छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है. एजेंसी ने उन्हें धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 18 अगस्त तक सात दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया.
जेल में बंद थे रामगोपाल अग्रवाल
ईडी के अनुसार रामगोपाल अग्रवाल पहले से ही रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे. एजेंसी ने 11 अगस्त को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया. इसके बाद पूछताछ के लिए उनकी हिरासत की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
मामले में अब ईडी कथित धन के लेनदेन और उससे जुड़े लोगों के संबंधों की गहराई से जांच करेगी.
ACB की FIR से शुरू हुई जांच
यह मामला रायपुर की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है. बाद में दाखिल चार्जशीट और पूरक चार्जशीट के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. जांच का केंद्र वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप हैं. एजेंसियों का मानना है कि इस अवधि में शराब कारोबार से जुड़े कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं.
3 हजार करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप
ईडी का दावा है कि जांच में एक कथित सिंडिकेट का पता चला, जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी समेत कई अन्य लोग शामिल बताए गए हैं. एजेंसी के अनुसार इस कथित नेटवर्क ने शराब कारोबार से करीब 3,000 करोड़ रुपये की अपराधजन्य आय अर्जित की. जांच में आरोप लगाया गया है कि यह रकम शराब बिक्री पर कथित अवैध कमीशन, बिना हिसाब वाली देशी शराब की बिक्री, डिस्टिलरों से वसूली, विदेशी शराब कंपनियों से कथित कमीशन और FL-10A लाइसेंस जारी करने के बदले प्राप्त धन से जुटाई गई.
कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने का दावा
ईडी ने दावा किया है कि कथित अवैध कमाई का एक हिस्सा नकद रूप में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया गया था. उस समय वह कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. एजेंसी का कहना है कि नकदी के परिवहन और वितरण से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं. इन बयानों में कथित तौर पर कहा गया है कि नकदी रायपुर स्थित राजीव भवन, जो उस समय प्रदेश कांग्रेस कार्यालय था, तक पहुंचाई जाती थी.
समन के बावजूद नहीं हुए पेश
ईडी के मुताबिक रामगोपाल अग्रवाल को PMLA की धारा 50 के तहत चार बार समन भेजा गया था, लेकिन वह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए. बाद में उनका बयान दर्ज किया गया. एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान मिले जवाब संतोषजनक नहीं थे और कई सवालों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. फिलहाल ईडी मामले की जांच आगे बढ़ा रही है. एजेंसी अब कथित मनी ट्रेल, नकदी के प्रवाह और इस मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की पड़ताल में जुटी हुई है.
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