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Video: सार्क, कश्मीर और हाफिज सईद पर एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने अपने ही देश के विश्लेषक को धो दिया

पाकिस्तान में लोग अब अपनी सरकार और फौज के चश्मे से अलग होकर भी भारत को देखने लगे हैं. वो सरकारी बयानों और सच्चाई में अंतर को साफ देख रहे हैं और खुलकर बताने लगे हैं कि झूठ बोलकर सच को नहीं छिपाया जा सकता.

Video: सार्क, कश्मीर और हाफिज सईद पर एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने अपने ही देश के विश्लेषक को धो दिया
पाकिस्तान के कमर चीमा को उनके ही देश के शकील चौधरी ने आईना दिखा दिया. (फोटो-वीडियो से)
  • कमर चीमा और शकील चौधरी ने पाकिस्तान की आतंकवाद सहित भारत के साथ रिश्तों पर अलग-अलग नजरिया रखा.
  • शकील के अनुसार, 2016 में उरी हमले और पाकिस्तान की भारत विरोधी रवैये के कारण सार्क पर असर पड़ा.
  • भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री और सैन्य संघर्षों के इतिहास को दोनों विश्लेषकों ने अलग तरीके से रखा.

आतंकवाद पर पाकिस्तान दुनिया भर में बदनाम है. मगर वो हर बार एक से बढ़कर एक बहाने बनाता है. भले ही उसके मुशर्रफ से लेकर इमरान खान और मौजूदा रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ देश के तौर पर आतंकवाद का पालन-पोषण करने की बात कबूलते रहे हैं. हां, ये जरूर है कि ये सभी नेता पिछली बातों को तो स्वीकार कर लेते हैं, मगर अपने समय की सरकार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाला बताते रहे हैं. अब कमर चीमा नाम के एक पाकिस्तानी विश्लेषक की दूसरे पाकिस्तानी विश्लेषक शकील चौधरी पाकिस्तान की सोच को बड़े ही अच्छे ढंग से दिखाती है.

इस बातचीत में कमर चीमा को आप कट्टरपंथी समझ लें या फिर पूरी तरह अपने देश की बात रखने वाला. ये आपके ऊपर निर्भर है, मगर कमर चीमा एक आम पाकिस्तानी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो वही बोलता है जो उसकी सेना या सरकार बोलती है, भले ही उसके पीछे कोई तर्क नहीं हो. हां, पर वो उम्मीद लगाए रहता है कि भारत से संबंध अच्छे हो जाएं ताकि उसके मुल्क की गरीबी दूर हो सके. साथ ही उसे हर समय ये भी डर लगा रहता है कि कहीं भारत उस पर हमला नहीं कर दे. फिर भी वो पाकिस्तानी फौज की शेखी बघारने में कोई कसर नहीं छोड़ता.

वहीं शकील चौधरी ऐसे पाकिस्तानी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सही और गलत का फर्क समझता है. वो चाहता है कि पाकिस्तान अपनी गरीबी और बदहाली से निकल जाए. इलाके में शांति आए और वो दुनिया में फक्र के साथ खुद को पाकिस्तानी बता सके. उसे एक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के नागरिक के तौर पर नहीं समझा जाए. वो दुनिया में पाकिस्तान को लेकर चल सही सोच और उसकी हरकतों पर नजर रखता है और लगातार पाकिस्तान सरकार को सही राह दिखाने की कोशिश करता है. 

सार्क से भारत क्यों कर रहा किनारा?

कमर चीमा ने अपने शो में सबसे पहला सवाल यही किया. उन्होंने कहा कि अभी मालदीव के राष्ट्रपति आए तो उन्होंने सार्क की मजबूती पर बात की. इससे पहले बांग्लादेश ने भी इसी तरह की बात की थी. पर भारत क्यों इसे एक्टिवेट नहीं करना चाहता? वो दुनिया भर के संगठनों के आयोजन कर रहा है, कई संगठनों में भूमिका निभा रहा है तो आखिर सार्क से क्या दिक्कत है उसे?

