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लद्दाख के मंदिर में 1 लाख प्लास्टिक की बोतलों का ढेर, लोग बोले- ये Delhi NCR वालों की हाजिरी है

Ladakh Bottle Temple: लद्दाख के गाटा लूप्स में 19वे मोड़ पर स्थित एक छोटे से मंदिर के बाहर प्लास्टिक की बोतलों का ढेर लगा हुआ है. बाइक राइडर मनीष के मुताबिक, इनकी संख्या 1 लाख से ज्यादा हो सकती है.

लद्दाख के मंदिर में 1 लाख प्लास्टिक की बोतलों का ढेर, लोग बोले- ये Delhi NCR वालों की हाजिरी है
मनीष ने कहा शख्स की यहां मौत हुई थी, उसे पानी की जरूरत थी, प्लास्टिक की बोतलों की नहीं.
Instagram@mkkrides

Viral Video: लद्दाख की वादियों में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां प्रसाद के तौर पर पानी की बोतलें चढ़ाई जाती हैं. लेकिन अब आस्था की यह जगह अनजाने में प्लास्टिक के कचरे का ढेर बनती जा रही है. मोटो व्लॉगर मनीष ने अपनी लद्दाख यात्रा के दौरान इस पर गहरी चिंता जताते हुए एक वीडियो बनाया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 

'उसे पानी चाहिए था, बोतल नहीं'

मनीष का कहना है कि जिसकी याद में यह मंदिर बना है, उसे पानी की जरूरत थी, प्लास्टिक की बोतलों की नहीं. इसीलिए अगर आप यहां से गुजरें, तो पानी जरूर चढ़ाएं, लेकिन खाली प्लास्टिक की बोतल अपने साथ ले जाएं.

'लोकल ड्राइवर का दिया उदाहरण'

मनीष ने बताया कि उन्होंने वहां एक लोकल ट्रक ड्राइवर को देखा, जिसने बड़ी समझदारी से मंदिर में केवल पानी अर्पित किया और अपनी खाली बोतल वापस गाड़ी में रखकर चला गया. मनीष की अपील है कि आस्था के नाम पर पहाड़ों में प्लास्टिक न छोड़ें और इसी लोकल ड्राइवर की तरह समझदारी दिखाएं.

यहां पानी चढ़ाने की पीछे क्या कहानी?

बताया जाता है कि साल 1999 के आसपास लद्दाख की इन वीरान पहाड़ियों के बीच एक ट्रक ड्राइवर की प्यास के कारण दर्दनाक मौत हो गई थी. इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसकी याद में यहां एक छोटा सा मंदिर बना दिया. तब से यह परंपरा बन गई कि जो भी यहां से गुजरता है, वह उस दिवंगत आत्मा की शांति के लिए पानी चढ़ाता है, ताकि किसी और को प्यास से ऐसी नियति न भुगतनी पड़े.

यहां देखें पूरा वीडियो:-

'ये दिल्ली एनसीआर वालें की निशानी'

इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को देखने के बाद अलग-अलग राय दे रहे हैं. 

एक यूजर ने लिखा, 'इस से अच्छा उसे दो जिसे जरूरत हो. तो शायद उस तक भी पहुंच जाए. या आपके मन को संतुष्टि और तसल्ली मिल जाए.'

दूसरे यूजर ने लिखा, 'हमारा देश सिर्फ इस मामले में तरक्की कर रहा है.'

तीसरे यूजर ने लिखा, 'उन्हें बोतलें छोड़ने के बजाय पीने के पानी के लिए एक टैंक बना देना चाहिए. इससे आत्मा को अधिक संतुष्टि मिलेगी.'

चौथे यूजर ने लिखा, 'आस्था के हवन में प्रकृति की आहुति नहीं दी जाती, लेकिन ये समझने के लिए थोड़ा सा सेंस चाहिए.'

पांचवे यूजर ने लिखा, 'बोतल इसलिए डाली जा रही है ताकि कोई और इंसान प्यास से न मर जाए.'

छठे यूजर ने लिखा, 'ये बोतल नहीं है Delhi NCR वालो की हाजिरी है.'

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