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जमुई का मड़वा पहाड़ बना मनचलों का अड्डा! लड़कियों से छेड़छाड़ से लेकर गैंगरेप तक, अब जागी पुलिस

जमुई की घटना के बाद स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस प्रशासन को मडवा पहाड़ के पास होने वाली गतिविधियों की पूरी जानकारी रहती है. लेकिन फिर भी इस इलाके में पुलिस की गश्त नहीं रहती. 

जमुई में लड़कियों से छेड़छाड़ की लगातार घटनाएं हो रही है, लेकिन प्रशासन का इस पर ध्यान ही नहीं था.
  • जमुई की घटना के आरोपी हरेराम यादव और नंदन यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है
  • नंदन यादव ने पुलिस पर फायरिंग की थी, जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी, जबकि हरेराम यादव भी घायल बताया गया है
  • आरोपियों के सोशल मीडिया पर जातीय गानों के साथ बनाए गए वीडियो की पुलिस जांच कर रही है,

बिहार के जमुई में हुई घटना के मुख्य आरोपी पुलिस के गिरफ्त में हैं. एक आरोपी का पुलिस ने हाफ एनकाउंटर भी किया है. इस एनकाउंटर के बाद लोगों का गुस्सा कम हुआ है. लेकिन यह हाल के दिनों में हुई ऐसी इकलौती घटना नहीं है. मड़वा पहाड़ पर ही ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं. जमुई में ही जून में एक लड़की से रेप की कोशिश का वीडियो वायरल हुआ था. तब भी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस एक्शन में आई थी. इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि यह घटनाएं आम क्यों हैं? 

पहले जानते हैं कि इस मामले में अब तक क्या हुआ? 

पुलिस ने जमुई की घटना के दो आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया. इनके नाम हरेराम यादव और नंदन यादव हैं. नंदन यादव को पुलिस ने हाफ एनकाउंटर के दौरान पैर में गोली मारी, वह भागने की कोशिश कर रहा था. जब पुलिस उसके पास पहुंची तो आरोपी नंदन ने पुलिस पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी है. हरेराम यादव भी घायल है. इन दोनों आरोपियों का इलाज जमुई सदर अस्पताल में चल रहा है. पुलिस ने बताया कि जैसे ही इनकी हालत बेहतर होगी, इनसे पूछताछ की जाएगी. इससे पहले सोमवार को 3 नाबालिक आरोपियों को हिरासत में लिया गया था. 

सोशल मीडिया पर रंगबाजी वाले रील पोस्ट 

मंगलवार को गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने सोशल मीडिया पर कई रील भी पोस्ट किए थे. इनमें वे शराब पीते हुए, आर्केस्टा में डांसर के साथ डांस करते हुए, जातीय प्राइड के गानों के साथ वीडियो बनाते हुए दिख रहे हैं. पुलिस अब उन रील की भी जांच कर रही है, जिनमें वे शराब पीते दिख रहे हैं. पुलिस अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वीडियो कब का है और कहां बनाया गया. अगर इस बात की पुष्टि होती है कि वह वीडियो बिहार का है तो इन आरोपियों पर शराबबंदी कानून के उल्लंघन की धाराएं भी जोड़ी जाएंगी. 

19 सितम्बर जैसी घटना इकलौती और पहली नहीं

जमुई की जिस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया, वह इस इलाके की इकलौती घटना नहीं है. जिस मड़वा पहाड़ के पास यह घटना हुई, उसके ठीक सामने हमें मड़वा गांव के कुछ लोग मिले. उन्होंने हमें बताया कि इस पहाड़ के पास लड़के - लड़कियों को परेशान करने वाली घटनाएं आम हैं. 

मड़वा गांव के रहने वाले अमन बताते हैं, "मड़वा पहाड़ के पास आसपास के गांव के असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है. अभी 6 महीने पहले भी एक लड़के के साथ इन्हीं असामाजिक तत्वों ने मारपीट की थी. वह लड़का अपनी दोस्त के साथ पहाड़ पर घूमने आया था." 
मड़वा गांव के ही राजेंद्र कहते हैं, "हमें खुशी मिलती है कि यहां कोई घूमने आया लेकिन कुछ मनचले गांव को बदनाम करते हैं. पुलिस को सब पता है लेकिन वह कोई एक्शन नहीं लेती."

स्थानीय लोगों के मुताबिक मड़वा पहाड़ एक ऐसा स्पॉट है जहां आसपास से लोग आते हैं. अगर कोई लड़का किसी लड़की के साथ दिख जाता तो यह आरोपी उसे परेशान करते. ज्यादातर मामलों में पीड़ित बदनामी या घरवालों के डर से मामले को रिपोर्ट नहीं करवा पाते हैं और आरोपी इसी  का फायदा उठाते रहे. 

जून में भी वायरल हुआ था छेडखानी का वीडियो 

जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में जून में एक लड़की के साथ यौन हिंसा का वीडियो वायरल हुआ था. परिजनों के मुताबिक पीड़िता के गांव के ही दो युवक उसे जबरदस्ती ले गए, युवती को यौन हिंसा का शिकार बनाया और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया. इस मामले में  परिजनों ने गांव के ही सुमन मोदी, शुभम मोदी को आरोपी बनाया था. घटना 21 जून को हुई थी. इस घटना का पता वीडियो वायरल होने के बाद चला था. 23 जून को इस मामले में FIR दर्ज की गयी थी. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था. हालांकि अब सभी आरोपी जेल से बाहर हैं. 

पुलिसिया कार्रवाई पर उठ रहे हैं सवाल

स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस प्रशासन को मडवा पहाड़ के पास होने वाली गतिविधियों की पूरी जानकारी रहती है. लेकिन फिर भी इस इलाके में पुलिस की गश्त नहीं रहती.  सहरसा के विधायक और जमुई निवासी आईपी गुप्ता स्थानीय एसपी पर कई गम्भीर आरोप लगाते हैं. एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जून की घटना में मेरे हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई हुई थी. 

वरना पुलिस शिकायत ही नहीं ले रही थी. अगर पीड़ितों की शिकायत नहीं ली जाएगी तो उन्हें न्याय कैसे मिलेगा. वे कहते हैं, "जमुई की कानून व्यवस्था तभी सुधरेगी जब एसपी का तबादला होगा." हालांकि पुलिस अधीक्षक अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हैं. वे कहते हैं, "हमें जैसे ही घटना की सूचना मिलती है, हम एक्शन लेते हैं. लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने के लिए जरूरी प्रयास करते हैं."

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