Viral Video: सभी लोग अपने परिवार के लिए अच्छा और आलीशान घर बनाते हैं. अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं. लोग भविष्य के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर प्लॉट खरीदते हैं. पर क्या कोई ऐसा भी होगा, जो अपना सबकुछ बेचकर मात्र 42 फुट की नाव पर जीवन गुजारने के बारे में सोच सके. ऐसा करने वाला भारत का पूर्व नौसैनिक (Navy Sailor) है. उसने दुनिया की सोच के एकदम उलट फैसला लिया और जमीन पर बनाई सारी जिंदगी को छोड़कर एक सेलबोट पर अपना जीवन बसा दिया. वह अपने परिवार के साथ उसी सेलबोट में रह रहा है.
42 फुट की सेलबोट में रहता परिवार
यह कहानी है कि भारतीय नौसेना (Indian Navy) में रहे गौरव की है. गौरव अपनी बेटी केया व पत्नी वैदेही के साथ पानी पर बनाए नए घर रीवा (42 फुट की सेलबोट) में रहते हैं. उनका द रीवा प्रोजेक्ट (Sailing Reeva, Indian Sailing Family) नाम से सोशल मीडिया अकाउंट भी है. दोनों सोशल मीडिया अकाउंटस पर अक्सर अपने लाइफ के बारे में शेयर करते रहते हैं. इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में वैदेही कहती हैं, "4 साल पहले 1 अक्टूबर 2022 को हम लोग मलेशिया के पेनांग (Penang, Malaysia) में रीवा (Reeva) पर रहने चले गए थे."
लोगों की सोच के उलट लिया फैसला
वैदेही वीडियो में कहती हैं, हमने अपनी बेटी को समुद्र के बीच बड़ा करने और नाव पर ज़िंदगी बिताने के लिए अपनी लगभग सभी चीज़ें बेच दीं. ज़्यादातर लोग अपने बच्चे को स्थिरता देने के लिए घर खरीदते हैं. 2022 में, हमने ठीक इसका उल्टा किया. हमने एक सेलबोट खरीदी.
उन्होंने बताया कि सालों तक हमने एक अलग ज़िंदगी का सपना देखा, जहां केया दुनिया के बारे में सिर्फ़ पढ़ने के बजाय उसे घूमकर बड़ी हो सके. इसलिए हमने अपनी लगभग सभी चीज़ें बेच दीं, अपनी नौकरियां छोड़ दीं और ज़मीन पर बनाई गई ज़िंदगी को पीछे छोड़ दिया. हमारे पास जो कुछ था, उसका वजन बस 120 किलो था. इसके बाद हमारा नया घर 'रीवा' बन गया, जो 1988 में बनी 42 फ़ीट की सेलबोट थी और जिसे समुद्र पार करने के लिए डिज़ाइन किया गया था.
सेलबोट में 2 छोटे केबिन, किचन और वॉशरूम
वैदेही के अनुसार, यह सेलबोट सूरज और हवा की ऊर्जा से चलती है, जिससे उनका फ़्रिज, फ़्रीज़र, लैपटॉप से लेकर नेविगेशन के उपकरण तक सब कुछ चलता है. वह कहती हैं, "लोगों को लगता है कि सबसे मुश्किल काम सेलिंग सीखना था, लेकिन ऐसा नहीं था. असल में कम चीज़ों में जीना सीखना सबसे मुश्किल था." वैदेही के मुताबिक, अब उनका घर दो छोटे केबिन, बैठने की एक छोटी जगह, एक गैली (रसोई) और एक छोटा सा वॉशरूम है.
यहां देखें वीडियो-
एक ऐसी जगह जहां हर इंच कीमती है, हर खाने के लिए प्लानिंग की ज़रूरत होती है और हर संसाधन का सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाता है. क्योंकि यहां अगर कोई चीज़ खत्म हो जाए, तो मदद के लिए ब्लिंकिट, ज़ोमैटो या अमेज़न नहीं आता. समुद्र में रहने की अपनी ही सच्चाई होती है. मौसम तय करता है कि हम कहां और कब जाएंगे. पासपोर्ट के साथ देशों के बीच यात्रा करने की अपनी चुनौतियां होती हैं. और कुछ रातें ऐसी होती हैं जब समुद्र हमें याद दिलाता है कि असली मालिक कौन है.
वीडियो में वैदेही ने बताया कि हमने खुले समुद्र और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हुए हज़ारों नॉटिकल मील का सफ़र तय किया है. हमने अपनी बेटी को समुद्र को अपना खेल का मैदान बनाकर बड़ा होते देखा है. कुछ दिन मुश्किल होते हैं, कुछ दिन ऐसे होते हैं जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता, और कुछ दिन तो हमें यह भी लगता है कि क्या हमने ऐसा करके कोई पागलपन तो नहीं किया.
एक पॉडकास्ट में गौरव ने Navy छोड़ने की वजह के बारे में बताया कि मैं यह सब इस लिए कर पाया हूं, क्योंकि Navy ने हमको बहुत कुछ सिखाया है. जो लोग सोचते हैं कि ये लाइफ छोड़कर वहां गया है. नहीं वो लाइफ आउटस्टैंडिंग थी. उससे कुछ और बढ़कर करना चाहते थे, इसलिए वहां गए. और वहां से मैंने जो कुछ भी सीखा, उसे उस ज़िंदगी में हर तरह से इस्तेमाल किया.
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