- पुरानी कार खरीदने से पहले ये जांच जरूर करें
- सेकेंड हैंड कार खरीदते समय दस्तावेज और टेस्ट ड्राइव न भूलें
- सही जांच से बच सकते हैं बड़े नुकसान से
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कार बाजार है और इसमें इस्तेमाल की गई यानी सेकेंड हैंड कारों का भी बड़ा हिस्सा है. आजकल कई लोग कम कीमत में बड़ी कार या लग्जरी कार खरीदने के लिए प्री-ओन्ड कारों का विकल्प चुन रहे हैं. इस वजह से सेकेंड हैंड कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि पुरानी कार खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही भी आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए किसी भी सेकेंड हैंड कार की डील फाइनल करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करना बेहद जरूरी है.
कार की अच्छी तरह जांच करें
पुरानी कार खरीदने से पहले सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम उसकी अच्छी तरह जांच करना है. कार को बाहर और अंदर दोनों तरफ से ध्यान से देखें. अगर ऑनलाइन फोटो और वास्तविक कार में कोई अंतर दिखाई देता है तो उसकी तस्वीर जरूर लें.
अगर संभव हो तो अपने साथ किसी भरोसेमंद मैकेनिक या ऐसे व्यक्ति को लेकर जाएं जिसे कारों की अच्छी जानकारी हो. कई बार अनुभवी व्यक्ति ऐसी कमियां पकड़ लेता है जो सामान्य खरीदार की नजर से छूट जाती हैं.
कार की जांच के दौरान दरवाजों के आसपास जंग, सीटों की मरम्मत, टूटे हुए प्लास्टिक पार्ट्स, इंजन से ऑयल लीक, टायरों की स्थिति, रबर सील, केबिन और बूट में फफूंदी, सीट बेल्ट और हेडरेस्ट की कार्यक्षमता, इंजन चेतावनी लाइट और इंजन ऑयल के स्तर जैसी चीजों पर विशेष ध्यान दें.
सर्विस हिस्ट्री जरूर देखें
कार खरीदने से पहले उसकी पूरी सर्विस हिस्ट्री जरूर मांगें. अगर रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं तो उनकी भी जांच करें. रिकॉर्ड पहले सर्विस से लेकर अब तक का होना चाहिए.
सर्विस हिस्ट्री से पता चलता है कि कार में अब तक कौन-कौन से पार्ट्स बदले गए हैं और आगे किन चीजों पर खर्च आने वाला है. अगर कार में जल्द ही कोई बड़ा काम होना है तो उसी आधार पर कीमत कम कराने की भी गुंजाइश बन सकती है.
ओरिजिनल खरीद बिल और दस्तावेज चेक करें
यह सुनिश्चित करें कि कार पहली बार कानूनी तरीके से खरीदी गई थी. इसके लिए ओरिजिनल सेल बिल जरूर देखें. इसके अलावा Registration Certificate (RC), Insurance, Pollution Under Control (PUC) Certificate और अन्य जरूरी दस्तावेज पूरी तरह अपडेट होने चाहिए. सामान्य निजी वाहनों को 15 साल का Registration Certificate मिलता है और उसके बाद हर पांच साल के लिए नवीनीकरण कराया जाता है. इसलिए RC की वैधता भी जरूर जांचें.
चालान या कानूनी मामला लंबित तो नहीं?
कार खरीदने से पहले यह भी जांच लें कि उस पर कोई ट्रैफिक चालान या कानूनी मामला लंबित तो नहीं है. अगर वाहन पर कोई केस चल रहा है या भारी जुर्माना बाकी है तो भविष्य में कार जब्त भी हो सकती है. आजकल अलग-अलग राज्य सरकारों के ऑनलाइन पोर्टल पर वाहन से जुड़ी ऐसी जानकारी आसानी से देखी जा सकती है. इसलिए डील फाइनल करने से पहले यह जांच जरूर कर लें.
गैरकानूनी मॉडिफिकेशन से बचें
अगर कार में ऐसे बदलाव किए गए हैं जो कानून के मुताबिक मान्य नहीं हैं, तो ऐसी कार खरीदने से बचना बेहतर होगा. कई बार पहले मालिक ने कार में ऐसे मॉडिफिकेशन करा लिए होते हैं जिन्हें हटाना आसान नहीं होता. चाहे कीमत कितनी भी आकर्षक क्यों न हो, ऐसी कार से दूरी बनाना ही समझदारी है.
टेस्ट ड्राइव जरूर करें
सभी दस्तावेज और बाहरी जांच पूरी होने के बाद कार की टेस्ट ड्राइव जरूर करें. कोशिश करें कि मौजूदा मालिक भी आपके साथ मौजूद रहे. अगर संभव हो तो टेस्ट ड्राइव की रिकॉर्डिंग भी कर लें ताकि बाद में किसी तरह का विवाद न हो.
टेस्ट ड्राइव के दौरान कार से आने वाली आवाजों, फैन बेल्ट की आवाज, टायरों की स्थिति, ब्रेक की कार्यक्षमता, स्टीयरिंग अलाइनमेंट, सभी लाइट्स, फॉग लाइट, टेललैंप, सेंट्रल लॉकिंग, रिवर्स कैमरा और अगर कार में ADAS फीचर दिया गया है तो उसके सभी सामान्य फंक्शन भी जांच लें. साथ ही यह भी देखें कि कार का चेसिस किसी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त तो नहीं हुआ है.
ऑनलाइन कीमतों की तुलना करें
डील फाइनल करने से पहले अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उसी मॉडल और वेरिएंट की कीमतों की तुलना जरूर करें. इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि जिस कार को आप खरीद रहे हैं उसकी कीमत सही है या नहीं. सही तुलना करने से बेहतर सौदा मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
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