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आपकी समस्या क्या है, आप पुरुषों के स्वयंभू नेता हो? हिंदू मैरिज एक्ट पर याचिकाकर्ता को SC से लताड़

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी और कहा कि विशेष कानून में दखल नहीं दिया जाएगा. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल निजी प्रतिशोध के लिए नहीं किया जा सकता.

आपकी समस्या क्या है, आप पुरुषों के स्वयंभू नेता हो? हिंदू मैरिज एक्ट पर याचिकाकर्ता को SC से लताड़
मामले की सुनवाई CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की.
  • सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा तेरह दो तीन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया
  • यह प्रावधान केवल पत्नी को तलाक मांगने का अधिकार देता है जब पति-पत्नी एक वर्ष से अधिक साथ नहीं रहते
  • याचिका में इस प्रावधान को लिंग भेदभावपूर्ण बताया गया था लेकिन कोर्ट ने इसमें दखल देने से मना किया

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया. यह प्रावधान केवल पत्नी को यह अधिकार देता है कि यदि भरण-पोषण के डिक्री के बाद एक वर्ष या उससे अधिक समय तक पति-पत्नी के बीच साथ में रहना पुनः शुरू नहीं होता, तो वह तलाक की मांग कर सकती है. इस याचिका में इस प्रावधान को लिंग भेदभावपूर्ण बताया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि यह एक विशेष कानून है.

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सुप्रीम कोर्ट का याचिकाकर्ता से सख्त सवाल

इस मामले की सुनवाई CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की. खुद पेश हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि वह इस प्रावधान पर पुनर्विचार चाहते हैं और यह अधिकार पुरुष और महिला दोनों को मिलना चाहिए. इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पूछा कि इस प्रावधान से उन्हें कैसे प्रभावित होता है और क्या वह पुरुषों के स्वयंभू नेता हैं. जब याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्वयं इस स्थिति से प्रभावित हैं और इससे अन्य पुरुषों को भी उम्मीद मिल सकती है, तब CJI कांत ने टिप्पणी की कि यही वह उनसे स्वीकार करवाना चाहते थे. उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने PIL खारिज की

जस्टिस बागची ने कहा कि ऐसे मामले में संविधान संशोधन का रास्ता अपनाना चाहिए, क्योंकि यह एक विशेष कानून है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत ने आगे कहा कि अनुच्छेद 32 के जरिए व्यक्तिगत बदले नहीं निपटाए जा सकते. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता कानून की पढ़ाई कर रहे हैं. इस पर CJI ने कहा कि हो सकता है उनकी कुछ वास्तविक शिकायतें हों, लेकिन उनकी अलग रह रही पत्नी के प्रति भी सहानुभूति है और यह कानून के छात्रों के लिए अच्छा संदेश नहीं देता. उन्होंने याचिकाकर्ता को सही अवसर का इंतजार करने की सलाह दी. अंततः सुप्रीम कोर्ट ने PIL खारिज कर दी.

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