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'जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत हो, उन्हें काम पर मत रखो'; मारवाड़ी एंटरप्रेन्योर ने समझाया इसका लॉजिक

डिजिटल कंटेंट क्रिएटर महिमा जैन ने मारवाड़ी बिजनेसमैन का एक सिक्रेट दुनिया के साथ शेयर किया है, जो लोगों के सही लोगों की हायरिंग में मदद कर सकता है.

'जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत हो, उन्हें काम पर मत रखो'; मारवाड़ी एंटरप्रेन्योर ने समझाया इसका लॉजिक
मारवाड़ी बिजनेस वुमेन ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया जरूरतमंद को नौकरी देने के बाद क्या होता है. (सांकेतिक तस्वीर)
Pexels

Trending Post: 'ऐसे लोगों को नौकरी पर न रखें जिन्हें सच में नौकरी की ज़रूरत है'. मारवाड़ी बिजनेस वुमन महिमा जैन ने शुक्रवार को अपनी सोशल मीडिया में इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा, 'मैंने एक पॉडकास्ट पर दीपिंदर गोयल को यह कहते हुए सुना था और तब मुझे उनकी बात का कोई मतलब समझ नहीं आया था. लेकिन अब, 100 से ज्यादा इंटरव्यू लेने के बाद, मुझे समझ आ गया है कि ऐसा क्यों है.'

'ये टीम प्रोडक्टिविटी के लेवल को नुकसान पहुंचाते हैं'

महिमा ने कहा, 'कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बहुत परेशान होते हैं, क्योंकि उन्हें लंबे समय से नौकरी नहीं मिली होती. लेकिन नौकरी मिलने के बाद, उन्हें लगता है कि उन्हें कुछ ज्यादा करके दिखाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक उन्हें लगता रहा है कि वे किसी काम के नहीं हैं या उनका आत्मविश्वास कम हो गया है. इसलिए, खुद को साबित करने के चक्कर में ये लोग अक्सर बहुत ज्यादा घंटे काम करते हैं. और ज्यादातर मामलों में, वे पूरी टीम की प्रोडक्टिविटी के लेवल को नुकसान पहुंचाते हैं.'

'वर्क लाइफ बैलेंस भूले, बाकी लोगों पर अनकहा दवाब' 

महिमा ने आगे कहा, 'जब वे शनिवार की आधी रात को ईमेल भेजते हैं, तो टीम के दूसरे सदस्य सोचने लगते हैं- क्या मुझे भी ऐसा करना चाहिए? क्या मैनेजमेंट मुझसे यही उम्मीद कर रहा है? भले ही एक फाउंडर के तौर पर आप उन्हें वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन उनके व्यवहार से साथियों का एक अनकहा दबाव बन जाता है.'

'गलत जगह ज्यादा मेहनत करके कंपनी को दोष देते हैं'

महिमा ने बताया, 'आखिरकार, वे बुरी तरह थक जाते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है, और वे अपने खराब वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए फाउंडर या कंपनी को दोषी ठहराते हैं. हां, मुझे पता है कि आपको लगा होगा कि मैं कहूंगी कि नौकरी चाहने वाले लोग इनएफिशिएंट होते हैं, लेकिन मेरे एक्सपीरियंस में, वे अक्सर ऐसी चीजों के लिए भी जरूरत से ज्यादा मेहनत करते हैं जिनकी असल में कोई जरूरत नहीं होती.'

यहां पढ़ें पूरी पोस्ट:-

'काम करो तो दिक्कत, ना करो तो भी दिक्कत'

महिमा की इस पोस्ट को पढ़कर लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह के रिएक्शन्स दे रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा, 'काम करो तो भी दिक्कत, न करो तो भी दिक्कत. उनके पास ठीक-ठीक वही करने के लिए एक हैंडबुक होनी चाहिए जो वे करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें खुद ही पक्का नहीं पता होता.'

दूसरे यूजर ने लिखा, 'जब बड़ी कंपनियां लोगों को नौकरी पर नहीं रखेंगी, तो आखिर में ये लोग Blinkit या Zomato पर डिलीवरी बॉय या डिलीवरी गर्ल बनने का फैसला करेंगे.'

तीसरे यूजर ने लिखा, 'वर्किंग आवर्स के बाद के नियम साफ होने चाहिए, वरना किसी एक व्यक्ति की आदतें सबकी उम्मीद बन सकती हैं.'

चौथे यूजर ने लिखा, 'असल में, बस अमीर लोगों को ही काम पर रखना है, यही कह रही हैं ना आप.'

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