विज्ञापन

आज ही के दिन हुई थी UN की स्थापना, जानिए 1945 की कहानी; NDTV के मंच से PM मोदी ने क्यों की 'चेंज' की बात

पीएम मोदी ने प्राचीन भारतीय राजनीतिज्ञ चाणक्य का जिक्र किया और उनके संस्कृत मंत्र 'अप्रणीतस्तु मात्स्यन्यायमुद्भावयति' का हवाला दिया. इसका अर्थ है कि 'जब दंड का कानून लागू नहीं होता, तो 'मात्स्य न्याय' पैदा होता है'.

आज ही के दिन हुई थी UN की स्थापना, जानिए 1945 की कहानी; NDTV के मंच से PM मोदी ने क्यों की 'चेंज' की बात
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में बदलाव को जरूरी बताया. (फोटो-एनडीटीवी)
  • पहला विश्व युद्ध खत्म होने के बाद लीग ऑफ नेशंस बनाई गई थी, लेकिन दूसरी बार विश्व युद्ध हो गया था
  • 1945 में सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर कर संगठन की स्थापना की
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र युद्ध रोकने में कमजोर साबित हो रहा है और शक्तिशाली देशों को रोक नहीं पा रहा है

जब पहला विश्वयुद्ध हुआ तो दुनिया ने तय किया कि अब ऐसा युद्ध नहीं हो. इसलिए लीग ऑफ नेशंस बनाया गया. मगर परिस्थितियों ने दूसरा विश्वयुद्ध करा दिया. इस विश्वयुद्ध के दौरान ही अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने इसकी कल्पना की. अपने आइडिया पर उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और सोवियत संघ के राष्ट्रपति जोसेफ स्टालिन से बात की. फिर तीनों ने इसे अंतिम रूप दिया. इसकी शुरूआत 14 अगस्त 1941 को अटलांटिक चार्टर के साथ हुई. 1 जनवरी 1942 को पहली बार डिक्लेरेशन बाय यूनाइटेड नेशंस में पहली बार यूनाइटेड नेशंस नाम का इस्तेमाल किया गया.

किसका आइडिया था ये

1942 के घोषणा-पत्र पर 26 देशों ने हस्ताक्षर किए. इसके बाद नियम बनाया गया कि जो भी देश जापान या जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा करेंगे, उन्हें इस नये गठबंधन में शामिल किया जाएगा. 1945 में जब दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने वाला था, तब कई देश बर्बाद हो चुके थे और दुनिया शांति चाहती थी. जापान और जर्मनी बर्बाद हो चुके थे. 25 अप्रैल से 26 जून 1945 तक, कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में 'अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' के लिए 50 देशों के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए. अगले दो महीनों में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का मसौदा तैयार किया और उस पर हस्ताक्षर किए. इसके जरिए 'संयुक्त राष्ट्र' (United Nations) नाम का एक नया अंतर्राष्ट्रीय संगठन बना. उम्मीद थी कि यह संगठन एक और विश्व युद्ध को रोकेगा, ठीक वैसा ही युद्ध जैसा कि उन्होंने अभी-अभी झेला था.

कब बना संयुक्त राष्ट्र

सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन के खत्म होने के चार महीने बाद, 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में आया. ऐसा तब हुआ जब चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य हस्ताक्षरकर्ता देशों के बहुमत ने इसके चार्टर को मंजूरी दे दी. अब, 79 साल बीत जाने के बाद, संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, जरूरतमंदों को मानवीय सहायता देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून को कायम रखने में मशक्कत कर रहा है.

Latest and Breaking News on NDTV

यूक्रेन से लेकर वेनेजुएला और ईरान तक की हालात तो हर कोई जानता है, मगर इस समय दुनिया के करीब 50 से अधिक देशों में छोटे-बड़े युद्ध चल रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की आवाज धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है. ताकतवर देश मनमानी कर रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र चाहकर भी उन पर लगाम नहीं लगा पा रहा है. उससे भी बड़ी बात है कि कई बार शक्तिशाली देशों के दबाव में संयुक्त राष्ट्र एकतरफा फैसले भी देता है. यही कारण है कि अब दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है. यहां तक की हाल ही में जब पीएम मोदी एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में पहुंचे तो उन्होंने भी साफ तौर पर संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की जरूरत की बात कही.

