गुरुग्राम के हिट-एंड-रन मामले ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है. इस मामले में महिला बाइक राइडर सिया को एक कार ने खदेड़ा और टक्कर मारी. इस घटना का वीडियो वायरल होने इंटरनेट पर यूजर्स काफी आक्रोश हो गए. लेकिन, इस घटना के बाद तेज रफ्तार वाले व्हीकल्स की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई. भले ही ये गाड़ियां लोगों का ध्यान बहुत खींचती हैं, लेकिन प्रीमियम मोटरसाइकिलें अभी भी भारत के टू-व्हीलर्स बाजार का एक बेहद छोटा हिस्सा हैं. भारतीय बाजार में 350cc से ऊपर की बाइक कुल बिक्री का केवल 1.4 प्रतिशत ही प्रीमियम बाइक्स हैं.
भारत में साल 2025-26 के दौरान 2 करोड़ से अधिक टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई. जिसमें 1.3 करोड़ मोटरसाइकिलें, 81.2 लाख स्कूटर और 5.2 लाख मोपेड शामिल थे. इस दौरान बिकी कुल मोटरसाइकिलों में से 72.9 प्रतिशत 125cc से कम क्षमता वाली थीं. जबकि अन्य 15.6 प्रतिशत मोटरसाइकिलें 125cc-200cc की कैटेगरी में थीं. वहीं 200cc-350cc सेगमेंट की मोटरसाइकिलों की हिस्सेदारी 10.1 प्रतिशत रही. दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत में बिकने वाली कुल मोटरसाइकिलों में से 98.6 प्रतिशत 350cc से कम क्षमता की थीं.

350cc मोटरसाइकिल में किसका दबदबा?
SIAM के आंकड़ों के अनुसार, भारत में साल 2025-26 में 350cc से कम क्षमता वाली लगभग 1.29 करोड़ मोटरसाइकिलें बेची गईं. इस सेगमेंट पर Hero MotoCorp का 42.5 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दबदबा रहा. इसके बाद Honda 20.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रही. Bajaj Auto की हिस्सेदारी 15.3 प्रतिशत और TVS Motor की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत रही. वहीं Royal Enfield 7.9 प्रतिशत और Yamaha तीन प्रतिशत हिस्सेदारी पर काबिज रहीं.
इस 350cc से कम के सेगमेंट की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इस पर मिलने वाला टैक्स का फायदा है. 350cc तक की मोटरसाइकिलों पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है. इससे अधिक क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर सीधे 40 प्रतिशत की भारी दर से जीएसटी वसूला जाता है. कीमत के इसी बड़े अंतर और फायदे ने कई मैन्युफैक्चर्स को इस लिमिट से नीचे वाले मॉडल्स पर ध्यान फोकस करने के लिए इंस्पायर्ड किया है. यही वजह है कि Triumph और KTM जैसे ब्रांड्स ने एक बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंचने के लिए 350cc से कम की कैटेगरी में अपने मॉडल्स का काफी विस्तार किया है.

प्रीमियम बाइक के लीडर्स
भारत के कुल मोटरसाइकिल बाजार में 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिलों की हिस्सेदारी महज 1.4 प्रतिशत है. इस छोटे से सेगमेंट के भीतर भी बिक्री केवल कुछ ही चुनिंदा कंपनियों के बीच बंटी हुई है. इस बड़े सेगमेंट में Royal Enfield 46 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, जबकि Bajaj Auto (जिसमें KTM भी शामिल है) 42 प्रतिशत हिस्सेदारी पर काबिज है. ये दोनों मैन्युफैक्चरर मिलकर इस पूरे सेगमेंट के लगभग 88 प्रतिशत हिस्से पर अपना कंट्रोल रखते हैं.

Hero MotoCorp (पार्टनरशिप के तहत बेचे जाने वाले Harley-Davidson मॉडल्स भी शामिल) की हिस्सेदारी लगभग 8.1 प्रतिशत है. Piaggio Group का हिस्सा Aprilia 1.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है, जबकि शेष बची हिस्सेदारी में Kawasaki, Honda, Triumph और Suzuki शामिल हैं.
ये आंकड़े सोशल मीडिया की धारणा और असल जमीनी हकीकत के बीच एक बहुत बड़े अंतर को उजागर करते हैं. बेहद पावरफुल मोटरसाइकिलें भले ही सोशल मीडिया रील्स, वीकेंड राइडिंग ग्रुप्स और ऑनलाइन चर्चाओं में छाई रहती हों, लेकिन प्रैक्टिकैलिटी और बजट से चलने वाले इस बड़े बाजार में वे अभी भी एक बहुत ही छोटा और सीमित हिस्सा हैं.
भारत में बिकने वाली हर एक प्रीमियम मोटरसाइकिल के मुकाबले दर्जनों साधारण कम्यूटर मोटरसाइकिलें शोरूम से बाहर निकलती हैं. तेज रफ्तार गाड़ियों से जुड़ी घटनाएं भले ही बहुत अधिक ध्यान खींचती हों, लेकिन देश के दुपहिया बाजार की असली कहानी आज भी उसी साधारण कम्यूटर मोटरसाइकिल द्वारा लिखी जा रही है जिस पर हर रोज करोड़ों लोग भरोसा करते हैं.
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