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बिहार: कोर्ट की लिफ्ट में डेढ़ घंटे तक 11 वकीलों की अटकी रही सांस, लिफ्ट को तोड़कर निकाले गए लोग

बिहार के मधेपुरा न्यायालय में लिफ्ट के अंदर उस समय 11 वकीलों की सांस अटक गई, जब क्षमता से अधिक भार होने के कारण बीच रास्ते में लिफ्ट फंस गई और करीब डेढ़ घंटे तक वकील उसी में फंसे रहे.

बिहार: कोर्ट की लिफ्ट में डेढ़ घंटे तक 11 वकीलों की अटकी रही सांस, लिफ्ट को तोड़कर निकाले गए लोग
लिफ्ट में डेढ़ घंटे तक 11 वकीलों की अटकी रही सांस

बिहार के मधेपुरा व्यवहार न्यायालय से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. न्याय की पैरवी करने वाले 11 वकील अचानक कोर्ट की लिफ्ट में फंस गए और करीब डेढ़ घंटे तक बाहर निकलने का इंतजार करते रहे. लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के बीच अटक गई. हालात ऐसे बने कि आखिरकार लिफ्ट को तोड़कर लोगों को बाहर निकालना पड़ा. दरअसल, मधेपुरा व्यवहार न्यायालय के नवनिर्मित भवन में रोज की तरह कामकाज चल रहा था.

क्षमता से अधिक भार होने से फंसी लिफ्ट

इसी दौरान 11 वकील एक साथ लिफ्ट में सवार होकर ऊपर जाने लगे, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद लिफ्ट ने जवाब दे दिया. क्षमता से अधिक भार पड़ने के कारण लिफ्ट बीच मंजिल में ही अटक गई और उसके अंदर मौजूद सभी लोग फंस गए. लिफ्ट के भीतर मौजूद लोगों ने बाहर संपर्क करने की कोशिश की. सूचना मिलते ही न्यायालय परिसर में अफरातफरी मच गई. न्यायिक पदाधिकारी, कोर्ट कर्मी और तकनीकी टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तत्काल तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने से राहत कार्य में देरी हुई.

इस दौरान लिफ्ट के अंदर फंसे लोगों की बेचैनी लगातार बढ़ती रही. करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद तकनीकी कर्मियों ने लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सभी वकीलों को सुरक्षित बाहर निकाला, राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ. बाहर निकलते ही वकीलों ने राहत की सांस ली, लेकिन व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जाहिर की. 

वकील बोले- क्षमता 6 की, सवार ज्यादा

इस संबंध में वकीलों का कहना है कि लिफ्ट की क्षमता केवल छह लोगों की है, लेकिन अक्सर इससे अधिक लोग उसमें सवार हो जाते हैं. सुरक्षा व्यवस्था की कमी और निगरानी के अभाव में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं. हैरानी की बात यह है कि न्यायालय परिसर में लिफ्ट में लोगों के फंसने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं. बावजूद इसके न तो सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की गई और न ही क्षमता के अनुसार लोगों के प्रवेश को सुनिश्चित किया गया. 

फिलहाल सभी वकील सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने न्यायालय भवन की तकनीकी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट प्रशासन इस घटना से सबक लेते हुए लिफ्ट संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने. (मधेपुरा से रमण कुमार की रिपोर्ट)

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