VIRAL POST: ट्रेन के सफर में लोअर बर्थ को लेकर खींचतान आम बात है, लेकिन एक लड़की ने अपनी सूझबूझ से इस समस्या का अनोखा हल निकाला. राजेंद्र नगर से हावड़ा जा रही इस यात्री की सीट पर एक सहयात्री ने जबरन कब्जा कर लिया था और ऊपर चढ़ने से मना कर रहे थे. लड़की ने बिना बहस किए उन्हें ऐसा ऑफर दिया, जिसे सुनते ही सहयात्री का सारा 'दर्द' गायब हो गया और वे अपनी बर्थ पर लौट गए. यह वाकया सिखाता है कि बिना वजह की मनमानी के आगे झुकने के बजाय लॉजिक के साथ अपनी बातें कैसे कही जाती हैं. 'नींद की रानी' नाम के एक्स (ट्विटर) हैंडल पर एक लड़की ने अपने इसी सफर का एक दिलचस्प और कड़वा अनुभव साझा किया है.
क्या था पूरा मामला?
लड़की राजेंद्र नगर टर्मिनल से हावड़ा जाने वाली ट्रेन के थर्ड एसी (3rd AC) डिब्बे में सफर कर रही थी. रात के करीब 10 बजे जब ट्रेन खुसरूपुर स्टेशन पर रुकी, तो वह महज दो मिनट के लिए नीचे उतरी. अपना बैग उसने सीट पर ही छोड़ दिया था. लेकिन जब वह वापस लौटी, तो नजारा बदला हुआ था.वहां करीब 40 साल के एक 'अंकल' उसकी सीट पर कब्जा जमाए बैठे थे और लड़की का बैग उठाकर ऊपर की साइड अपर बर्थ पर रख दिया गया था.
अंकल ने बनाया वही पुराना बहाना
लड़की ने शालीनता से पूछा, "अंकल, यह मेरी सीट है. आप यहां क्यों बैठे हैं?" अंकल ने बड़े हक से कहा, "बेटा, मेरी ऊपर की सीट है. तुम वहां चली जाओ." लड़की ने मना किया और अपनी सीट पर जाने को कहा, तो अंकल मजबूरी का बहाना बनाकर बोले, "बेटा, मुझे यहीं बैठने दो. मैं ऊपर नहीं चढ़ सकता." लड़की ने भी साफ कह दिया कि लड़की होने के नाते उसे भी ऊपर चढ़ने में दिक्कत होगी. आखिर उसने ₹925 खर्च करके आरामदेह सफर के लिए यह सीट बुक की थी, तो वह इसे बिना वजह क्यों छोड़े?
“Please let me sit here. I cannot climb to the upper berth.” I said, “Uncle, I am a girl. I will have difficulty climbing up. Please go to your own seat.” But the uncle remained stubborn and was not ready to leave my seat. I also clearly refused because I had paid ₹925 for a comfortable journey so that I could relax and sleep on my own seat. When the uncle was not willing to agree under any circumstances, I suggested a solution. I said, “Uncle, if you really want my seat, then do one thing. Give me ₹500 from my fare and take my seat.” The uncle looked at me angrily and said, “What, daughter? Will you give up your seat in exchange for money?” I said, “Yes, Uncle. When I have paid for the seat of my choice, why should I give it up without any reason?” As soon as he heard this, the uncle got up and went straight to his own seat and went to sleep. 😅 Now, let me explain my point. If the uncle had genuinely had difficulty climbing up, or if his age or physical condition had made it difficult for him to use the upper berth, I would have happily given him my seat. I have no problem helping someone out of humanity. But how fair is it to occupy someone else's seat without any genuine reason and then expect that person to give up their seat? I really like the lower berth. I book it by paying for it so that I can sit and sleep comfortably. That does not mean anyone can come and occupy my seat and force me to give it up. Don't I have the right to sit on the seat I booked? 🤔
— Neend Ki Rani 😴 (@Neend_Ki_Rani) October 16, 2026
सीट के बदले लड़की ने मांग लिए पैसे
जब अंकल टस से मस होने को तैयार नहीं हुए, तो लड़की ने एक अनोखा 'बिजनेस फॉर्मूला' आजमाया. उसने कहा, "अंकल, अगर आपको वाकई मेरी सीट चाहिए, तो एक काम कीजिए. मेरे टिकट के किराए में से मुझे ₹500 दे दीजिए और यह सीट रख लीजिए." यह सुनते ही अंकल का पारा चढ़ गया. वे गुस्से में बोले, "ये क्या बात हुई बेटा? तुम पैसों के लिए अपनी सीट छोड़ दोगी?"
अंकल का सारा दर्द गायब
लड़की ने बेबाकी से जवाब दिया, "हां अंकल. जब मैंने अपनी पसंद की सीट के लिए पैसे दिए हैं, तो मैं इसे बिना किसी वजह के मुफ्त में क्यों छोड़ूं?" बस, यह सुनते ही अंकल का सारा 'दर्द' गायब हो गया. वे तुरंत उठे और बिना एक शब्द बोले चुपचाप अपनी ऊपर वाली बर्थ पर जाकर सो गए.
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लड़की का साफ कहना है कि अगर अंकल को सचमुच कोई शारीरिक समस्या होती या वे बहुत बुजुर्ग होते, तो वह इंसानियत के नाते खुशी-खुशी अपनी सीट दे देती. लेकिन बिना किसी ठोस वजह के किसी की सीट पर कब्जा करना और फिर उसी से उम्मीद करना कि वह अपनी सहूलियत छोड़ दे, यह कहां का न्याय है? अपने हक के लिए आवाज उठाना बेहद जरूरी है, वरना लोग आपकी शराफत का नाजायज फायदा उठाने में देर नहीं करते.
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