VIRAL VIDEO: कॉर्पोरेट की सुख-सुविधाएं छोड़ दुनिया नापने निकली पोलैंड की मालविना के लिए भारत यात्रा जीवन को बदलने वाला अनुभव साबित हो रही है. 3 लाख रुपए प्रति माह की आईटी कंसल्टेंट की नौकरी बिना किसी बैकअप प्लान के छोड़ने वाली मालविना ऋषिकेश में योग सीखने के बाद हिमालय के सुदूर गांवों में पहुंचीं. यहां भाषा की बाधा के बावजूद, एक मिट्टी के घर में रहने वाली दो स्थानीय महिलाओं, ममता और मुन्नी के आतिथ्य और नींबू की चाय ने उनके साथ एक अटूट मानवीय रिश्ता बना दिया. यह मुलाकात दर्शाती है कि बिना भाषा समझे भी केवल खुला दिल और सहज आत्मीयता एक गहरा संबंध बनाने के लिए पर्याप्त होती है.
ऋषिकेश में 3 हफ्ते का किया योगा क्लास
मालविना भारत के अलग-अलग हिस्सों में गई. विदेशी लड़की मालविना ने ऋषिकेश में तीन हफ्तों तक योगा क्लास भी किया. उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर घूमने को लेकर उसने इंस्टाग्राम पर पोस्ट की है. मालविना ने बताया कि उसने 10 साल तक IT कंसल्टेंट के तौर पर कॉर्पोरेट में काम किया. मालविना को उस समय 3 लाख रुपये (€ 3000) महीना मिलता था. पर उसने घूमने के लिए बिना किसी बैकअप प्लान नौकरी छोड़ दी और खुद को यूनिवर्स के हवाले कर दिया.
मालविना बोली- मैं यहीं रुकना चाहूंगी
मालविना यूट्यूब पर डाले गए वीडियो में मालविना कहती हैं कि हम एक दूसरे की भाषा नहीं समझ पा रहे थे. फिर उनके कुछ शब्दों ने गहरा रिश्ता बना दिया. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उन्होंने मुझे बैठने, चाय पीने और उनके साथ खाना खाने के लिए कहा. घर में बैठने के लिए लकड़ी का पीढ़ा, नींबू की चाय और घर की 2 महिलाओं की प्यार उन्हें काफी पसंद आया. विदेशी लड़कियां हिमालय के पहाड़ों पर बने महिला के मिट्टी से बने घर को देखकर अचरज में पड़ गई. मालविना ने कहा कि सच कहूं तो मैं यहीं रुकना चाहूंगी. मुझे यह बहुत पसंद आया.
पहली बार हिमालय के पहाड़ों में बने घर पहुंची मालविना
मुझे लगता है कि दुनिया का आखिरी छोर कुछ ऐसा ही दिखता होगा. इस तरह वह अपनी जिंदगी में पहली बार हिमालय की तलहटी में बने मिट्टी के एक घर में पहुंचीं. मालविना ने महिलाओं से बातचीत में बताया कि उनके घर में उनके पिता हैं, जो पोलैंड में रहते हैं. उनके साथ उनका 7 साल बड़ा भाई है, जो पोलैंड में रहता है, जबकि उनकी मां की मौत हो चुकी है.
पोलैंड की लड़की मालविना ने वीडियो के आखिरी में कहा कि मुझे सच में ऐसा लगा जैसे मैं परिवार का हिस्सा बन गया हूं और ममता और मुन्नी ने बहुत ही दयालुता और उदारता के साथ स्वागत किया. मैं तो यहीं रुकना चाहूंगी. यह आश्चर्यजनक है और इस तरह के क्षण वास्तव में मुझे याद दिलाते हैं कि मुझे यात्रा करना इतना पसंद क्यों है.
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