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हिमालय में ट्रैकिंग से पहले जान लें नए नियम, उत्तराखंड सरकार ला रही सख्त माउंटेनियरिंग पॉलिसी

अगर आप भी ट्रैकिंग के शौकीन हैं और उत्तराखंड जाने का प्लान कर रहे हैं तो आपको पहले वहां पर बने नए नियमों के बारे में जान लीजिए.

हिमालय में ट्रैकिंग से पहले जान लें नए नियम, उत्तराखंड सरकार ला रही सख्त माउंटेनियरिंग पॉलिसी
पॉलिसी में माउंटेनरिंग और ट्रैकिंग के लिए एक सशक्त पॉलिसी बनाई जा रही है.

देश-विदेश से बड़ी संख्या में एडवेंचर टूरिज्म के लिए पर्यटक हर साल उत्तराखंड में पहुंचते हैं. राज्य में कई ऐसी ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं हैं जिसमें ट्रैकिंग करना लोग पसंद करते हैं. यही वजह है कि साल 2026 में भी उत्तराखंड में पर्वतारोहियों और एडवेंचर एक्सपीडिशन के लिए हिमालय की 83 प्रमुख चोटियों को खोला गया है. इसके साथ ही उत्तराखंड सरकार माउंटेनरिंग एंड ट्रैकिंग करने वाले के लिए एक पॉलिसी भी लाने जा रही है.

पर्वतारोहण के लिए चिन्हित की गई 83 चोटियां

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उत्तराखंड में दुनिया की कई ऐसी प्रमुख चोटियां हैं, जिनके बारे में जानने के लिए देश-विदेश से हर साल हजारों पर्वतारोही और साहसिक पर्यटन करने के लिए लोग आते हैं. उत्तराखंड देश के और दुनिया के उन जगहों में प्रसिद्ध है जहां पर कई ऐसी ऊंची हिमालय की चोटियां हैं. जिन पर लोग ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के लिए आते हैं. साल 2026 के लिए उत्तराखंड सरकार ने हिमालय की 83 प्रमुख चोटियां भी चिन्हित की है, जिसमें पर्वतारोही पर्वतारोहण कर सकते हैं. लेकिन उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में कई ऐसे बड़े हादसे हुए हैं, जिसने राज्य में सुरक्षित माउंटेनरिंग और ट्रैकिंग की एक व्यवस्था बनाई जाने की बात की गई है. जिससे उत्तराखंड में पर्वतारोही ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंच सके.

क्या है पॉलिसी 

पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड के उच्च हिमालय क्षेत्र में हुई कई घटनाओं की वजह से राज्य सरकार एक बड़ी पॉलिसी बनाने जा रही है. इस पॉलिसी में माउंटेनरिंग और ट्रैकिंग के लिए एक सशक्त पॉलिसी बनाई जा रही है. उच्च हिमालय क्षेत्र में ज्यादातर जब पर्वतारोही ट्रैकिंग करने जाते हैं तो ऐसे में ऊपरी क्षेत्र में एवलंत आने से ज्यादातर घटनाएं होती है. 

उत्तराखंड में पिछले एक दशक में 100 से ज्यादा लोगों की मौत एव लॉन्च आने के कारण हुई है. इसमें ज्यादातर मोटे पर्वतारोहण के वक्त हुई है. उत्तरकाशी का द्रोपदी का डंडा हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी, इसके अलावा कई ऐसी खतरनाक चोटिया हैं, जिसमें अक्सर दुर्घटना होने की संभावना है ज्यादा होती है. इन्हीं सब दुर्घटनाओं को देखते हुए अब उत्तराखंड पर्यटन विभाग और उत्तराखंड वन विभाग मिलकर माउंटेन रनिंग और ट्रैकिंग पॉलिसी ले कर आ रहे हैं.

