अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के दौरान इजरायल ने ऐसी चाल चली थी जिससे जंग की लपटें फिर से तेज हो सकती थी. युद्धविराम की बातचीत के बीच, इजरायल ईरान के शीर्ष वार्ताकारों को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की फिराक में था.
इजरायल का प्लान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची की हत्या करने का था. लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका बीच में आ गया. ट्रंप प्रशासन को डर था कि अगर इजरायल ने इन दोनों बड़े नेताओं को कुछ होता है, तो शांति की रही-सही उम्मीदें भी खाक में मिल जाएंगी और दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने की जंग में आ जाएंगे. लिहाजा, अमेरिका ने अपने अरब दोस्तों के जरिए ईरान को इस खौफनाक साजिश की पहले ही खबर दे दी.
इजरायल की हिट लिस्ट में थे ईरानी के टॉप लीडर
इस जंग की शुरुआत से ही ईरान की लीडरशिप का खात्मा करना इजरायल की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई से लेकर सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी तक, करीब 50 से ज्यादा ईरानी कमांडर और नेता हाल के सालों में इजरायली हमलों का शिकार हो चुके हैं.

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अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल का इकलौता मकसद ईरान की हुकूमत को नेस्तनाबूद करना है. लेकिन अमेरिका का मानना था कि इस नाजुक मोड़ पर गालिबाफ और अराघची को निशाना बनाना भारी पड़ेगा. ये दोनों ही वो शख्सियतें हैं जो अमेरिका के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा बातचीत का रास्ता साफ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
मौत के मुंह से दो बार बचकर निकले गालिबाफ
यह पहली बार नहीं था जब इन नेताओं पर मौत का साया मंडराया हो. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में जब सीजफायर की बातचीत दोबारा शुरू हुई, तो अमेरिका के कड़े एतराज के बाद इजरायल ने अस्थायी रूप से इन दोनों के नाम अपनी हिट लिस्ट से हटाए थे.
संसद अध्यक्ष गालिबाफ तो दो बार मौत के मुंह से वापस आए हैं. जून 2025 की 12 दिनों की जंग में और फिर इस साल के टकराव के दौरान, इजरायल ने एक पहाड़ के नीचे बने खुफिया बंकर को निशाना बनाया था, जहां ईरानी दिग्गजों की गुप्त बैठक चल रही थी. मलबे के नीचे दबे गालिबाफ को दोनों बार जिंदा बाहर निकाला गया.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहले दौर की वार्ता के दौरान ईरानी वार्ताकार
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जब पाकिस्तान के आसमान में मंडराया खतरा
अप्रैल के महीने में जब गालिबाफ और अराघची अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस से मिलने पाकिस्तान के इस्लामाबाद गए, तो सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए जो पहले कभी नहीं देखे गए. ईरान ने कतर और पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से पुख्ता गारंटी मांगी थी कि इजरायल उनके डेलिगेशन पर कोई हमला नहीं करेगा.
पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने 70 से ज्यादा लोगों से भरे ईरानी विमान को अपनी सीमा में एस्कॉर्ट किया. लेकिन असली खेल वापसी के दौरान शुरू हुआ. जब विमान तेहरान लौट रहा था, तभी इजरायली हमले का इनपुट मिला. आनन-फानन में पायलट को विमान की इमरजेंसी लैंडिंग ईरान के मशहद शहर में करनी पड़ी. इसके बाद पूरे डेलिगेशन को करीब 8 घंटे का सफर सड़क मार्ग से तय कर सुरक्षित तेहरान पहुंचाया गया.
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