अगर प्यार में लुटाए गए करोड़ों रुपयों का हिसाब ब्रेकअप के बाद कोई लोन यानी 'उधार' बताकर वापस मांगने लगे, तो आप क्या कहेंगे? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, जहां एक अमीर भारतीय मूल के सीईओ साहब को दिल लगाना बहुत भारी पड़ गया. प्यार की खुमारी उतरी, तो सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया, लेकिन वहां से जो झटका लगा है, उसकी गूंज हर तरफ है. यह कहानी है चंदर अग्रवाल की, जो भारत की एक बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनी 'टीसीआई एक्सप्रेस लिमिटेड' के कर्ता-धर्ता (सीईओ) हैं. साल 2019 में एक हवाई सफर के दौरान उनकी मुलाकात फेलिसिया ली से हुई. धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं और सितंबर 2022 आते-आते दोनों एक-दूसरे के प्यार में गिरफ्तार हो गए. फिर क्या था? प्यार में दिलदार बने सीईओ साहब ने अपनी प्रेमिका पर दिल खोलकर पैसा बरसाना शुरू कर दिया.
महंगे गिफ्ट्स और लग्जरी लाइफस्टाइल
हर्मेस, डियोर और प्रादा जैसे दुनिया के सबसे महंगे ब्रांड्स के बैग्स, फर्स्ट क्लास में हवाई सफर, विदेशों की महंगी सैर और यहां तक कि प्रेमिका के फ्लैट के लिए वास्तु (फेंगशुई) एक्सपर्ट की सलाह पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए गए. अग्रवाल साहब ने फेलिसिया की पढ़ाई से लेकर उनके पर्सनल खर्चों तक का बिल खुद चुकाया. लेकिन, यह रंगीन सफर सिर्फ दिसंबर 2023 तक ही चला. शक की एक चिंगारी ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए राख कर दिया और दोनों का ब्रेकअप हो गया.
प्यार का झांसा या उधार का खेल?
ब्रेकअप होते ही सीईओ साहब के सुर बदल गए. उन्होंने फेलिसिया पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये (3.7 लाख डॉलर) वापस करने का मुकदमा ठोक दिया. सिंगापुर की कोर्ट में उन्होंने दलील दी कि यह कोई तोहफा नहीं, बल्कि 'ब्याज मुक्त कर्ज' था, जिसे फेलिसिया ने लौटाने का वादा किया था. मजेदार बात देखिए, उन्होंने फेंगशुई मास्टर की फीस पर तर्क दिया कि "मैं भारतीय हूं, फेंगशुई पर यकीन नहीं करता, इसलिए वह पैसा तो पक्का लोन ही था."
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जज साहब की दोटूक और करारी फटकार
सिंगापुर के सीनियर जज ली सेउ किन ने अग्रवाल की सारी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जब रिश्ता अच्छा चल रहा था, तब आप उनके प्यार में पूरी तरह पागल थे और खुद अपनी मर्जी से यह सब लुटा रहे थे. ब्रेकअप के बाद आपके अंदर कड़वाहट भर गई और अब आप उनसे बदला लेना चाहते हैं.
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कोर्ट को दोनों के ढेरों व्हाट्सएप चैट्स में एक भी ऐसा मैसेज नहीं मिला, जहां लोन या पैसे चुकाने की बात हुई हो. नतीजा? कोर्ट ने साफ कह दिया कि प्यार में दिए गए तोहफे वापस नहीं होते. केस तो खारिज हुआ ही, साथ ही कोर्ट ने अग्रवाल साहब को फेलिसिया के मुकदमे का सारा कानूनी खर्च भी उठाने का आदेश दे डाला. कहते हैं न, दिल के मामलों में दिमाग का हिसाब-किताब नहीं चलता. कोर्ट ने भी आज इसी बात पर मुहर लगा दी है.
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