जिसको लेकर दो बैठके हो चुकी है , इन बैठकों में स्थानीय लोगों की भागीदारी, स्टेकहोल्डर्स, जैसे ट्रैकिंग एसोसिएशन, टूर ऑपरेटर्स, गाइड्स , इसके अलावा अन्य लोगों से किया जा रहा है उनकी सलाह ली जा रही है ट्रैकिंग पॉलिसी में जानकारी के मुताबिक मेडिकल फिटनेस चेकअप ,जीपीएस हैंड बैंड ,  उम्र की सीमा यानी कम उम्र वालो को जाने पर रोक, और जो भी पर्वतारोही पर्वतारोहण के ले जाएगा तो उसको अपने साथ एक गार्बेज बैग ले जाना होगा और जो भी कचरा होगा उसे वापस लाना होगा.

रजिस्ट्रेशन कराना है जरूरी

जानकारी के मुताबिक नियमावली में भविष्य में उत्तराखंड में ट्रैकिंग कराने वाली हर एजेंसी, टूर ऑपरेटर, कंपनी और फर्म को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. ये रजिस्ट्रेशन 5 सालों के लिए वैलिड रहेगा. जो एजेंसियां पहले से ट्रैकिंग गतिविधियां चला रही हैं, उन्हें नियम लागू होने के 60 दिनों के भीतर अपना पंजीकरण कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रैकिंग कराना पूरी तरह बैन रहेगा.

नियमावली में हाई और लो एल्टीट्यूड ट्रैकिंग गाइड्स की योग्यता और आयु सीमा भी होगी.  इसमें लो एल्टीट्यूड गाइड के लिए आयु सीमा 18 से 60 वर्ष रखी गई है, जबकि 50 वर्ष से अधिक उम्र वालों को हर साल राजकीय चिकित्सा अधिकारी से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है.  

मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण संस्थान से बेसिक पर्वतारोहण कोर्स भी अनिवार्य किया गया है. साथ ही रजिस्टर्ड एजेंसी से 2 साल का एक्सपीरियंस सर्टिफिकेशन भी जरूरी रहेगा. 

हाई एल्टीट्यूड गाइड के लिए आयु सीमा 20 से 60 साल रखी गई है. इसमें भी 50 वर्ष से ऊपर वालों को हर साल मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी लेना होगा. जबकि मान्यता प्राप्त संस्थान से बेसिक व एडवांस पर्वतारोहण कोर्स अनिवार्य रहेगा, साथ ही 2 साल का अनुभव प्रमाण पत्र भी अनिवार्य किया गया है.

उत्तराखंड वन विभाग के सीसीएफ पीके पात्रो ने बताया कि इस पॉलिसी में स्थानीय लोगों की भागीदारी के अलावा स्टेकहोल्डर और स्थानीय ऑपरेटर को भी शामिल किया जाएगा ताकि इस पॉलिसी से राज्य में स्थानीय लोगों का रोजगार बढ़ सके और साहसिक पर्यटन का उद्योग तेजी से बड़े.

माउंटेनरिंग एंड ट्रैकिंग ऑपरेटर  मंजुल रावत ने बताया कि इस पॉलिसी में सबसे पहले स्थानीय लोगों की भागीदारी सबसे ज्यादा होनी चाहिए जो भी स्थानीय टूर ऑपरेटर्स है उनको पहले लेना चाहिए. मंजुल रावत कहते हैं कि स्थानीय लोगों को उसे भौगोलिक परिस्थितियों का ज्ञान और जानकारी होती है.

 इसके अलावा जितने भी ट्रैकिंग रूट है उनमें यह तय होना चाहिए कि किस ट्रैकिंग रूट के लिए मेडिकल फिटनेस जरूरी है , मंजुल रावत ने कहा कि  सरकार को स्थानीय ऑपरेटर को पॉलिसी में इस तरह लाना होगा ताकि उनकी कैपेसिटी बड़े और वह आर्थिक रूप से सक्षम हो.

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लेखक के बारे में
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किशोर कुमार रावत
Special Correspondent
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