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यहां भूलकर भी सड़क पर खड़ी स्कूल बस के बगल से मत निकालना गाड़ी, घर आ जाएगा 21 हजार का चालान

इस देश में सड़क किनारे स्कूल बस के रुकते ही क्यों 'फ्रीज' हो जाता है दोनों साइड का ट्रैफिक? इसके पीछे क्या वजह है? जवाब जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.

यहां भूलकर भी सड़क पर खड़ी स्कूल बस के बगल से मत निकालना गाड़ी, घर आ जाएगा 21 हजार का चालान
अमेरिका में स्कूल बस ओवरटेक करने पर कटता है 21 हजार का चालान.
Instagram/NSCL

Viral News: अमेरिका में अगर कोई कार-बस-ट्रक ड्राइवर रुकी हुई स्कूल बस को ओवरटेक करने की गलती करता है, तो उसे 250 डॉलर (करीब 21 हजार रुपये) तक का भारी चालान भरना पड़ता है, और उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. अमेरिका में बच्चों की जान बचाने के लिए इस नियम को सख्ती से लागू किया गया है. लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2022-2023 में ही इस नियम को 4.35 करोड़ बार तोड़ा गया है. इसी जानलेवा लापरवाही को रोकने के लिए प्रशासन ने अब सड़कों पर पुलिस की तैनाती के बजाय बसों पर ही हाई-टेक कैमरे लगाकर ऑटोमैटिक चालान का सिस्टम शुरू कर दिया है. आइए समझते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है और क्यों यह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है.

बस रुकते ही बाहर आता है 'STOP' का बोर्ड

अब जब भी बच्चों को चढ़ाने या उतारने के लिए  स्कूल बस रुकने वाली होती है, तो सबसे पहले पीली लाइटें जलती हैं. यह पीछे आ रहे वाहनों के लिए अपनी रफ्तार धीमी करने का अलर्ट होता है. बस के पूरी तरह रुकते ही लाल बत्तियां फ्लैश होने लगती हैं और ड्राइवर के बाईं तरफ से लाल रंग का एक STOP लिखा हुआ बोर्ड (Stop-Arm) बाहर निकल आता है. 

ट्रैफिक नियम के मुताबिक, यह बोर्ड बाहर आते ही पीछे से आने वाली हर गाड़ी को अपनी जगह पर रुकना ही होगा. अगर सड़क बिना डिवाइडर वाली है, तो सामने से आने वाले वाहनों के पहिए भी वहीं थम जाने चाहिए, जब तक कि बच्चे सुरक्षित सड़क पार न कर लें.

53 सालों के आंकड़ों ने किया कानून को सख्त

अमेरिकी परिवहन विभाग (U.S. DOT) ने यह कानून रातों-रात इतना कड़ा नहीं किया है. इसके पीछे दशकों के दर्दनाक हादसों की हकीकत है. कंसास एजुकेशन डिपार्टमेंट की 53 सालों की विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि बस में चढ़ते-उतरते वक्त हुए हादसों में 1,267 लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा डराने वाला तथ्य यह है कि इन मौतों में 73 प्रतिशत बच्चे 9 साल या उससे कम उम्र के थे. 2012 से 2021 के बीच भी ऐसे हादसों में 206 स्कूली बच्चों की जान गई. इन्हीं मौतों का सिलसिला हमेशा के लिए तोड़ने के लिए सेफ सिस्टम एप्रोच (Safe System Approach) लागू किया गया है.

आखिर क्यों मासूमों की जान दांव पर लगाते हैं लोग?

हालांकि, इतनी सख्ती और साफ नियमों के बावजूद आज भी कुछ लोग बाज नहीं आ रहे हैं. जब एक बड़े राष्ट्रीय सर्वे में साढ़े तीन हजार ड्राइवर्स से पूछा गया कि वे रुकी हुई बस को ओवरटेक क्यों करते हैं, तो जो जवाब मिले वो हैरान करने वाले थे. 30 प्रतिशत ड्राइवर्स ने बेशर्मी से माना कि 'उन्हें नियम की कोई परवाह ही नहीं थी'. वहीं, करीब 25 प्रतिशत लोगों का बहाना था कि 'वे बहुत जल्दी में थे'. लगभग 24 प्रतिशत ने नियम की जानकारी न होने की बात कही. लोगों की इसी जानलेवा हड़बड़ी को देखते हुए प्रशासन को कार्रवाई का पूरा तरीका ही बदलना पड़ा.

NCSL के मुताबिक, अमेरिका के कुल 50 राज्यों में से वर्तमान में 30 राज्यों में कानूनी तौर पर 'स्टॉप-आर्म कैमरों' के जरिए ऑटोमैटिक चालान काटने की आधिकारिक अनुमति दी जा चुकी है.

बसों पर लगे कैमरे काट रहे सीधा चालान

हर बस रूट और चौराहे पर पुलिस तैनात करना मुमकिन नहीं था. इसलिए, अब पेंसिल्वेनिया के एलेनटाउन और बेथलहम जैसे कई शहरों में स्कूल बसों के बाहर ही हाई-रिजॉल्यूशन ऑटोमेटेड कैमरे लगा दिए गए हैं. जैसे ही कोई गाड़ी 'स्टॉप-आर्म' को इग्नोर करके बस के बगल से गुजरती है, ये कैमरे बिना किसी चूक के उसकी नंबर प्लेट रिकॉर्ड कर लेते हैं. इसके बाद पुलिसिया झंझट या बहस की कोई गुंजाइश नहीं बचती, सीधे गाड़ी मालिक के घर भारी-भरकम जुर्माने का चालान पहुंच जाता है. इसके अलावा, कई राज्यों में आम नागरिक और खुद बस ड्राइवर भी नियम तोड़ने वालों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर तुरंत कानूनी एक्शन लिया जाता है.

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