PM मोदी ने किया फ्री ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान, 1,900 करोड़ के बाजार का क्या होगा?
इस एक ऐलान के बाद से सवाल उठने लगा है कि आखिर प्राइवेट ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री का क्या होगा. जो छात्र अभी मोटी फीस देकर इन ऑनलाइन कोर्स को अटेंड करते हैं, क्या वो अब सरकार की इस मुफ्त योजना की ओर बढ़ जाएंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ऐलान किया है कि सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और काबिल शिक्षकों को एक साथ लाकर अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध करवाएगी. इस एक ऐलान के बाद से सवाल उठने लगा है कि आखिर प्राइवेट ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री का क्या होगा. जो छात्र अभी मोटी फीस देकर इन ऑनलाइन कोर्स को अटेंड करते हैं, क्या वो अब सरकार की इस मुफ्त योजना की ओर बढ़ जाएंगे?
भारत में कितना बड़ा है ऑनलाइन कोचिंग बाजार?
Allied Market Research की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऑनलाइन कोचिंग बाजार 2023 में करीब 1900 करोड़ का रहा. बड़ी बात यह है कि 2034 तक यह आंकड़ा 8100 करोड़ रुपये पहुंच सकता है. इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ 11 सालों में भारत का ऑनलाइन कोचिंग बाजार चार गुना से भी ज्यादा बढ़ सकता है.
बात अगर सिर्फ निजी कोचिंग इंडस्ट्री की करें तो और भी दिलचस्प आंकड़े सामने आते हैं. MoSPI के Comprehensive Modular Survey: Education 2025 के मुताबिक वर्तमान में भारत में 27 फीसदी ऐसे छात्र हैं जो निजी कोचिंग ले रहे हैं या ले चुके हैं. ग्रामीण इलाकों में तो यह संख्या 25.5 फीसदी दर्ज की गई है, वहीं शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 30.7 प्रतिशत है.
सरकार का ही डेटा बताता है कि अलग-अलग स्तर पर कोचिंग की जरूरत भी अलग रही है. आंकड़ों के अनुसार माध्यमिक कक्षा के 37.8 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी के 37 प्रतिशत छात्र निजी कोचिंग ले रहे हैं. मिडिल क्लास में यह आंकड़ा 29.6 प्रतिशत, प्राइमरी में 22.9 प्रतिशत और प्री-प्राइमरी में 11.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

निजी कोचिंग पर कितना खर्च?
व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण के अनुसार निजी कोचिंग पर एक छात्र का औसत सालाना खर्च 2,409 रुपये रहता है. यहां भी पुरुषों पर 2,572 रुपये और महिलाओं पर 2,227 रुपये खर्च किया जाता है. अगर ग्रामीण और शहरी लिहाज से देखें तो भी एक ट्रेंड पकड़ में आता है. ग्रामीण भारत में एक छात्र पर निजी कोचिंग का औसत 1793 रुपये खर्च होता है, वहीं शहरी इलाकों में यह आंकड़ा बढ़कर 3988 रुपये सालाना हो जाता है.
कौन उठा रहा छात्रों की पढ़ाई का खर्च?
सर्वे से यह भी पता चला है कि छात्र जो निजी कोचिंग के लिए जाते हैं और उनकी जो पूरी शिक्षा का खर्च रहता है उसका वहन उनके परिवार का ही कोई दूसरा सदस्य उठाता है. 95 फीसदी छात्रों ने बताया है कि उनकी शिक्षा का खर्च घर के दूसरे सदस्य द्वारा उठाया जा रहा है. ग्रामीण इलाकों में पुरुष छात्रों के लिए यह आंकड़ा 91.1 प्रतिशत दर्ज किया गय है और महिला छात्रों के लिए 90.8 प्रतिशत रहा है। शहरी इलाकों में पुरुष छात्रों के लिए यहस संख्या 93.1 प्रतिशत और महिला छात्रों के लिए 91.4 प्रतिशत रहा है।
भारत में ऑनलाइन कोचिंग की राह
कितनों के पास स्मार्ट फोन?
