- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का शव तेहरान के ग्रैंड मोसाला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया
- खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत, पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान सहित दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए
- अंतिम संस्कार 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होकर 9 जुलाई को मशहद में उनके पैतृक स्थान पर संपन्न होगा
हर किसी की तमन्ना होती है कि जब उसकी मौत हो तो जनाजा धूम से निकले. उसके चाहने वाले उसे इस तरह रुख्सत करें कि जमाना देखता रहे. ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का शव शुक्रवार को तेहरान के एक विशाल हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. यहां दुनिया भर के धर्मगुरुओं, अधिकारियों, विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और अन्य शोक मनाने वालों ने उनके 37 साल के शासन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी.
'ग्रैंड मोसाला' में ताबूत
ईरान की मीडिया और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की तस्वीरों में शोक मनाने वाले लोग खामेनेई के ताबूत को 'ग्रैंड मोसाला' ले जाते हुए दिखे. इस ताबूत पर ईरान का तिरंगा झंडा लगा था और 'ग्रैंड मोसाला' इस्लामिक गणराज्य की सबसे अहम औपचारिक जगहों में से एक है. दूसरी तस्वीरों में अंतिम संस्कार से पहले की रस्म के दौरान काले कपड़े पहने लोगों की भीड़ दिखी, जबकि ताबूत को लाल फूलों और हवा में लटकी सफेद तितलियों के बीच रखा गया था. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को होने वाले अंतिम संस्कार में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. पूर्व सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होगा और 9 जुलाई को उनके गृहनगर, उत्तर-पूर्वी पवित्र शहर मशहद में उन्हें दफनाने के साथ संपन्न होगा.
भारत-पाकिस्तान से कौन पहुंचा
अमेरिका-ईरान बातचीत में अहम मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान पहुंचने वाले हैं तो फील्ड मार्शल असीम मुनीर तेहरान पहुंच चुके हैं. भारत की तरफ से बिहार के गवर्नर सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भी ईरान पहुंच गए हैं. भारत में ईरान के दूतावास ने X पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी कि "भारत के गणमान्य लोगों ने ईरान के शहीद नेता, महामहिम अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी." दूतावास द्वारा X पर शेयर की गई तस्वीर में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद के साथ-साथ अन्य प्रतिनिधि भी दिखाई दिए.
Indian polical, religious, civil society delegation pays homage to the late supreme leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran. Congress Party's Salman Khurshid, PDP's Mehbooba Mufti present.
— Sidhant Sibal (@sidhant) July 3, 2026
Vdo ctsy: Iran's Tasnim News pic.twitter.com/lU8Ta6VHb9
चीन, अफगानिस्तान सहित दुनिया के कई देशों ने अपने प्रतिनिधि अयातुल्ला अली के जनाजे में शामिल होने के लिए भेजे हैं.
ईरान का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार
कई शिया मुसलमानों के लिए आध्यात्मिक गुरु रहे खामेनेई की मौत ईरानी राजधानी के बीचों-बीच उनके परिसर पर अमेरिका-इजरायल की तरफ से किए गए हमलों में 86 साल की उम्र में हो गई. उन्हें तीन दिनों के लिए विशाल 'ग्रैंड मोसाल्ला' में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा; इस जगह को खामेनेई की तस्वीरों और उनके विचारों वाले बैनरों से सजाया गया है. इस समारोह में उनके मारे गए रिश्तेदारों के शव भी रखे जाएंगे, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन गया है.
जनमत संग्रह बताने की कोशिश
लेकिन, खमेनेई की मौत के चार महीने से ज्यादा समय बाद हो रहे इस अंतिम संस्कार की जटिलता और बड़े पैमाने से भी ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात है इस समय इसका प्रतीकात्मक महत्व. ईरान के सत्ताधारी धर्मगुरु इसे इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति जनता की निष्ठा के प्रदर्शन और इस बात के सबूत के तौर पर देख रहे हैं कि क्रांति का जोश अभी भी बरकरार है.
सरकारी मीडिया से बात करते हुए कोम में शुक्रवार की नमाज के नेता अयातुल्ला मोहम्मद सैदी ने कहा, "शहीद नेता और दूसरे शहीदों के अंतिम संस्कार के जुलूस में लोगों की भारी भीड़ असल में इस्लामिक रिपब्लिक के लिए एक और जनमत संग्रह होगी."

