Walt Disney ki Success Story: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा, जिसने मिकी माउस का नाम न सुना हो या डिज़्नी की फिल्में न देखी हों, लेकिन इस 'जादुई' दुनिया को खड़ा करने वाले वॉल्ट डिज़्नी की लाइफ किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं रही. मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया के मुताबिक 22 साल की उम्र में जब उन्होंने एक अखबार में कार्टूनिस्ट की नौकरी शुरू की, तो उनके बॉस ने उन्हें ये कहकर निकाल दिया था कि उनके पास नई इमेजिनेशन नहीं है और वो बेहद आलसी हैं.
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दिवालिया हुआ पहला स्टूडियो और फर्श पर सोकर गुजारी रातें (Walt Disney ka Struggle)
नौकरी से निकाले जाने के बाद वॉल्ट ने अपना खुद का लाफ-ओ-ग्राम स्टूडियो खोला, लेकिन ये बिजनेस भी बुरी तरह फ्लॉप हो गया और वो पाई-पाई के मोहताज हो गए. आर्थिक तंगी का आलम ये था कि उनके पास मकान का किराया देने तक के पैसे नहीं बचे थे. उस दौर में वो अपने ऑफिस के फर्श पर सोते थे और कई बार बेहद मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए दिन बिताते थे.
एक छोटे से चूहे ने बदल दी किस्मत और जन्मा मिकी माउस (Mickey Mouse origin story)
इसी तंगी के दिनों में उनके ऑफिस में एक चूहा अक्सर चोरी-छिपे आता-जाता रहता था. उस चूहे की हरकतों को देखकर वॉल्ट के मन में एक नया किरदार बनाने का ख्याल आया, जिसे आज दुनिया मिकी माउस के नाम से जानती है. 1928 में जब मिकी माउस पर्दे पर उतरा, तो उसने रातों-रात सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिससे वॉल्ट की किस्मत का सितारा भी चमक उठा.
302 बार रिजेक्शन के बाद सच हुआ डिज़्नीलैंड का सपना (Disneyland history)
मिकी माउस के बाद वॉल्ट का अगला बड़ा सपना एक ऐसा थीम पार्क बनाना था, जहां पूरा परिवार एक साथ खुशियों भरा समय बिता सके. बैंकों और इन्वेस्टर्स ने इस आइडिया को बेतुका बताकर उन्हें 302 बार रिजेक्ट किया गया, लेकिन वॉल्ट अपने इरादे पर अडिग रहे और 16 अक्टूबर 1923 को शुरू हुई छोटी सी कंपनी ने आगे चलकर दुनिया का सबसे बड़ा अम्यूजमेंट पार्क डिज़्नीलैंड खड़ा कर दिया.
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