Tech Layoffs: गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल में लाखों डॉलर की सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को जब अचानक नौकरी से निकाल दिया गया तो वे डिप्रेशन में चले गए. उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे उनकी पर्सनल आइडेंटिटी अचानक कहीं खो गई. ये वो वक्त था जब उन्हें फ्यूचर फाइनेंशियल प्लानिंग ना करने का पछतावा हुआ. हालात ऐसे बन गए कि 8000 कंपनियों ने उन्हें जॉब देने से इनकार कर दिया.
स्ट्रांग रिज्यूमे होने के बावजूद उन्हें कैशियर तक की नौकरी नहीं मिली. मजबूरन उन्हें अपने खर्चे कम करने के लिए सुख-सुविधाओं को छोड़कर नई जगह रीलोकेट होना पड़ा. ये वो लोग थे जिन्हें लगता था कि बड़ी कंपनियों में उनकी नौकरी सेफ है, लेकिन समय ने उन्हें बता दिया कि कंपनियों के लिए वो एक नंबर के सिवा कुछ नहीं थे. बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी कहानी बताते हुए लाइफ लेसन्स बताए हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी को काफी मदद मिलेगी.
कौन हैं ये लोग?
- 37 साल की ब्रिटनी बॉल बताती हैं, 'मैंने मेटा में लगभग 5 साल तक डॉक्यूमेंटेशन इंजीनियर का काम किया. वहां मैं $180K (करीब 1.8 करोड़ रुपये) सालाना कमाती थीं. मैंने डीसी पब्लिक लाइब्रेरी और यूट्यूब से खुद कोडिंग सीखी थी. जब मुझे मेटा से ऑफर लेटर मिला, तो मुझे लगा था कि मैंने सच में कुछ बड़ा कर लिया. लेकिन एक दिन जब मैं बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रही थी, तभी वर्क फोन पर ईमेल आया कि अब मेरी नौकरी नहीं है. मैं सुन्न पड़ गई थी. मुझे कंपनी से सामान समेटने के लिए सिर्फ 1 घंटा मिला था.'
- 25 साल के जेसन झांग बताते हैं, 'कॉलेज के तुरंत बाद मुझे गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिल गई थी. वहां मैं सालाना $200K (करीब 1.9 करोड़ रुपये) से ज्यादा कमा रहा था. मेरा लॉन्ग-टर्म प्लान था कि मैं रिटायरमेंट तक वहीं काम करूंगा और कॉर्पोरेट सीढ़ियां चढ़ूंगा. लेकिन एचआर और मैनेजर के साथ एक मीटिंग में मुझे निकाल दिया गया, जो मेरे लिए एक गहरा सदमा था.'
- 62 साल के जो फ्रेंड बताते हैं, 'मैंने माइक्रोसॉफ्ट में 23 साल तक प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम किया. मेरी बेस पेय सैलरी $250K (करीब 2.38 करोड़ रुपये) थी. मेरा मानना था कि ज्यादातर अमेरिकी अपनी सफलता और वैल्यू को काम से जोड़ते हैं. यह सेहत के लिए ठीक नहीं, लेकिन मेरे साथ यही सच था. मेरा जॉब मेरी पहचान का बहुत बड़ा हिस्सा था. लेकिन एक दिन सुबह उठते ही मैंने देखा कि बॉस के बॉस के बॉस के साथ मेरी 9 बजे की मीटिंग छूट गई थी. मुझे तुरंत समझ आ गया कि ये ठीक नहीं हुआ. दिन के आखिर में मुझे नौकरी से निकाल दिया गया.'
- 57 साल के श्रीराम रामकृष्ण बताते हैं, 'मुझे जुलाई 2025 में इंटेल से निकाल दिया गया था. वहां पर मैं डेवलपर एडवोकेट था और $180K (1.71 करोड़ रुपये) सालाना कमा रहा था. मैं उस कंपनी को अपने 23 साल दिए थे. वो मेरे डीएनए का जैसे हिस्सा बन गई थी. लेकिन एक दिन कंपनी ने पूरी बिजनेस यूनिट ही बंद कर दी. एक घंटे के भीतर अलविदा कहने पर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मैं सिर्फ एक नंबर था.'
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अब ये लोग क्या कर रहे हैं?
