कन्नड़ संगठनों की धमकी के बाद बेंगलुरु में मेट्रो स्टेशन का हिंदी में लिखा नाम छुपा दिया गया है.
- हिंदी बोर्ड और हिंदी में एनाउंसमेंट बंद करने की दी गई धमकी
- मेट्रो रेल ने एहतियात के तौर पर हिंदी में लिखे नाम छुपाए
- पुलिस मेट्रो स्टेशनों को सुरक्षा देने के लिए तैयार
बेंगलुरु:
बेंगलुरु के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर हिंदी में उस जगह के नाम को कागज और टेप की मदद से छुपा दिया गया है. चिकपेट मेट्रो स्टेशन हाल ही में खुला है. दूसरे स्टेशनों की ही तरह इसका नाम भी हिंदी, अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में लिखा हुआ था. लेकिन रविवार की शाम को अचानक हिंदी में लिखी इबारत कागज और टेप की मदद से छुपा दी गई.
मेट्रो स्टेशनों के हिंदी में लिखे नाम किसने छुपाए? इस सवाल का जवाब जब हमने बेंगलुरु मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों से जनाना चाहा तो किसी ने भी इसका सीधा जवाब नहीं दिया बल्कि कोई न कोई बहाना बना दिया.
जब हमने कन्नड़ रक्षणा वेदिके के अध्यक्ष प्रवीण शेट्टी से पूछा कि क्या उन्होंने या उनके संगठन की तरफ से यह कार्रवाई की गई है तो उनका कहना था कि उनके संगठन ने मेट्रो रेल के अधिकारियों को साफ तौर पर कहा था कि अगर हिंदी बोर्ड और हिंदी में एनाउंसमेंट बंद नहीं किया गया तो वो कार्रवाई करेंगे. हालांकि उन्होंने यह सफाई भी दी कि मेट्रो स्टेशन पर हिंदी में लिखे नामों को उन्होंने या किसी अन्य कन्नड़ संगठन ने नहीं छुपाया है बल्कि लगता है कि एहतियात के तौर पर मेट्रो रेल ने खुद ही हिंदी का नाम छुपाया है.
बेंगलुरु पुलिस के वेस्ट डिवीजन के डीसीपी एमए अनुचेथ ने शाम को मीडिया को बताया कि कोई गलत खबर फैला रहा है कि उन्होंने मेट्रो रेल अधिकारियों को सलाह दी थी कि मेट्रो स्टेशन पर हिंदी में लिखी इबारत को छुपा दिया जाए. डीसीपी अनुचेथ का कहना है कि उनके डिवीजन में आने वाले सभी स्टेशनों को वे सुरक्षा देने को तैयार हैं.
कन्नड़ संगठनों का कहना है कि महाराष्ट्र और केरल में भी मेट्रो रेल है लेकिन वहां हिंदी को तरजीह नहीं दी जाती. ऐसे में कर्नाटक में भी नहीं दी जानी चाहिए.
मेट्रो स्टेशनों के हिंदी में लिखे नाम किसने छुपाए? इस सवाल का जवाब जब हमने बेंगलुरु मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों से जनाना चाहा तो किसी ने भी इसका सीधा जवाब नहीं दिया बल्कि कोई न कोई बहाना बना दिया.
जब हमने कन्नड़ रक्षणा वेदिके के अध्यक्ष प्रवीण शेट्टी से पूछा कि क्या उन्होंने या उनके संगठन की तरफ से यह कार्रवाई की गई है तो उनका कहना था कि उनके संगठन ने मेट्रो रेल के अधिकारियों को साफ तौर पर कहा था कि अगर हिंदी बोर्ड और हिंदी में एनाउंसमेंट बंद नहीं किया गया तो वो कार्रवाई करेंगे. हालांकि उन्होंने यह सफाई भी दी कि मेट्रो स्टेशन पर हिंदी में लिखे नामों को उन्होंने या किसी अन्य कन्नड़ संगठन ने नहीं छुपाया है बल्कि लगता है कि एहतियात के तौर पर मेट्रो रेल ने खुद ही हिंदी का नाम छुपाया है.
बेंगलुरु पुलिस के वेस्ट डिवीजन के डीसीपी एमए अनुचेथ ने शाम को मीडिया को बताया कि कोई गलत खबर फैला रहा है कि उन्होंने मेट्रो रेल अधिकारियों को सलाह दी थी कि मेट्रो स्टेशन पर हिंदी में लिखी इबारत को छुपा दिया जाए. डीसीपी अनुचेथ का कहना है कि उनके डिवीजन में आने वाले सभी स्टेशनों को वे सुरक्षा देने को तैयार हैं.
कन्नड़ संगठनों का कहना है कि महाराष्ट्र और केरल में भी मेट्रो रेल है लेकिन वहां हिंदी को तरजीह नहीं दी जाती. ऐसे में कर्नाटक में भी नहीं दी जानी चाहिए.
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