Viral News: बेंगलुरु की एक महिला ने 43 लाख रुपये का लोन अकेले चुकाने की कहानी शेयर की है. महिला ने बताया कि उसके पिता ने 18 साल की उम्र में उसका साथ देना छोड़ दिया था. इसके बाद उसने पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लिया. जिसको उसने अकेले चुकाया. हालांकि, पढ़ाई के दौरान उसकी बहन उसे पॉकेट मनी देती रही. अब जब महिला का पूरा एजुकेशन लोन खत्म हो गया तो उसने जश्न मनाया. 43 लाख रुपये के उसके एजुकेशन लोन को चुकाने के इस सफर का उसका 3 वर्षीय बेटा गवाह बना है. जिस दिन लोन की अंतिम किस्त भरनी थी, उस दिन वह अपने बेटे को बैंक साथ लेकर गई.
ISB से किया MBA
महिला अर्पिता राव (Arpitha Rao) ने LinkedIn पर एजुकेशन लोन चुकाने और उसके जश्न की कहानी साझा की है. उसने बताया कि पिछले हफ्ते एजुकेशन लोन चुकाने का जश्न मनाया. महिला ने अपनी पोस्ट में कहा कि मैं अपने MBA के 8 सा बाद लोन चुकाने के लिए अपने 3.5 साल के बेटे को साथ ले गई. ताकि मैं चाहती थी कि वह भी इस समय का गवाह बने. अर्पिता ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से MBA किया है.
18 साल में ही पिता ने बंद कर दी आर्थिक मदद
उसने आगे कहा कि ISB में उसके कुछ क्लासमेट्स ने अपने MBA के लोन को 2-3 साल में ही चुका दिए. उन्हें उनके परिवार से सपोर्ट मिला और उन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले उठाने का दबाव नहीं था. पर अर्पिता की कहानी बिल्कुल अलग तरह से थी. वह जब 18 साल की थीं, तभी से उनके पिता ने आर्थिक मदद देना बंद कर दिया था. कॉलेज के टाइम पर उनकी बहन उसे पॉकेट मनी देती थी. अर्पिता ने बताया कि उसकी बहन उसकी सबसे बड़ी ताकत है. जब भी उन्हें जरूरत होती है तो वह हमेशा साथ खड़ी मिलती है.
22 साल की उम्र में अर्पिता ने शुरू की नौकरी
अर्पिता ने LinkedIn पोस्ट में बताया कि 22 साल की उम्र में उन्होंने जॉब करनी शुरू की. इस दौरान वह सिर्फ अपना खर्च नहीं देखती थी, अपने परिवार की भी जिम्मेदारी देख रही थी. अर्पिता ने ISB से MBA करने के लिए 43 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया था, जिसे चुकाने में उन्हें 8 साल लग गए. इन 8 सालों में एक साल ऐसा भी रहा, जब अर्पिता को बेटा हुआ और उनकी कोई कमाई नहीं थी.
इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जगहों पर किया. इस पूरे सफर के दौरान उन्होंने अपनी दिशा बदली और जोखिम उठाए. अब वह पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो चुकी हैं औऱ अपनी खुद की कोचिंग और एडवाइजरी प्रैक्टिस शुरू कर रही हैं. अर्पिता ने पोस्ट के आखिरी में लिखा कि उनका यह फैसला उनके प्रोफेशनल और पर्सनल जीवन में एक बिल्कुल नए अध्याय की शुरुआत है.
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लोन चुकाने के दिन का गजब का वाकया
अर्पिता ने बताया कि जिस दिन उन्हें एजुकेशन लोन की आखिरी किस्त जमा करनी थी. उस दिन वह अपने 3.5 वर्षीय बेटे को बैंक ले गई. मेरे बेटे के लिए इस पूरी यात्रा का सबसे मजेदार हिस्सा वह था, जब उसे बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की असली बंदूक को छूने का मौका मिला. इस मजेदार पल के अलावा उन्होंने कहा कि लोन चुकाने के लिए अपने बेटे को साथ ले जाना उनके लिए बहुत मायने रखता था. क्योंकि वह इस बेहद अहम पड़ाव को उसके साथ साझा करना चाहती थी.
(अस्वीकरण: यह कहानी LinkedIn पर वायरल हुई एक पोस्ट पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्ति द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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