यूएन में बदलाव क्यों जरूरी

पीएम मोदी ने कहा, 'हमें दो बातों को समझना होगा. पहली बात- दुनिया का ऑर्डर बदल क्यों रहा है? पुराना ग्लोबल ऑर्डर आज की चुनौतियों का समाधान क्यों नहीं दे पा रहा है. और दूसरी बात- इस बदलती दुनिया में भारत की भूमिका क्या है? पहली बात को विस्तार दूं तो ये बदलाव सहज और स्वाभाविक है. सेकंड वर्ल्ड वॉर ने दुनिया को बड़ा सबक दिया था, दुनिया ने समझा कि केवल पावर और इंट्रेस्ट के आदार पर विश्व व्यवस्था नहीं चल सकती. संवाद जरूरी है. सहयोग जरूरी है. और विवादों का समाधान भी जरूरी है. इसी भावना ने यूनाइटेड नेशंस की नींव रखी. यूएन ने वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझ बढ़ाई लेकिन समय के साथ दुनिया बदलती गई. नई इकनॉमी और नई पावर का उदय हुआ और दुनिया के सामने मौजूद चैलेंजेस भी पहले से ज्यादा जटिल होते गए.' 

Latest and Breaking News on NDTV

पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने समाज, अर्थव्यवस्था और शक्ति के स्वरूप को ही बदल दिया. और जो देश उस समय ग्लोबल ऑर्डर बनाने वाली टेबल में नहीं थी, वो अपनी भूमिका के साथ आगे आ गए हैं. सवाल ये कि क्या ग्लोबल ऑर्डर उसी गति से बदला, जवाब है नहीं. न वर्ल्ड ऑर्डर बदला और न ही वैश्विक संस्था खुद को बदल पाए हैं. यूएन और दूसरी संस्थाओं की अपनी भूमिका रही है, लेकिन आज नई शक्तियां उभर रही हैं. नई आवाज अपनी जगह मांग रही हैं. फैसले लेने के तरीके न बदलें तो व्यवस्था और वास्तविकता के बीच दूरी बढ़ने लगती है. दशकों तक ट्रेड ने देशों को जोड़ा, तकनीक ने दूरियां मिटाईं, सी रूट ने अर्थव्यवस्था को जोड़ा, कल्चर और मोबिलिटी अलग-अलग समाजों को करीब लाए, लेकिन आज यही कड़ियां नए तनावों का सामना कर रही हैं. ट्रेड, वेपनाइजेशन का माध्यम बन रहा है. तकनीक, कंपीटिशन और कॉन्फ्लिक्ट का नया क्षेत्र बन रही है, सी रूट जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण बन रहे हैं. 

दुनिया के लिए भारत क्यों जरूरी

इसके बाद पीएम मोदी ने प्राचीन भारतीय राजनीतिज्ञ चाणक्य का भी जिक्र किया और उनके संस्कृत मंत्र 'अप्रणीतस्तु मात्स्यन्यायमुद्भावयति' का हवाला दिया. इसका अर्थ है कि 'जब दंड का कानून लागू नहीं होता, तो 'मात्स्य न्याय' पैदा होता है' — यानी, बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है.दुनिया को ऐसी स्थिति की जरूरत नहीं है. उसे एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जो इस 'मत्स्य न्याय' को होने से रोके. यही भारत का विजन है. यही भारत कर रहा है. कोरोना के समय जब दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत थी तब ग्लोबलाइजेशन की बातें करने वाले स्वार्थ में डूबे नजर आए. भारत ने उस समय खुलकर सभी देशों की मदद की. भारत जितना मजबूत होगा मानवता को उतना ही अधिक फायदा होगा. क्योंकि भारत की नीतियों को युगों के अनुभव और सभ्यता के मूल्य प्रेरित करते हैं. भारत क्षणों के हिसाब से फैसले नहीं लेता. इसलिए भारत स्थिरता की गारंटी है और निरंतरता का आश्वासन है. विकसित भारत 2047 का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सिर्फ हमारे लिए नहीं है, ये बेहतर विश्व की गारंटी है. 

यह भी पढ़ें-

Video: सार्क, कश्मीर और हाफिज सईद पर एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने अपने ही देश के विश्लेषक को धो दिया

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
United Nation, PM Modi, Narendra Modi
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com