइडलाइंस जारी होंगी, तस्वीर और साफ हो जाएगी.
भदोही में सवर्ण समाज सड़कों पर उतरा, किया प्रदर्शन
यूजीसी के खिलाफ भदोही में सवर्ण समाज ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान हजारों की संख्या में लोग उमड़े. प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एक विद्यार्थी की पहचान उसकी योग्यता से होनी चाहिए, उसकी जाति से नहीं. इस प्रदर्शन के दौरान 'शिक्षा बचाओ, जाति नहीं बढ़ाओ' जैसे नारे गूंजे.
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिकाकर्ता ने अपने मौजूदा स्वरूप में नियमों के कार्यान्वयन को रोकने के लिए निर्देश मांगा है. याचिका में अपील की गई कि जाति पहचान के आधार पर शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच से इनकार करना अस्वीकार्य राज्य भेदभाव के बराबर है. याचिका में कहा गया है कि यह चयनात्मक ढांचा न सिर्फ माफ करता है बल्कि गैर-आरक्षित कैटेगरी के खिलाफ अनियंत्रित दुश्मनी को प्रभावी ढंग से प्रोत्साहित करता है, जिससे नियम समानता के बजाय विभाजन का एक उपकरण बन जाते हैं.
भाजपा के पास कोई काम नहीं, देश में फैला रही नफरत: पप्पू यादव
नए यूजीसी कानून को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ये सरकार केवल देश में नफरत फैलाने का काम कर रही है, इसके अलावा इनके पास कोई काम नहीं है. पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हम लोगों को इस सरकार से कोई उम्मीद नहीं है. इस सरकार से क्या उम्मीद करेंगे? नफरत, समाज को बांटना, तोड़ना, इकोनॉमी पर चर्चा नहीं होनी है. हम तो उम्मीद करेंगे कि जो पचास प्रतिशत टैरिफ लगा है, उस पर सरकार जवाब दे."
सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के उस नियम के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें कथित तौर पर जाति आधारित भेदभाव की ‘गैर-समावेशी’ परिभाषा अपनाई गई है.
मायावती ने यूजीसी के समता संवर्द्धन संबंधी नए नियमों का किया समर्थन, कहा-‘विरोध उचित नहीं’
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध ‘‘बिल्कुल भी उचित नहीं है’’. हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था.
मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा सरकारी कॉलेज और निजी विश्वविद्यालयों में समता समिति बनाने के नए नियम के कुछ प्रावधानों का केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही विरोध कर रहे हैं, इसे भेदभाव और षड्यंत्र मानना कतई उचित नहीं है”
“पहले खामियाँ सुधारें”- UGC विनियम सुनवाई वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में नई UGC विनियम 2026 अधिसूचना के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर हलचल तेज है, जहां अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि पहले याचिका की खामियों को दूर करें, उसके बाद ही मामला सूचीबद्ध किया जाएगा. याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नए विनियमों में सामान्य वर्ग के लिए कोई शिकायत निवारण तंत्र नहीं है और इक्विटी कमेटियों में केवल आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिससे व्यवस्था जातिगत रूप से एकतरफा हो जाती है. नवीनतम याचिका में UGC के नियम 3(c) को चुनौती देते हुए यह मांग की गई है कि इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर, इक्विटी हेल्पलाइन और ओम्बड्सपर्सन की प्रक्रिया सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जाए और शिकायत निवारण के अधिकार को जाति के आधार पर सीमित करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 का उल्लंघन है.
देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लोग
रांची में विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया. बुधवार को भी कई संगठन विरोध प्रदर्शन करेंगे. 
मुझे लगता है कि यूजीसी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए:बीजेपी सांसद
यूजीसी के नए नियम पर राज्यसभा में भाजपा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को विवादों में घसीटना ठीक नहीं है... बेवजह विवाद खड़ा किया गया है. रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून हैं. लेकिन मुझे आशंका है, और लोग खुलकर नहीं कह रहे हैं, कि इन नियमों के बाद शैक्षणिक संस्थान विवादों का केंद्र बन जाएंगे. छात्र किसी भी जाति के हों, वे पढ़ने के लिए वहां हैं और उन्हें यह छूट दी गई है कि चाहे कोई भी बात हो, यहां तक कि मामूली सी लड़ाई भी हो जाए - शिकायत दर्ज कराकर किसी का जीवन बर्बाद कर सकते हैं. इसलिए, इसकी कोई जरूरत नहीं थी. मुझे लगता है कि यूजीसी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए... सरकार को भी इस बारे में सोचना चाहिए..."
#WATCH | Delhi: On the new regulation of UGC, BJP MP in Rajya Sabha and Chairman of Bar Council of India, Manan Kumar Mishra says, "It is not good to drag educational institutions into controversies...A controversy has been broiled which was not needed at all. There are strict… pic.twitter.com/Vl8LG4JfkY
— ANI (@ANI) January 28, 2026
उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन के लिए विनियम 2026 का उद्देश्य सराहनीय: ABVP
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026' के मूल उद्देश्यों की सराहना करती है, लेकिन विनियमों में स्पष्टता और संतुलन अत्यंत आवश्यक है.
ABVP का मानना है कि यूजीसी और सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र की उस अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहां प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने.
ABVP सदैव ही शैक्षिक परिसरों में सकारात्मक और समतायुक्त परिवेश बनाने की दिशा में कार्य करती रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन की पक्षधर रही है. आगामी वर्षों में 'विकसित भारत' के संकल्पना को सिद्ध करने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है.
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियम के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया. छात्र मानते हैं कि यूजीसी के हाल ही में अधिसूचित नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान देने और नियमों में सुधार करने की अपील की. प्रदर्शन में कई छात्र-नेता और विवि छात्र संगठन शामिल रहे.
विश्विद्यालय में मंगलवार को छात्रों के जोरदार प्रदर्शन के बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासन को पूरे परिसर में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और विश्वविद्यालय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. प्रवेश द्वार संख्या-एक पर एकत्र छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों को अव्यवहारिक, अस्पष्ट और मनमाना करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की.
यूजीसी के नए नियम भेदभावपूर्ण नहीं होंगे, दुरुपयोग नहीं होगा: सरकार का आश्वासन
सरकार ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए नए यूजीसी नियमों का ‘‘दुरुपयोग’’ नहीं होने दिया जाएगा और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. वहीं, छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि ये नियम परिसरों में अराजकता पैदा कर सकते हैं.
इस बीच, सरकारी नीतियों, विशेष रूप से नए यूजीसी नियमों के विरोध में सेवा से इस्तीफा देने के बाद अनुशासनहीनता के आरोपों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निलंबित किए गए बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने खिलाफ सुनियोजित साजिश का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट में धरना दिया.