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काम-काज छोड़ पांव पसार कर..यहां लोग मार रहे हैं खर्राटे, 'कुंभकरणों' की इस क्लास में विजेता को मिला खास सम्मान

सोचिए, आपको सोने के पैसे मिलें या फिर गहरी नींद के लिए कोई मेडल पहना दे...सुनने में सपना लगता है न? पर सियोल में यह हकीकत बन चुका है. भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस के टारगेट से दूर, लोग पार्क में चटाई बिछाकर बस 'घोड़े बेचकर' सोने पहुंचे. जानिए इस अनोखी जंग में कौन बना 'कुंभकरण'.

काम-काज छोड़ पांव पसार कर..यहां लोग मार रहे हैं खर्राटे, 'कुंभकरणों' की इस क्लास में विजेता को मिला खास सम्मान
क्या आप भी हैं नींद के शौकीन? यहां सोने के लिए मिल रहा है इनाम, सियोल का टपावर नैप कॉन्टेस्ट' हुआ वायरल
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Sleep Competition South Korea: दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के 'हान रिवर पार्क' में नजारा कुछ जुदा ही था. जहां दुनिया रफ्तार के पीछे भाग रही है, वहां सैकड़ों लोग सिर्फ इसलिए इकट्ठा हुए, ताकि वो जी भरकर एक झपकी ले सकें. 'पावर नैप कॉन्टेस्ट' नाम की इस प्रतियोगिता का यह तीसरा साल था. आयोजकों ने साफ कह दिया था, 'भाई, थके-हारे आओ, पेट भरकर खाकर आओ और हां, कपड़े ऐसे पहनना कि नींद भी शर्मा जाए.' कोई राजा की तरह ठाट से लेटा था, तो कोई कोआला बनकर झपकियां ले रहा था.

नींद की ऐसी तलब, बन गई वर्ल्ड न्यूज (Desperate for Sleep: A Viral Global Trend)

साउथ कोरिया में काम का बोझ इतना है कि, वहां के नौजवानों के लिए 3-4 घंटे की नींद भी लग्जरी बन गई है. पढ़ाई का प्रेशर और पार्ट-टाइम जॉब्स ने लोगों की आंखों से चैन छीन लिया है. ऐसे में यह इवेंट सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सुकून का जरिया बन गया. 24 साल की यू मी-योन जैसी कई लड़कियों का कहना था कि, 'घर पर तो करवटें बदलते बीत जाती है रात, शायद यहां की ठंडी हवा और भीड़ के बीच सुकुन की दो घड़ियां मिल जाएं.'

हार्ट रेट बताएगा कौन है असली 'स्लीप चैंपियन' (Seoul Power Nap Contest)

कंपटीशन शुरू होते ही सबने आंखों पर मास्क चढ़ाया और सपनों की दुनिया में निकल पड़े. अब आप सोच रहे होंगे कि, विजेता का फैसला कैसे हुआ? तो जनाब, यहां आयोजक स्मार्ट थे. उन्होंने बाकायदा सबकी हार्ट रेट (Heart Rate) चेक की, जिसकी धड़कनें सबसे शांत और नींद सबसे गहरी पाई गई, वही सिकंदर कहलाया. इस बार बाजी किसी नौजवान ने नहीं, बल्कि एक 80 साल के बुजुर्ग ने मारी, जिन्होंने साबित कर दिया कि असली 'चैन' अनुभव के साथ ही आता है.

काम के बीच आराम का पैगाम (unique contest korea)

यह अनोखी प्रतियोगिता हमें एक कड़वा सच भी सिखाती है. जिंदगी की इस चूहा-दौड़ में हम अक्सर अपनी सेहत और रूह को सुकुन देना भूल जाते हैं. सियोल की यह 'स्लीप जंग' पूरी दुनिया को याद दिला रही है कि, बॉस...काम तो पूरी जिंदगी चलेगा, पर अगर शरीर ही साथ न दे तो सब बेकार है. खुद को रिचार्ज करने के लिए एक छोटी सी झपकी भी किसी दवा से कम नहीं होती.

सियोल का यह इवेंट अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. यह महज एक खेल नहीं, बल्कि आधुनिक समाज की थकान का आईना है. वाकई, कभी-कभी कुछ न करना और बस चैन से सो जाना ही सबसे बड़ी जीत होती है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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