मंदी और छंटनी के इस दौर में 101 साल पुरानी अमेरिकी कंपनी 'टोरानी' ने एक मिसाल कायम की है. इस कंपनी ने अपने पूरे इतिहास में कभी किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला. जब माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां खर्च घटाने के लिए कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं, तब टोरानी की सीईओ मेलानी डुलबेको का मानना है कि छंटनी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक चुनाव है. कोरोना संकट और भारी कर्ज के बावजूद कंपनी ने विज्ञापन और यात्रा खर्च काटकर नौकरियां बचाईं. आज यह कंपनी तकनीक का इस्तेमाल इंसानों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी ताकत बढ़ाने के लिए कर रही है.
ये कंपनी क्यों कर्मचारियों को नहीं निकालती?
टोरानी की सीईओ मेलानी डुलबेको का मानना है कि आर्थिक मंदी या वित्तीय दबाव से निपटने के लिए कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एकमात्र रास्ता नहीं है. जब आप संकट के समय अपने हुनरमंद कर्मचारियों को संभालकर रखते हैं, तो मंदी से उबरने में वही आपकी सबसे बड़ी ताकत बनते हैं. यह सीख ऐसे समय में बेहद जरूरी हो जाती है जब माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज तकनीक कंपनी अपने चुनिंदा विभागों से लोगों को खुद नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही है. माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और कनाडा में कुछ खास स्तर के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत कर्मचारियों को दिसंबर की शुरुआत तक अपना फैसला लेना है.
मुश्किल दौर में कैसे बचीं नौकरियां?
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान टोरानी कंपनी के सामने सबसे बड़ा संकट आया था. लॉकडाउन के कारण कैफे और रेस्टोरेंट बंद थे, जिससे उनके सिरप की मांग अचानक घट गई. इसके साथ ही कंपनी पर नई फैक्ट्री बनाने का कर्ज भी था. ऐसी गंभीर स्थिति में भी टोरानी ने कर्मचारियों को निकालने या उनकी सैलरी काटने का आसान रास्ता नहीं चुना. इसके बजाय कंपनी ने मार्केटिंग और विज्ञापनों के खर्चों में भारी कटौती की. गैर-जरूरी बिजनेस ट्रैवल पर पूरी तरह रोक लगा दी. हर विभाग को अपना फालतू खर्च बचाने का जिम्मा सौंपा. कैफे बंद होने पर कंपनी ने सीधे ग्राहकों तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन और ग्रोसरी बिजनेस पर ध्यान केंद्रित किया. नतीजा यह हुआ कि अप्रैल 2020 में 20% गिरने के बाद मई में ही कंपनी की बिक्री पटरी पर लौट आई और पूरे साल की कमाई में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
कर्मचारी पहले, मुनाफा बाद में
मेलानी डुलबेको का कहना है कि छंटनी करना किसी भी कंपनी की मजबूरी नहीं, बल्कि उसका एक फैसला होता है. जब टोरानी ने 2020 में अपनी फैक्ट्री को दूसरी जगह शिफ्ट किया, तब उन्होंने सबसे पहले अपने कर्मचारियों के घरों के पिन कोड का नक्शा बनाया ताकि नई जगह ऐसी हो जहां किसी को आने-जाने में दिक्कत न हो.
आज टोरानी मार्केट रिसर्च और सेल्स के काम के लिए AI का बखूबी इस्तेमाल कर रही है. सीईओ मेलानी के मुताबिक, तकनीक का काम काम को आसान बनाना और उत्पादकता बढ़ाना है, न कि कर्मचारियों के करियर और उनकी नौकरियों को छीनना. यही वजह है कि पिछले 35 सालों से कंपनी लगातार करीब 20% की सालाना ग्रोथ दर्ज कर रही है और साल 2026 में इसका रेवेन्यू 800 मिलियन डॉलर के पार जाने की उम्मीद है.
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