पिछले कुछ दशकों के रुझान बताते हैं कि राजनीतिक पार्टियां लोकतांत्रिक ढांचे के सबसे ऊपरी हिस्से, यानी संसद को कमजोर करने की साजिश में चुपचाप शामिल हो गई हैं. उन्होंने जवाबदेह लोकतंत्र के इस मंदिर को दरकिनार करना सीख लिया है और दूसरे तरीकों से चुनाव जीत रही हैं.