शकील चौधरी इस पर कहते हैं कि 2016 में क्या हुआ था? याद करिए. सार्क सम्मेलन से पहले उरी हुआ था. उसमें 19 भारतीय फौजी मारे गए थे. उससे पहले गृहमंत्री के रूप में सार्क सम्मेलन में राजनाथ सिंह आए थे. उस दौरान किस तरीके का व्यवहार उनके साथ हुआ था. क्या एक मेजबान देश को ऐसा व्यवहार करना चाहिए? पाकिस्तान के गृह मंत्री निसार अली खान ने राजनाथ सिंह के साथ ऐसा व्यवहार किया कि वो लंच तक नहीं किए और पाकिस्तान से भारत लौट गए. निसार अली खान घोड़े पर सवार थे. तो हमें खुद सोचना चाहिए कि आखिर ऐसे कौन से फैक्टर्स थे कि सार्क गुमनामी में चला गया.

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'भारत बॉस बनने की कोशिश करता है'

कमर चीमा ये बातें सुनकर भड़क जाते हैं. वो कहते हैं आपको आगे-पीछे का तो कुछ पता नहीं है. असल बात ये है कि भारत इलाका का चौधरी बनना चाहता है. वो हर किसी को बताता है कि तुम ये करो, तुम वो करो. बांग्लादेश में यूनुस को प्रेशर करता रहा और अब तारिक रहमान पर प्रेशर डाले हुए है. शेख हसीना को अपने यहां रखे हुए और फिर भी तारिक रहमान को ब्रिक्स में बुलाया बुलिंग करने के लिए. मगर दुनिया भारत को इलाके का बॉस मानने को तैयार नहीं है.     

इस पर शकील चौधरी कहते हैं कि चीमा साहब, आप फौरन बांग्लादेश, श्रीलंका चले जाते हैं. हम बात का फोकस भारत-पाकिस्तान संबंधों पर रखते हैं. आप खुद बताएं कि आखिर सार्क के डिस्फंक्शनल होने में क्या फैक्टर्स इनवॉल्व थे?

हाफिज सईद और कश्मीर पर आर-पार डिबेट

इस पर कमर चीमा कहते हैं कि सिर्फ एक वजह है कि भारत सभी को डिक्टेट करता है. उसके आगे-पीछे आप 15,000 चीजें जोड़ दो कि उरी हो गया, ये हो गया. हमारे यहाँ तो रोज अटैक हो रहे हैं. कश्मीर पर उन्होंने कब्जा किया हुआ है. कुलभूषण यादव पर आप कुछ नहीं कहेंगे?

शकील चौधरी कहते है, चीमा साहब, देखिए उरी अटैक के बाद हाफिज सईद ने खुद गायबाना नमाज़-ए-जनाजा पढ़ाई थी गुजरावाला में. वहां उसके पोस्टर्स मौजूद हैं. वहां उसने कहा कि जनाब, हमारे एक मुजाहिद ने यह कर दिया, हमारे एक मुजाहिद ने वो कर दिया. तो चीजों को इतना सिंपल मत करिए. ये बड़ी कॉम्प्लेक्स चीजें हैं. इनको उनकी कॉम्प्लेक्सिटी में देखिएय और आपने कहा कश्मीर पर कब्जा हुआ है. कब कब्जा हुआ कश्मीर पर? कश्मीर के तो महाराजा ने इलाहाक किया था इंडिया के साथ. चीमा साहब, हाफिज सईद कौन है? उसको कौन सपोर्ट करता है? हाफिज सईद कितने अरसे से क्या कुछ करता आ रहा है. अब जाकर उसको एफएटीएफ की वजह से सजा हुई. उसका भी नहीं पता कि भाई वो किस जेल में है. कितनी सजा हुई? 35 साल या 31 साल. पहले हमें सुनने को मिलता था कि ओ जी, हमारी अदालतें क्या करें? उसके खिलाफ तो कोई एविडेंस ही नहीं है. फिर अचानक एविडेंस भी आ गई. तो ये क्या गेम हम कर रहे हैं? किसको बेवकूफ बना रहे हैं? एफएटीएफ में पाकिस्तान गया है. तीन दफा गया है. इंडिया को आप क्यों नहीं लेके गए? अगर आपके पास एविडेंस थी कि पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले में इंडिया इनवॉल्व है. अगर बलोचिस्तान में इंडिया इनवॉल्व है तो आप एफएटीएफ में क्यों नहीं लेके जाते इंडिया को? 

