भारत और नेपाल भले ही पड़ोसी देश हों लेकिन जब बात ऑटोमोबाइल मार्केट और गाड़ियों की कीमतों की आती है, तो जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है. भारत में जो गाड़ियां मिड-प्रीमियम या बजट सेगमेंट में गिनी जाती हैं, नेपाल पहुंचते ही वे सुपर-लग्जरी कैटेगरी में शामिल हो जाती हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण Toyota Fortuner है. नेपाल में इस कार की कीमत इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि उतने बजट में एक भारतीय ग्राहक अपने घर में महिंद्रा Scorpio-N और MG Majestor जैसी दो बड़ी एसयूवी एक साथ खड़ी कर सकता है.
नेपाल में टोयोटा फॉर्च्यूनर की चौंकाने वाली कीमत
टोयोटा फॉर्च्यूनर भारत और नेपाल दोनों ही देशों के ग्राहकों के बीच स्टेटस सिंबल मानी जाती है. भारत में फॉर्च्यूनर की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹34.76 लाख से शुरू होकर ₹50.46 लाख तक जाती है. लेकिन जब आप इसी गाड़ी के 4x4 वेरिएंट को नेपाल में खरीदने जाएंगे, तो वहां इसकी कीमत नेपाली रुपये में NPR 2.83 करोड़ तक पहुंच जाती है. अगर इस रकम को भारतीय रुपये (INR) में बदला जाए, तो यह लगभग ₹1.76 करोड़ बैठती है. यानी भारत के मुकाबले नेपाल में एक फॉर्च्यूनर खरीदने के लिए तीन गुना से भी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं.
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नेपाल में स्कॉर्पियो-एन का क्या है हाल?
टैक्स की यह मार सिर्फ टोयोटा पर ही नहीं बल्कि महिंद्रा पर भी पड़ती है. भारत में बेहद किफायती मानी जाने वाली महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन जब नेपाल के बाजार में बिकने जाती है, तो वहां इसकी कीमत भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाती है. नेपाल में इसके अलग-अलग वेरिएंट्स की कीमत भारतीय करेंसी के हिसाब से ₹60 लाख के आंकड़े को भी पार कर जाती है. यही वजह है कि नेपाल में कार खरीदना एक बहुत बड़ा निवेश माना जाता है.
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नेपाल में गाड़ियां इतनी महंगी क्यों हैं?
नेपाल में कारों की कीमतें इतनी ज्यादा होने की सबसे मुख्य वजह वहां की सख्त और भारी इम्पोर्ट टैक्स पॉलिसी (Import Taxation) है. नेपाल में बड़े पैमाने पर गाड़ियों का लोकल प्रोडक्शन या मैन्युफैक्चरिंग नहीं होती है, जिसके कारण लगभग सभी गाड़ियां सीधे विदेश से इम्पोर्ट की जाती हैं. सरकार इन गाड़ियों पर भारी कस्टम ड्यूटी, इंजन साइज (cc) के हिसाब से भारी एक्साइज ड्यूटी और पर्यावरण टैक्स लगाती है. खासकर डीजल से चलने वाली बड़ी SUV गाड़ियों पर यह टैक्स सबसे ज्यादा होता है, जो इसकी कीमत को लग्जरी कारों के बराबर पहुंचा देता है.
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