भारत में ऑनलाइन कोचिंग का बाजार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. कई कंपनियों ने छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अलग-अलग पैकेज निकाले हैं. लेकिन ऑनलाइन कोचिंग की सफलता का एक आधार मोबाइल फोन होता है. Annual Status of Education Report (ASER) 2024 के मुताबिक भारत में 14 से 16 साल के 82 फीसदी बच्चों को स्मार्टफोन इस्तेमाल करना आता है. लेकिन यहां सिर्फ 57 फीसदी ऐसे छात्र हैं जो स्मार्टफोन को पढ़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. 76 फीसदी आबादी ऐसी है जो सोशल मीडिया के लिए फोन का इस्तेमाल कर रही है.
इस सर्वे से यह भी पता चला कि देश में 26.9 फीसदी लड़कियों के पास अपना खुद का स्मार्टफोन है, वहीं लड़कों में यह संख्या 36.2 फीसदी रही है.
देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी की क्या स्थिति?
भारत में ऑनलाइन कोचिंग की स्थिति तभी ज्यादा अनुकूल रहेगी जब इंटरनेट सेवाएं भी मजबूत हों.
Comprehensive Modular Survey on Telecom की 2025 की एक विस्तृत रिपोर्ट है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में इंटरनेट की पहुंच जरूर अब बढ़ चुकी है, लेकिन अभी भी गांव और शहर का अंतर बड़ा है. ग्रामीण इलाकों में तो 83.3 फीसदी घरों तक इंटरनेट की सुविधा है, शहर में यह संख्या 91.6 फीसदी दर्ज की गई है. दूसरे शब्दों में कहें तो ग्रामीण में तो आज भी छह में से एक घर के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं आई है, शहरों में यह आंकड़ा हर 12 में से एक घर रहा है.
इंटरनेट स्पीड को लेकर भी आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं. वर्तमान में सिर्फ 3.8 फीसदी घरों में ही ऑप्टिकल फाइबर के जरिए इंटरनेट मिल रहा है, शहरों में यह संख्या 15.3 फीसदी दर्ज की गई है. अगर वाई-फाई नेटरव्क की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में यह संख्या 9.1 फीसदी है, वहीं शहरों में यह आंकड़ा 24 फीसदी है. वैसे मोबाइल नेटवर्क के मामले में जरूर ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्थिति एक समान ही दिखाई देती है. ग्रामीण इलाकों में 98.8 फीसदी और शहरी इलाकों में 98.9 फीसदी घरों तक मोबाइल नेटवर्क जेरिए इंटरनेट पहुंच रहा है.
जागरूकता की कमी की वजह से कई लोग इंटरनेट से वंचित चल रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में 49 फीसदी घरों में डिजिटल जानकारी के आभाव में लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. शहरों में यह आंकड़ा 42.7 फीसदी दर्ज किया गया है.
पीएम के ऐलान का किस पर सबसे ज्यादा असर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की बात कर रहे हैं, अगर उनकी यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो उस स्थिति में सिर्फ ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री तक असर सीमित नहीं रहने वाला है. बल्कि पिछले कुछ सालों में कोटा, दिल्ली का पुराने राजेंद्र नगर जो कोचिंग हब बन चुके हैं, इनके कारोबार को भी झटका लग सकता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोटा में कोचिंग का कारोबार आज करीब 5 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चल रहा है. यहां भी सालाना फीस 40 हजार रुपये से 1.5 लाख रुपये तक चली जाती है. अगर किसी भी छात्र को जेईई और नीट की तैयारी करनी होती है, तो बड़ी संख्या में छात्र कोटा का रुख करते हैं. इसी तरह सिविल सेवाओं की तैयारी के लिए कई अभ्यार्थी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर आते हैं.
लेकिन अगर इन अभ्यार्थियों को फ्री में ही अनुभवी शिक्षकों द्वारा उनकी परीक्षा की तैयारी करवाई जाएगी तो संभावना है कि कम छात्र अपना घर छोड़ दूसरे शहरों का रुख करेंगे. उस स्थिति में कोटा और ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे कोचिंग हब को कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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