- कौन हैं स्टीफन मिलर, जिन्हें ट्रंप ने बनाया नया चीफ ऑफ स्टाफ?
- अमेरिकी राजनीति में क्यों चर्चा में हैं स्टीफन मिलर?
- रिपब्लिकन हार के बाद ट्रंप ने स्टीफन मिलर पर जताया भरोसा
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए स्टीफन मिलर को नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है. ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के प्रमुख चेहरे रहे मिलर को राष्ट्रपति का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता है. इससे पहले मिलर व्हाइट हाउस में डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ (पॉलिसी) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे. उनकी नियुक्ति को ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को और आक्रामक ढंग से आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
सुसी वाइल्स की जगह लेंगे मिलर
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि स्टीफन मिलर व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर सुसी वाइल्स का स्थान लेंगे. वाइल्स ने गुरुवार रात अपना इस्तीफा सौंप दिया था. ट्रंप ने वाइल्स के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है और भविष्य में भी वह उनके राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ी रहेंगी. सुसी वाइल्स ट्रंप प्रशासन में इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं. वह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सबसे लंबे समय तक चीफ ऑफ स्टाफ पद पर रहने वाली अधिकारी भी रहीं.
ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल हैं स्टीफन
41 वर्षीय स्टीफन मिलर लंबे समय से ट्रंप के आंतरिक सलाहकार समूह का हिस्सा रहे हैं. वह 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में भाषण लेखक के रूप में ट्रंप की टीम से जुड़े थे. हाल के वर्षों में वह व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में भी काम कर रहे थे. उनकी पहचान मुख्य रूप से ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में रही है. ट्रंप ने फ्लोरिडा जाते समय कहा 'स्टीफन शुरुआत से मेरे साथ हैं. वह राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और शानदार काम करेंगे.'

मिलर और ट्रंप
Photo Credit: व्हाइट हाउस
मिडटर्म हार के बाद आया फैसला
मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को अपेक्षा से खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद ट्रंप ने डेमोक्रेटिक नेताओं के प्रति नरम रुख अपनाने के बजाय अपने सबसे आक्रामक और वफादार सहयोगियों में से एक को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है. मिलर की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में एग्जीक्यूटिव अधिकारों का अधिक आक्रामक उपयोग कर सकते हैं.
इमिग्रेशन पॉलिसी को हो चुकी है आलोचना
स्टीफन मिलर की पहचान अमेरिकी आव्रजन नीति को कठोर बनाने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में रही है. हालांकि यही नीतियां हालिया चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए नुकसानदायक भी साबित हुईं. मिडटर्म चुनाव के दौरान किए गए सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने माना कि प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई जरूरत से ज्यादा सख्त रही है. इस वजह से मिलर की नियुक्ति को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी आलोचना शुरू कर दी है.
डेमोक्रेट नेताओं ने जताई आपत्ति
डेमोक्रेट सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने मिलर की नियुक्ति की आलोचना करते हुए कहा कि ट्रंप जनता के संदेश को समझने के बजाय अपने रुख को और सख्त बना रहे हैं. गार्सिया ने मिलर को विवादित नीतयों का प्रमुख चेहरा बताया.
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