ब्रिटनी ने दूसरी नौकरी पाने के लिए 8,000 से ज्यादा कंपनियों में आवेदन किया, लेकिन उन्हें किसी ने जॉब नहीं दी. हताशा में उन्होंने टार्गेट में कैशियर की नौकरी के लिए अप्लाई किया, लेकिन उनके पास रिटेल का अनुभव न होने की वजह से यह जॉब भी नहीं मिली. खर्च चलाने के लिए उन्हें अपनी सेविंग्स तोड़नी पड़ीं और महंगे किराए के कारण वाशिंगटन डीसी छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ा. डिप्रेशन से बचने के लिए उन्होंने एक कुत्ता पाला और जॉब का इंतजार करने के बजाय AI के दौर में डॉक्युमेंटेशन की समस्या सुलझाने के लिए अपना खुद का स्टार्टअप 'Technodox' शुरू कर दिया है.
जेसन ने भी नई जॉब के लिए 30 जगह अप्लाई किया, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं आया. बिना जॉब के $1,300 महीने का हेल्थ इंश्योरेंस भरना उनके लिए नामुमकिन था, इसलिए उन्होंने बिना इंश्योरेंस के रहने का ही फैसला किया. अच्छी बात यह थी कि उन्होंने छंटनी के डर से पहले ही अपनी काफी सेविंग्स कैश में रखी थी, जिससे उन्होंने कंटेंट क्रिएशन का काम शुरू किया और अपना पर्सनल ब्रांड बनाया. इसी ब्रांडिंग का नतीजा है कि अब रिक्रूटर्स और दूसरी कंपनियां खुद उन्हें जॉब ऑफर कर रही हैं.
जो फ्रेंड बताते हैं कि छंटनी के बाद जो करीब 9 महीने तक वे गहरे डिप्रेशन में रहे. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब जिंदगी में पहली बार उन्हें मेडिकल इंश्योरेंस के लिए अपनी जेब से हर महीने $2,600 (करीब 2.1 लाख रुपये) चुकाने पड़े, जिसने उन्हें अमेरिका की उस असलियत से रूबरू कराया जिसे आम लोग रोज जीते हैं. जो ने कॉरपोरेट दुनिया की सच्चाई को समझा और एक फाइनेंशियल काउंसलर से बात करने के बाद तय किया कि वह अब वापस नौकरी नहीं करेंगे. उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया है और अब अपना समय नई चीजों को एक्सप्लोर करने में लगा रहे हैं.
रामकृष्ण को लगा था कि 6 महीने में दूसरी जॉब मिल जाएगी, लेकिन एक साल बीत गया, उन्हें नई नौकरी नहीं मिली. श्रीराम बताते हैं कि जॉब मार्केट में युवाओं और निकाले गए स्किल्ड लोगों की भारी भीड़ है. कंपनियां इंटरव्यू लेने के बाद बिना बताए गायब हो जाती हैं. आर्थिक तंगी से बचने के लिए उन्होंने अपने खर्चे काफी कम कर दिए हैं, बाहर खाना और नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन तक बंद कर दिया है. आखिर में जॉब का इंतजार करने के बजाय श्रीराम ने अपनी खुद की कंसल्टिंग फर्म खोल ली.
छंटनी से क्या सीख मिली?
एक से ज्यादा सोर्स ऑफ इनकम रखो.
सेविंग को हमेशा हाई-इंटरेस्ट अकाउंट में रखना चाहिए और कैश फ्लो मजबूत होना चाहिए.
निवेश करो. खर्चे ऐसे होने चाहिए जिन्हें बिना इनकम के भी संभाला जा सके.
हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल बैकअप की तैयारी हमेशा पहले से रखें, क्योंकि नौकरी जाने के बाद इसका भारी खर्च अकेले संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है.
अपनी पूरी पहचान और आत्म-सम्मान को सिर्फ कंपनी या पद से न जोड़ें, क्योंकि कंपनियों के लिए कर्मचारी सिर्फ एक 'नंबर' होते हैं.
सिर्फ पारंपरिक रिज्यूमे पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया और पर्सनल ब्रांडिंग के जरिए खुद को मार्केट में प्रमोट करना सीखें.
दूसरों की नौकरी का इंतजार करने के बजाय अपना स्टार्टअप या कंसल्टिंग शुरू करने जैसे विकल्पों पर भी काम करें ताकि करियर आपके नियंत्रण में रहे.
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