Viral News: IIT कानपुर से पढ़ीं कनक अग्रवाल (Kanak Agrawal) की एक LinkedIn पोस्ट ने रिमोट जॉब पर नई बहस छेड़ दी है. IITian कनक ने कहा कि 2026 में वर्कप्लेस की सबसे बड़ी लड़ाई यही है. कनक ने अपनी पोस्ट में बताया कि फ्यूचर वर्क फ्राम होम (WFH), हाइब्रिड या ऑफिस से तय नहीं होगा. यह इस बात से तय होगा कि किसके पास अपने समय का कंट्रोल है. किसी ने कनक की पोस्ट से सहमति जताई है तो कोई कनक की बातों से सहमत नहीं हुआ. कनक Remote & Rooted की फाउंडर और क्रिएटर हैं.
2026 की असली लड़ाई क्या है?
कनक की LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह एजुकेशनल कंटेंट, गाइड्स और ग्रुप एक्सपीरियंस के ज़रिए रिमोट वर्कर्स को कॉन्फिडेंस के साथ अपनी पहली वर्क-ट्रिप पर जाने में मदद करती हैं. कनक ने गुरुग्राम में McKinsey & Company कंपनी में करीब 2 साल काम किया है. यह एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी है. IITian कनक ने LinkedIn पोस्ट में बताया कि मेरी एक दोस्त ने पूरी तरह से रिमोट जॉब छोड़ दी, क्योंकि कंपनी वाले चाहते थे कि वह सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ऑनलाइन रहे. यानी हमेशा उपलब्ध और दिखाई देती रहे.
'असली मुद्दा आउटकम बेस्ड वर्क vs कंट्रोल बेस्ड वर्क'
उन्होंने लिखा कि लोग तब काम करने लगे, जब उनमें सबसे ज़्यादा एनर्जी होती थी. काम खत्म होने पर अपना लैपटॉप बंद कर देते थे. अपने दिन को इस तरह प्लान करते थे जो उनकी ज़िंदगी के हिसाब से सही हो. और यहीं से विरोध शुरू हुआ, क्योंकि कंट्रोल कम हो गया. कनक की LinkedIn पोस्ट के अनुसार, 57% एंप्लॉय कहते हैं कि फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स उनकी ज़िंदगी बदल देंगे, लेकिन कंपनियां आज भी कमिटमेंट को आउटकम से नहीं, बल्कि प्रेजेंस से मापती हैं. रिमोट वर्क ने लोगों के अपने समय को खुद मैनेज करने पर भरोसे की कमी को उजागर कर दिया. इसलिए अब असली मुद्दा आउटकम बेस्ड वर्क vs कंट्रोल बेस्ड वर्क है.
कनक ने बताया कि एक में लोगों पर काम पूरा करने का भरोसा किया जाता है. दूसरे में उन्हें काम करते हुए देखने की ज़रूरत होती है. उन्होंने LinkedIIn पोस्ट में लिखा कि कंपनियां यह नहीं समझतीं कि जिन लोगों को समय की आज़ादी का स्वाद मिल गया है, वे इसे आसानी से नहीं छोड़ते. वे नौकरी बदल लेंगे, फ्रीलांसिंग करेंगे या अपनी अलग कमाई का ज़रिया बना लेंगे, लेकिन किसी और को अपने समय पर कंट्रोल नहीं करने देंगे.
'समय के कंट्रोल से तय होगा वर्क का फ्यूचर'
उन्होंने बताया कि मैं पिछले 9 सालों से अकेले काम कर रही हूं और मुझे पता है कि मैं इस आज़ादी को खोने नहीं दूंगी. कनक ने कहा कि वर्क फ्यूचर WFH, हाइब्रिड या ऑफिस से तय नहीं होगा. यह इस बात से तय होगा कि किसके पास अपने समय का कंट्रोल है. कनक की इस बात से कई लोग सहमत नजर आए. एक यूजर मानवेंद्र सिंह सेंगर ने लिखा कि कनक मैं सहमत हूं, एक बार जब आपको अपने समय पर पूरा कंट्रोल मिल जाता है, तो उसे छोड़ना लगभग नामुमकिन होता है.

IIT Kanpur Alumna Kanak Agrawal LinkedIn Viral Post On Fully Remote or WFH Job
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वहीं, Jeremy Bloss ने लिखा कि मैंने 20 से ज़्यादा सालों तक हाइब्रिड मोड में काम किया है. कोविड से पहले कुछ हद तक अपने काम के समय को खुद तय करने की आज़ादी होना ठीक था, क्योंकि मेरे 80% साथी तय समय पर काम करते थे, जिससे एक तरह का तालमेल बना रहता था. कोविड के बाद के दौर में जब कई मामलों में कर्मचारियों को ज़्यादा विकल्प दिए गए हैं, तो इससे बहुत ज़्यादा टकराव और कामकाज में गड़बड़ी पैदा हुई है.
Jeremy ने आगे लिखा कि अगर लीडरशिप की तरफ से मज़बूत मैनेजमेंट न हो, तो कंपनी के कामकाज में बिखराव और तालमेल की कमी आ जाती है. जबकि Ian Coffee ने कनक की बातों से असहमति दिखाते हुए लिखा कि इस सिचुएशन में उस व्यक्ति को एक ऐसी नौकरी चाहिए, जहां वो घर से काम कर सके और फ्लेक्सिबल टाइमिंग हो. ये कुछ इंडस्ट्रीज़ और कुछ खास कंपनियों में काम कर सकता है. खासकर जहां टारगेट नापे जा सकते हैं, लेकिन 10 में से 9 रोल्स में ये पॉसिबल नहीं होगा. Coffee ने लिखा कि एक बॉस के तौर पर मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आएगा कि मुझे आपसे एक रिपोर्ट या जवाब चाहिए, पर नॉर्मल वर्किंग ऑवर्स में आप मिल ही नहीं रहे क्योंकि आप कहीं घूम रहे हैं.
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