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This Article is From Oct 31, 2025

भारत के इस गांव में शादी में होती है ‘दूल्हे की विदाई’, चलता है महिलाओं का राज, जानिए क्या है ये अनोखी परंपरा?

भारत के मेघालय राज्य में एक ऐसा समाज है जहां महिलाओं का राज चलता है. यहां शादी के बाद दूल्हा ससुराल में रहता है और दुल्हन की नहीं, बल्कि दूल्हे की विदाई होती है.

भारत के इस गांव में शादी में होती है ‘दूल्हे की विदाई’, चलता है महिलाओं का राज, जानिए क्या है ये अनोखी परंपरा?
भारत के इस गांव में होती है ‘दूल्हे की विदाई’

भारत विविध परंपराओं और रीति-रिवाजों का देश है, लेकिन कुछ रिवाज़ ऐसे हैं जो लोगों को हैरान भी कर देते हैं. ऐसा ही एक अनोखा गांव है जहां शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा विदा होता है. यह परंपरा सदियों पुरानी है, और इस गांव की खासियत यह है कि यहां महिलाओं का राज चलता है. इस गांव में शादी के बाद लड़का अपनी पत्नी के घर रहने के लिए चला जाता है और वहीं बस जाता है. यही वजह है कि लोग मजाक में कहते हैं, “यह वो जगह है जहां हर लड़की जन्म लेना चाहेगी.”

यहां महिलाएं संभालती हैं सबकुछ

यह गांव भारत के मेघालय राज्य के खासी जनजाति (Khasi Tribe) से जुड़ा है. यहां ‘मतृसत्तात्मक समाज' (Matriarchal Society) प्रचलित है, यानी घर की मुखिया महिला होती है, न कि पुरुष. संपत्ति, उपनाम और घर की ज़िम्मेदारी बेटी को मिलती है. परिवार की सबसे छोटी बेटी को अक्सर घर और माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी दी जाती है.

देखें Video:

शादी के बाद दूल्हा जाता है पत्नी के घर

इस समाज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि शादी के बाद दूल्हा अपने ससुराल में रहने चला जाता है. यहां दूल्हे की विदाई होती है, और घर में नया सदस्य बनकर वह पत्नी के परिवार में शामिल हो जाता है. यह परंपरा इस जनजाति में “गर्व” की बात मानी जाती है, न कि अजीब.

वायरल हो रहा है यह अनोखा रिवाज़

हाल ही में इस परंपरा को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें बताया गया कि यहां महिलाएं ही निर्णय लेती हैं, घर के, समाज के और रिश्तों के. वीडियो देखकर लोग हैरान रह गए और कई महिलाओं ने कमेंट किया- “काश हम भी ऐसे समाज में पैदा हुई होतीं.” एक ने लिखा, “यहां तो सच में महिलाएं रानी हैं!”

सीख छुपी है इस परंपरा में

खासी समाज यह दिखाता है कि समानता और सम्मान का असली रूप कैसा होना चाहिए. यहां पुरुष और महिलाएं दोनों अपने-अपने दायित्व निभाते हैं, लेकिन फैसलों में महिलाओं की राय सर्वोपरि होती है. लोग इसे “भारत की सबसे प्रगतिशील परंपरा” बताते हैं, जहां महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है.

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संज्ञा सिंह
Chief Sub Editor
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