अगर वे इसे जनमत संग्रह के तौर पर देखते हैं, तो अधिकारी नतीजे को किस्मत पर नहीं छोड़ना चाहते. ईरान की सत्ताधारी सरकार 1.5 से 2 करोड़ समर्थकों को ईरान के शहरों में इकट्ठा करने की उम्मीद कर रही है. इसके लिए वे ट्रांसपोर्ट, रहने की जगह और खाने-पीने का भी इंतजाम कर रहे हैं, ताकि वे अपने धार्मिक शासन की ताकत दिखा सकें, जो एक ऐसी लड़ाई से बच निकला है, जिसे वे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते थे.
खामेनेई की मौत और उनके बेटे मोजतबा का ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता के तौर पर उत्तराधिकारी बनना—खासकर इजरायल और अमेरिका जैसे सबसे बड़े दुश्मनों के साथ चल रहे टकराव के बीच—इस्लामिक रिपब्लिक के 47 साल के इतिहास में एक बहुत अहम मोड़ है. जिस हमले में उनके पिता की मौत हुई, उसमें मोजतबा भी बुरी तरह घायल हो गए थे; और युद्ध शुरू होने के बाद से उन्हें किसी नई तस्वीर में नहीं देखा गया है. खबर है कि अपनी जान को लगातार बने खतरों के कारण पिता के जनाजे में शामिल नहीं होंगे.
कमजोर होता भरोसा
लेकिन एकता और निष्ठा के दिखावे के पीछे, जानकारों ने देखा है कि इस्लामिक रिपब्लिक के लिए जनता का समर्थन बहुत कम हो गया है. पूरे देश में, कई ईरानी दशकों से लगी उन पाबंदियों से तंग आ चुके हैं, जिन्होंने उनकी अर्थव्यवस्था का दम घोंट दिया है. साथ ही, वे 1979 की क्रांति के नाम पर हो रहे दमन से भी नाराज हैं.
अयातुल्ला का कद
अयातुल्ला खामेनेई सिर्फ ईरान के सर्वोच्च नेता ही नहीं थे बल्कि वह शिया मुस्लिम धर्मगुरु भी थे, जिनका इराक, पाकिस्तान, लेबनान और दूसरे एशियाई देशों में बहुत सम्मान था. वहां शिया रैलियों में अक्सर उनकी तस्वीरें देखी जाती थीं. शिया धर्मगुरुओं के क्रम में खामेनेई को "मरजा" माना जाता था. इसका मतलब था कि दुनिया भर के कई शिया उनके धार्मिक फैसलों और मार्गदर्शन को मानते थे.

हालांकि, कई शिया विद्वान इराक के ग्रैंड अयातुल्ला अली सिस्तानी को इस पंथ का सबसे अहम धार्मिक नेता मानते हैं, लेकिन खामेनेई का राजनीतिक असर बेमिसाल था. इसकी वजह थी उनकी धार्मिक सरकार के अरब दुनिया में शिया चरमपंथी गुटों के साथ बने गठबंधन. वे 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' के भी प्रमुख थे; यह एक ऐसी वैचारिक सैन्य ताकत थी, जिसने लेबनान में हिज्बुल्लाह जैसी शिया ताकतों का समर्थन किया था.
अंतिम संस्कार में देरी क्यों हुई?
खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के चार महीने से भी ज्यादा समय बाद किया जा रहा है, जो इस्लामी परंपरा के हिसाब से बहुत ही असामान्य देरी है. इस देरी का कारण ये था कि अमेरिका और इजरायल की तरफ से लगातार हमला या उसका खतरा बना हुआ था. अयातुल्ला के शव को धार्मिक नियमों के अनुसार रखा गया था. आम तौर पर इस्लाम में केमिकल से शव को सुरक्षित रखने (एम्बामिंग) को सही नहीं माना जाता है.

आतंकवाद-विरोधी मामलों के जानकार डॉ. मोहम्मद उमर ने फॉक्स न्यूज डिजिटल को बताया कि अयातुल्ला के शव को "लगभग निश्चित रूप से रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था, न कि एम्बामिंग करके, क्योंकि इस्लाम में केमिकल से शव को सुरक्षित रखने की मनाही है. शिया कानून कुछ खास मामलों में शव को दफनाने में देरी करने और उसे ठंड में सुरक्षित रखने की इजाडत देता है, और सर्वोच्च नेता के लिए धार्मिक अधिकारियों से छूट मिलना भी आसान है. ईरान के फोरेंसिक मुर्दाघरों में शवों को पहले से ही महीनों तक रखा जाता है, इसलिए चार महीने तक जमा देने वाली ठंड में शव को रखना कोई अनोखी बात नहीं है.'धार्मिक और कानूनी नियम' इसी तरह के मामलों को कवर करते हैं."
खुमैनी का जनाजा क्यों याद आया
अब, ईरान सरकार इस अंत्येष्टि को राष्ट्रीय एकता और साझा शोक के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है. आधिकारिक आयोजन निकाय द्वारा साझा किए गए अंत्येष्टि के प्रतीक के रूप में अयातुल्ला खामेनेई की बंद मुट्ठी के साथ "हमें उठना होगा" का नारा अंकित है. लेकिन तेहरान में तनाव और सन्नाटा छाया हुआ है, जो क्रांति के जनक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के भावपूर्ण अंतिम संस्कार से बिलकुल विपरीत है. तब, लाखों रोते-बिलखते लोग खुमैनी के अंतिम संस्कार के जुलूस में उमड़ पड़े और कुछ लोग एम्बुलेंस पर चढ़ गए; इस दौरान मृत नेता का नंगा पैर कफन से बाहर निकल आया, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स भीड़ को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे थे.
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