Trending Stories: पढ़ाई खत्म कर नौकरी की तलाश और फिर करियर की शुरुआत... यह वो दौर होता है जब हर युवा अपनी आंखों में कामयाबी के बड़े सपने सजाता है. लेकिन जब हकीकत से सामना होता है, तो कई बार ये सपने टूटते हुए से लगते हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर 23 साल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का ऐसा ही दर्द छलका है, जो आज के मुश्किल जॉब मार्केट में संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं की कहानी बन चुका है.
'क्या मैं अपनी जिंदगी में फेल हो गया हूं?'
रेडिट के 'r/IndianWorkspace' फोरम पर ध्रुव (यूजरनेम dhruvermafz) ने अपनी आपबीती साझा करते हुए एक बेहद चुभने वाला सवाल पूछा, 'क्या मैं अपनी जिंदगी में फेल हो गया हूं?' टियर-3 कॉलेज से पढ़े इस युवा के लिए करियर की राह कभी आसान नहीं रही. जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) में नाकामी के बाद उसने प्रोग्रामिंग को अपना जुनून बनाया. लेकिन कॉलेज के अंतिम साल में प्लेसमेंट के नाम पर बमुश्किल 5-6 कंपनियां आईं और कुछ ही छात्रों को लेकर चली गईं. काफी जद्दोजहद के बाद ध्रुव को एक स्टार्टअप में इंटर्नशिप मिली. वह दौर उसके लिए किसी 'हनीमून पीरियड' से कम नहीं था. 10-12 डेवलपर्स की टीम में बिना किसी एचआर या मैनेजर की दखलंदाजी के वह अपना काम एन्जॉय कर रहा था. लेकिन तभी स्टार्टअप की दुनिया में 'फंडिंग' का अकाल पड़ गया. पैसा अटका और कंपनी ने अपना आधा स्टाफ निकाल दिया. इंटर्न्स होने के नाते सबसे पहली गाज ध्रुव और उसके साथियों पर ही गिरी.
Am I a failure?
by u/dhruvermafz in IndianWorkplace
बड़ी-बड़ी कंपनियों से मिला सिर्फ रिजेक्शन
दो महीने की दर-बदर तलाश के बाद, ध्रुव को एक 'SaaS' प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी में नौकरी तो मिल गई, लेकिन सैलरी तय हुई महज 24,000 रुपये महीना. दफ्तर का माहौल भी उसके लिए चुनौतीपूर्ण है. टीम के दो साथी रुखा व्यवहार करते हैं. टीम लीड का बर्ताव अच्छा है, लेकिन वो खुद घर से काम करता है. जब ध्रुव ने रिमोट वर्क की गुजारिश की, तो मैनेजमेंट ने साफ इनकार कर दिया. ऐसा नहीं है कि ध्रुव ने हालात बदलने की कोशिश नहीं की. डेढ़ साल के अनुभव के साथ उसने एमेजॉन (Amazon), मीशो (Meesho), मैकिन्से (McKinsey) और एक्सेंचर (Accenture) जैसी दिग्गज कंपनियों में इंटरव्यू दिए. लेकिन हर जगह 4 से 5 राउंड के कठिन इंटरव्यू के बाद हाथ लगी तो सिर्फ निराशा. खराब जॉब मार्केट ने उसकी उम्मीदों को और तगड़ा झटका दिया है.
'पापा से पैसे मांगते हुए शर्म आती है...'
इस पूरी कहानी का सबसे भावुक हिस्सा वह है, जब ध्रुव अपनी आर्थिक बेबसी का जिक्र करता है. नौकरी करने के बावजूद, उसकी सैलरी इतनी नहीं है कि वह पूरा महीना गुजार सके. वह लिखता है, 'मुझे आज भी हर महीने अपने पापा से 5000 रुपये मांगने पड़ते हैं. ऐसा नहीं है कि वो मना कर देंगे. वो मेरी जरूरत समझते हैं और बिना कुछ कहे पैसे दे देते हैं. लेकिन जिंदगी के इस पड़ाव पर, जब मैं खुद कमा रहा हूं, तो उनसे एक्स्ट्रा पैसे मांगना मुझे शर्मिंदगी से भर देता है.'
'तुम अकेले नहीं हो दोस्त'- इंटरनेट ने बढ़ाया हौसला
सोशल मीडिया पर ध्रुव की इस पोस्ट ने लोगों के अंदर की इंसानियत को जगा दिया. पोस्ट वायरल हुई और प्रोफेशनल्स ने इस युवा को ढांढस बंधाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
एक यूजर ने लिखा, 'यह बहुत आम बात है, तनाव मत लो. हम में से ज्यादातर लोग इस स्थिति से गुजरे हैं. आज से 3 साल बाद जब तुम पीछे मुड़कर देखोगे, तो सब कुछ सही लगेगा और तुम खुद को लूजर नहीं मानोगे. बस अपनी स्किल्स निखारते रहो. रही बात पिता से पैसे मांगने की, तो इसमें कोई शर्म नहीं है. कल जब वो नहीं कमाएंगे, तब तुम ही उनका सहारा बनोगे.'
एक अन्य यूजर ने मौजूदा जॉब मार्केट की कड़वी हकीकत बयां करते हुए कहा, 'इस खराब मार्केट में तुम्हारे पास एक नौकरी है, फिलहाल यही अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.'
एक तीसरे यूजर ने हौसला देते हुए लिखा, 'तनाव मत लो और सबसे जरूरी बात- हार मत मानो. यह हम सबके लिए मुश्किल वक्त है. मुझे यकीन है कि तुम्हें एक शानदार नौकरी मिलेगी, बस खुद पर भरोसा रखो.'
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(Disclaimer: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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