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हर्ष गोयनका ने की चीन की तारीफ, बोले- भारत में भी ऐसा होना चाहिए; लोगों ने पूछा 'असली हीरो' कौन?

China Display Scientists: हर्ष गोयनका ने भारत में नेता और अभिनेता के होर्डिंग्स पर सवाल उठाते हुए चीन का उदाहरण दिया है. इस पर यूजर्स ने कमेंट कर नीरज चोपड़ा जैसे असली हीरोज की याद दिलाई है.

हर्ष गोयनका ने की चीन की तारीफ, बोले- भारत में भी ऐसा होना चाहिए; लोगों ने पूछा 'असली हीरो' कौन?
'बच्चे वही बनेंगे जिन्हें हम सेलिब्रेट करेंगे', हर्ष गोयनका बोले- सड़कों पर नेताओं नहीं, वैज्ञानिकों के पोस्टर होने चाहिए
X@hvgoenka

Viral Video: मशहूर बिजनेसमैन हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) ने चीन (China) का उदाहरण देते हुए भारत में सड़कों पर लगने वाले होर्डिंग्स और बैनर्स पर बड़ा सवाल उठाया है. गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक 25 सेकंड का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'चीन अपने पब्लिक प्लेस पर साइंटिस्ट्स को बड़ी स्क्रीन पर शोकेस कर रहा है, जबकि भारत में सिर्फ पॉलिटिशियन और फिल्म स्टार्स ही छाए रहते हैं. हम जिन लोगों का सम्मान करते हैं, उसी से तय होता है कि हमारे बच्चे क्या बनना चाहेंगे. क्यों न हम अपने साइंटिस्ट, टीचर्स, डॉक्टर्स, इनोवेटर्स और देश बनाने वालों को भी वहां जगह दें?'

'असली हीरो को भूल गए लोग'

एक्स पर 1.8 मिलियन फॉलोअर्स वाले हर्ष गोयनका का यह ट्वीट बहुत तेजी से वायरल हुआ और लोग उनके विचारों को पढ़कर अलग-अलग रिएक्शन्स देने लगे. आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन की बात का समर्थन करते हुए एस. मुरलीधरन नाम के एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'आपने मेरे दिल की बात कह दी है. हम एक देश के तौर पर क्रिकेटरों, सिनेमा सितारों और राजनेताओं के कुछ ज्यादा ही दीवाने हैं, जिसकी वजह से हम वैज्ञानिकों और नीरज चोपड़ा जैसे नॉन-क्रिकेटिंग स्पोर्ट्स हीरोज को भूल जाते हैं. अगर आप कोई क्विज कॉम्पिटिशन करवाएं, तो आपको यह देखकर हैरानी होगी कि बच्चे पुराने क्रिकेटरों और उम्रदराज़, पुराने फिल्म स्टार को तो याद रखते हैं, लेकिन नीरज चोपड़ा का नाम सुनकर कहते हैं- ये कौन है?

यहां देखें पोस्ट:-

'पद्म पुरस्कार विजेताओं को मिले जगह'

भारत बायोटेक की एमडी और को-फाउंडर सुचित्रा एला ने भी इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, 'हर्ष जी, आपने बहुत अच्छी बात कही. अगली पीढ़ी के लिए हमारे रोल मॉडल वे लोग होने चाहिए जिन्होंने बदलाव लाने का काम किया है. पद्म पुरस्कार विजेता हैं और कामयाब लोग हैं. इन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों और प्रोफेशन में भारत का मान बढ़ाया है. चाहे वह सोशल साइंस, ह्यूमैनिटीज़, संगीत, परफॉर्मिंग आर्ट्स, हैंडीक्राफ्ट या संस्कृति जैसे क्षेत्र ही क्यों न हों.'

'भारत में हम अपनी मूल्य-व्यवस्था को भूल गए'

डॉ. जीवन सिंह ने कमेंट में लिखा, 'यही हमारे आज के भारत और उन देशों के बीच असली फ़र्क है जो अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं को महत्व देते हैं. भारत में हम अपनी मूल्य-व्यवस्था को भूल गए हैं और पश्चिमी मूल्यों, जीवन-शैली और आदर्शों को अपना रहे हैं.'

'क्यों न आप ही इसकी शुरुआत कर दें'

वहीं, एक चौथे यूजर ने कहा, 'सर, एक छोटी सी गुजारिश है. अगली बार कृपया एक बिलबोर्ड किराए पर लें और खुद 3-4 जगहों पर ऐसा करके दिखाएं. कहें कि आपने यह चीन में जिस तरह होता है, उसे देखकर किया है. आपके पास ऐसा करने के साधन हैं, इसलिए यह कह रहा हूं. वरना, आप बस घर बैठे-बैठे बातें करने वाले एक्टिविस्ट बनकर रह जाएंगे. आप जैसे लोगों से बेहतर की उम्मीद है.'

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