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बेंगलुरु में फ्लैट ढूंढना बुरे सपने जैसा, शख्स ने बताया संघर्ष

बेंगलुरु के एक एंटरप्रेन्योर ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि बेंगलुरु में फ्लैट ढूंढना किसी बूरे सपने जैसा है. उनका कहना है कि नए घर में शिफ्ट होने से पहले उन्हें करीब 5 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ा.

बेंगलुरु में फ्लैट ढूंढना बुरे सपने जैसा, शख्स ने बताया संघर्ष
बेंगलुरु में फ्लैट ढूंढना बुरे सपने जैसा
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बेंगलुरु में किराये का घर ढूंढना काफी मुश्किल काम हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो शहर में नए हैं. हाल ही में बेंगलुरु के एक एंटरप्रेन्योर ने अपना अनुभव शेयर किया और बताया कि नए घर में शिफ्ट होने से पहले उन्हें करीब 5 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ा. takeUforward के फाउंडर और सीईओ राज विक्रमादित्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि 2BHK फ्लैट ढूंढना उनके लिए किसी बुरे सपने जैसा था. उन्होंने कहा कि वे सुरक्षा के कारण गेटेड सोसाइटी में घर लेना चाहते थे और ट्रैफिक से बचने के लिए HSR Layout के पास लोकेशन ढूंढ रहे थे. राज के मुताबिक, उन्होंने जिन भी फ्लैट्स को देखा, उनमें छोटे-छोटे बेडरूम होने के बावजूद किराया 60,000 से 90,000 रुपये प्रति महीना तक मांगा जा रहा था.

बेंगलुरु में फ्लैट ढूंढना बुरे सपने जैसा

राज ने यह भी बताया कि कई फ्लैट 10 से 15 साल पुराने थे, फिर भी मकान मालिक उनसे ज्यादा किराया मांग रहे थे. इसके साथ ही 5 से 10 महीने के किराए के बराबर भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट भी लिया जा रहा था. उन्होंने कहा कि बैचलर होने की वजह से घर ढूंढना और भी मुश्किल हो गया. कई मकान मालिक अविवाहित लोगों को घर देने से मना कर देते हैं. काफी दिक्कतों के बाद आखिरकार राज को अपनी पसंद का एक फ्लैट मिल गया. इस फ्लैट का किराया 80,000 रुपये प्रति महीना था और मकान मालिक ने 5 महीने के किराए के बराबर सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगा. हालांकि, शुरुआत में मालिक बैचलर को घर देने के लिए तैयार नहीं था. बाद में उनके ब्रोकर ने राज की प्रोफेशनल प्रोफाइल दिखाकर मकान मालिक को समझाया, तब जाकर यह डील फाइनल हो पाई.

राज ने बैचलर्स को घर देने में हिचकिचाहट पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मकान मालिकों के पास पहले से ही सुरक्षा के उपाय होते हैं, जैसे कि घर खाली करते समय एक महीने का किराया काट लिया जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि कई बार ब्रोकर सिर्फ मंजूरी लेकर संभावित किरायेदारों को खुद ही घर देखने भेज देते हैं, उनके साथ नहीं जाते. एक और बड़ी समस्या यह थी कि अच्छे फ्लैट बहुत जल्दी किराए पर उठ जाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर आपने कोई फ्लैट पसंद कर लिया, तो भी कुछ ही घंटों में कोई दूसरी एजेंसी उसे किसी और को दे सकती है.

राज ने यह भी शिकायत की कि मकान मालिक जल्दी शिफ्ट होने का दबाव बनाते हैं. उनका कहना था कि जब कोई फ्लैट खाली होता है, तो मालिक चाहते हैं कि किरायेदार तुरंत आकर रहने लगे, बजाय इसके कि नए महीने की शुरुआत से किरायेदारी शुरू की जाए. उन्होंने बताया कि 80,000 रुपये महीने के किराए और 5 महीने के सिक्योरिटी डिपॉजिट के साथ, उन्हें घर में शिफ्ट होने से पहले करीब 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते. राज का कहना है कि यह खर्च खासकर उन लोगों के लिए बहुत मुश्किल होता है, जो शहर में नए हैं, जो लोग अभी-अभी करियर शुरू कर रहे हैं, वे इतना बड़ा पैसा कैसे मैनेज करेंगे. 

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