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तपती धरती का नया अलार्म! दुनिया ने इस साल देखा इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मई

साल 2026 से पहले रिकॉर्ड पर इतिहास में सबसे गर्म मई का महीना 2024 में था. वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अल नीनो मौसम पैटर्न ने मिलकर जमीन और समुद्र के औसत तापमान को बढ़ा दिया है.

तपती धरती का नया अलार्म! दुनिया ने इस साल देखा इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मई
Climate Change and Heatwave: लगातार गर्म हो रही धरती (प्रतिकात्मक फोटो)
  • साल 2026 का मई महीना अबतक के रिकॉर्ड का दूसरा सबसे गर्म मई रहा
  • क्लाइमेट चेंज और विकसित हो रहे अल नीनो मौसम पैटर्न ने मिलकर जमीन और समुद्र के औसत तापमान को बढ़ा दिया है
  • पिछले महीने दुनिया का औसत तापमान औद्योगीकरण से पहले के समय के औसत तापमान से 1.42 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था

अपनी धरती तेजी से बदल रही है. धरती का तापमान लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है और वैज्ञानिकों ने इसका सबूत भी दे दिया है. इस साल का मई महीना अबतक के रिकॉर्ड का दूसरा सबसे गर्म मई रहा. यह जानकारी यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने बुधवार दी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार बताया गया है कि कहा कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज और विकसित हो रहे अल नीनो मौसम पैटर्न ने मिलकर जमीन और समुद्र के औसत तापमान को बढ़ा दिया. अपनी धरती गर्म होती जा रही है.

रिपोर्ट की बड़ी बातें

धरती के तापमान का रिकॉर्ड 1940 से रखा जा रहा है. अबतक के इतिहास में सबसे गर्म मई का महीना 2024 में था. जबकि दूसरा सबसे गर्म मई का महीना इस साल (2026) का था. इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने (मई 2026) दुनिया का औसत तापमान 19वीं सदी के औद्योगीकरण से पहले के समय के औसत तापमान से 1.42 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था.

पश्चिमी यूरोप में साल की इतनी शुरुआत में दर्ज की गई सबसे गंभीर हीटवेव में से एक देखी गई है. C3S का कहना है कि यूरोप में पड़ी यह बेहद गर्मी वैज्ञानिकों की उम्मीदों के मुताबिक ही थी. उन्होंने पहले से अनुमान लगा लिया था कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप को कैसे प्रभावित करेगा.

इसके अलावा प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में असाधारण रूप से बहुत ज्यादा तापमान दर्ज किया गया, क्योंकि वहां मौसम अल नीनो जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उम्मीद है कि आने वाले महीनों में अल नीनो मौसम पैटर्न बन जाएगा और दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं को बढ़ावा देगा.

बता दें कि अल नीनो प्राकृतिक रूप से हर 2 से 7 साल में होता है. जब व्यापारिक हवाएं (ट्रेड विंड्स) कमजोर पड़ जाती हैं, तो पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर आमतौर पर दुनिया के तापमान बढ़ने और बारिश के पैटर्न के बिगड़ने के रूप में दिखता है. इसका मतलब है कि कुछ इलाकों में सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है.

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