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भारतीय कोच की चीते जैसी नजर, नाइजीरियाई चैंपियन की 'चोरी' पकड़ी, भारत की झोली में डाला मेडल

कॉमनवेल्थ खेलों में सोमवार रात भारत की शिल्पा धनकड़ का कांस्य पदक जीतना तमाम खिलाड़ियों और भारतीयों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. और वजह एथलेटिक दल के कोच केआर सत्यनारायण

भारतीय कोच की चीते जैसी नजर, नाइजीरियाई चैंपियन की 'चोरी' पकड़ी,  भारत की झोली में डाला मेडल
कांस्य पदक जीतने वाली शिल्पा के शायला और पैरालंपिक दल के हेड और कोच सत्यनारायण शिमोगा
Source: scocial media

ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ खेलों में सोमवार को भारतीय पैरा एथलीट शिल्पा के. शायलाका कांस्य पदक जीतना चर्चा का विषय बना हुआ है. नाईजीरियाई दल इसे 'बेईमानी' और  विवाद बता रहा है, लेकिन भारतीय खेलप्रेमी इसे भारतीय कोच केआर सत्यनारायण के लिए खड़े  होकर ताली बजा रहे हैं, जिन्होंने हारी हुई शिल्पा धनकड़ को पदक दिया दिला. कैसे भारतीय दल के अनुभवी कोच ने शिल्पा धनकड़ की हारी हुई बाजी को जीत में तब्दील किया, तो नाइजीरिया देखता का देखता रह गया, लेकिन कोच की चीते की नजर ने भारत और शिल्पा के लिए पदक  सुनिश्चित कर दिया. चलिए इस पूरे घटनाक्रम को समझिए.

वीमेंस शॉटपुट F57 कैटेगिरी 

भारतीय समयानुसार पैरा खेलों की वीमेंस शॉटपुट इवेंट सोमवार को भारतीय समयानुसार करीब 9 बजे आयोजित हुई. इसमें 7 देशों के 10 एथलीट ने हिस्सा लिया. और इसका स्वर्ण पदक भारत की शर्मिला ढाका, रजत पदक घाना की जिनाबू ईसा और कांस्य पदक नाइजीरिया की यूचारिया इयाजी ने जीता था. लेकिन विजेताओं को गले में पदक पहनाने से पहले ही भारतीय कोच केआर सत्यनारायण ने वो खेला कर दिया, जिसकी किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी. 

F57 कैटेगिरी (तकनीकी एवं शारीरिक विवरण)

भारतीय पैरालंपिक दल के हेड और कोच केआर सत्यनारायण शिमोगा के खेला करने से पहले आप इस कैटेगिरी के कुछ अहम नियमों के बारे में जान लें:-

अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के वर्गीकरण मानकों के अनुसार F57 श्रेणी पैरा-एथलेटिक्स में थ्रोइंग इवेंट्स (जैसे गोला फेंक, भाला फेंक, डिस्क थ्रो) के लिए निर्धारित सबसे ऊपरी 'सीटेड' (बैठकर खेलने वाली) कैटेगरी है.  

शारीरिक स्थिति: यह कैटेगरी उन पैरा-एथलीटों के लिए है जिनके एक या दोनों निचले अंगों में गंभीर कमी होती है. इसमें पैरों में पोलियो/पैरालिसिस, रीढ़ की हड्डी की चोट, या घुटने/जांघ के ऊपर से पैर कटा होना शामिल हैं.

मुख्य नियम और फाउल:

थ्रो की शुरुआत से लेकर गोला के हाथ से छूटने और एथलीट के रुकने तक, एथलीट के कूल्हे का सीट/फ्रेम से संपर्क बना रहना अनिवार्य है. और  थ्रो करते समय शरीर के निचले हिस्से का उपयोग करके ऊपर उठना या "जंप" जैसी गति देना फाउल माना जाता है. पूरी ताकत केवल धड़ और ऊपरी बाहों के बल पर लगानी होती है. बस अनुभवी भारतीय कोच की नजर केआर सत्यनारायण शिमोगा ने इन्हीं नियमों में वह बात पकड़ ली, जो खेल के दौरान कमेंटेटर तक नहीं पकड़ सके. और यहीं से कोच ने खेला कर दिया.

भारतीय कोच का त्वरित एक्शन (प्रोटेस्ट)

भारतीय पैरा-एथलेटिक्स दल के मुख्य कोच के. आर. सत्यनारायण थ्रोइंग एरिया के पास से हर एथलीट की तकनीक पर बारीक नजर रखे हुए थे. कोच सत्यनारायण ने तुरंत नाइजीरियाई खिलाड़ी के थ्रोइंग एक्शन में इस नियम उल्लंघन को पकड़ा. नाइजीरियाई खिलाड़ी गोला फेंकने के लिए अपने हिप का इस्तेमाल कर रही थीं, जो नियम के पूरी तरह खिलाफ था. इससे उन्हें गोला दूर फेंकने में मदद मिल रही थी. उन्होंने बिना समय गंवाए निर्धारित समय सीमा के भीतर कॉमनवेल्थ गेम्स की तकनीकी समिति  के सामने आधिकारिक प्रोटेस्ट दर्ज कराया. साथ ही उन्होंने इस फाउल के पुख्ता फुटेज/प्रमाण अधिकारियों को सौंपे. 

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तकनीकी समिति की जांच और गरमा-गरम माहौल

भारत द्वारा प्रोटेस्ट दर्ज कराने के बाद खेल स्थल पर तनाव और गरमा-गर्मी का माहौल बन गया. तकनीकी अधिकारियों ने हाई-स्पीड कैमरों और रीप्ले का बारीकी से घटना का विश्लेषण किया. इससे नाइजीरियाई टीम प्रबंधन और समर्थकों ने इस शिकायत का कड़ा विरोध किया, जिसके चलते दोनों टीमों के अधिकारियों के बीच काफी तीखी बहस देखने को भी मिली.

...और पदक भारत की शिल्पा को

गहन जांच और वीडियो रीप्ले देखने के बाद तकनीकी समिति ने माना कि नाइजीरियाई एथलीट यूचारिया इयाजी ने वास्तव में नियमों का उल्लंघन किया था. जांच के बाद नाइजीरियाई एथलीट के विवादित थ्रो को फाउल घोषित करते हुए अमान्य कर दिया गया. नतीजा यह हुआ कि अंकतालिका में फेरबदल हुआ. नाइजीरियाई खिलाड़ी के फाउल होने के कारण भारत की शिल्पा के. शायला का स्थान ऊपर हो गया और कांस्य पदक उनकी झोली में गया. और वजह बनी हेड कोच केआर सत्यनारायण शिमोगा की चीते जैसी नजर, जिसने नाइजीरियाई खिलाड़ी की तमाम चालाकी की हवा निकाल दी. 

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