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रही बात कुलभूषण यादव की तो आपको इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने क्या कहा? उसने कहा कि इस मामले की सिविलियन अदालत में केस चलाएं. आज तक आप नहीं चला सके. करोड़ों रुपये आपने खर्च कर दिए इस केस में.  अजमल कसाब पर भारत ने सिविलियन कोर्ट में मुकदमा चलाया. सुप्रीम कोर्ट तक वो गया. आपने वो काम क्यों नहीं किया कि आप सिविलियन कोर्ट में चलाते? आपको पता है कि  फॉर्मर जर्मन एंबेसडर का इस कुलभूषण यादव की गिरफ्तारी के चंद दिन के बाद लेक्चर था कराची में. उसको देख लीजिएगा डॉन में उसकी कवरेज हुई थी. तो उसने क्या कहा था कि इसको पाकिस्तानी एजेंसियों ने खरीदा. तालिबान से खरीदा. इसके अलवा भी इस केस में स्टोरीज हैं कि अफगानिस्तान ने उसको ईरान से किडनैप किया, वगैरह..वगैरह. 

हमने भारत के 8 लड़ाकू विमान गिराए ?

कमर चीमा फिर कहते हैं कि इंडिया ने 12 न्यूक्लियर वॉर हेड्स अपनी पनडुब्बियों पर लगा दिए हैं. क्या भारत इसके जरिए पाकिस्तान को धमकी नहीं दे रहा? क्या आपको नहीं लगता कि वो युद्ध की तैयारी कर रहा है और खासतौर पर तब जब दो दफा हमने इंडिया के जहाज गिराए हैं. उसके बाद भारतीय अब पाकिस्तान से बदला लेना चाहते हैं. पीएम मोदी अपनी कमजोर होती साख को मजबूत करने के लिए कोई ऐसा इवेंट नहीं कर सकते? क्या आप समझते हैं कि ये जो 12 न्यूक्लियर वॉर हेड्स लगाए हैं पनडुब्बियों पर इससे पाकिस्तान को कोई ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए?

शकील चौधरी कहते है, चीमा साहब, देखिए, मैं फिर दोबारा कहूंगा के एक सबमरीन मामले में पाकिस्तान कह रहा है कि इंडिया ने यह कर दिया तो क्या भारत ने किसी एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है? क्या ऐसा कोई एग्रीमेंट था कि यह हम नहीं करेंगे और उसके बाद भारत ने वो कर दिया. मैं तो यह चाहूंगा कि अच्छे ताल्लुकात हो और किसी भी मुल्क को इस तरह का काम करने की जरूरत ही महसूस ना हो. जहां तक आप ये बार-बार यह बात करते हैं जहाज गिरा लिए तो जहाज तो चीमा साहब 71 की जंग में भी बहुत गिराए थे हमने. 108 जहाज जो है हमारे सरकारी स्पोक्समैन ने कहा था कि हमने गिराए हैं. अब तो सिर्फ आठ तक गिनती गई है. उस वक्त 108 पर गई थी. लेकिन जंग का आउटकम क्या था? इंडिया ने जो नुकसान किया पाकिस्तान की एयर बेसेस का उसपर आप बात क्यों नहीं करते? 

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