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भारत की तरह US में भी वोटिंग मशीनों पर बवाल, ट्रंप चाहते हैं पेपर बैलेट तो विपक्ष मौजूदा व्यवस्था: रिपोर्ट

वोटिंग मशीनों को मतदान से बाहर रखने की योजना इतनी आगे बढ़ गई थी कि सितंबर में वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने इसे लागू करने के लिए आधार तलाशने शुरू कर दिए थे.

भारत की तरह US में भी वोटिंग मशीनों पर बवाल, ट्रंप चाहते हैं पेपर बैलेट तो विपक्ष मौजूदा व्यवस्था: रिपोर्ट
एआई जेनरेटेड इमेज.
  • ट्रंप के चुनाव सुरक्षा प्रमुख ने आधे से अधिक राज्यों में वोटिंग मशीनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी
  • वोटिंग मशीनों को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा मानते हुए उनके कंपोनेंट पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया था
  • ट्रंप प्रशासन ने राज्यों के चुनाव नियंत्रण पर अधिकार जमाने और चुनावी जिलों के पुनर्निर्धारण की योजना बनाई है

भारत और अमेरिका दोनों लोकतंत्र हैं. भारत सबसे बड़ा तो अमेरिका सबसे पुराना लोकतंत्र है. लोकतंत्र में जनता अपनी पसंद के व्यक्तियों को सत्ता पर बैठाती है. जनता की पसंद के लोगों को सत्ता में बैठाने के लिए चुनाव होता है. अब भारत की तरह अमेरिका में वोटिंग मशीनों को लेकर विवाद हो गया है. रायटर्स के दो सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव सुरक्षा प्रमुख ने पिछले साल आधे से अधिक अमेरिकी राज्यों में इस्तेमाल होने वाली वोटिंग मशीनों पर बैन लगाने की मांग की थी. उन्होंने कॉमर्स डिपार्टमेंट से यह पूछने का अनुरोध किया था कि क्या वह इन मशीनों के कंपोनेंट को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर सकता है?

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वोटिंग मशीन के खिलाफ क्या सुबूत मिला?

  • व्हाइट हाउस के सलाहकार कर्ट ओल्सन को ट्रंप ने चुनाव में धांधली की खारिज की जा चुकी साजिशों को साबित करने का जिम्मा सौंपा था. उन्होंने डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स (DOM) की मशीनों को हटाने की योजना को आगे बढ़ाया. सूत्रों के अनुसार, यह विचार तब सामने आया जब ओल्सन और अन्य अधिकारी इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे थे कि संघीय सरकार अमेरिकी राज्यों से चुनावों का नियंत्रण कैसे अपने हाथ में ले सकती है. यह विचार ट्रंप सार्वजनिक रूप से भी बोल चुके हैं.
  • सूत्रों के अनुसार, ओल्सन हाथ से गिने जाने वाले कागजी मतपत्रों (पेपर बैलेट्स) की एक राष्ट्रीय प्रणाली चाहते थे. ट्रंप की यह एक आम मांग है, जिसे कुछ चुनाव सुरक्षा विशेषज्ञ वर्तमान प्रणाली की तुलना में कम सटीक और संभावित रूप से अधिक जोखिम भरा मानते हैं. वर्तमान प्रणाली में ऑडिट योग्य पेपर ट्रेल वाली मशीनें शामिल हैं, जिनका उपयोग लगभग सभी शहर और राज्य करते हैं.
  • तीन अन्य सूत्रों ने बताया कि मशीनों को मतदान से बाहर रखने की योजना इतनी आगे बढ़ गई थी कि सितंबर में वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने इसे लागू करने के लिए आधार तलाशने शुरू कर दिए थे. हालांकि, अंततः यह योजना फेल हो गई, क्योंकि ओल्सन और उनके साथ काम करने वाले अन्य प्रशासनिक कर्मचारी इस कदम को उचित ठहराने के लिए सुबूत पेश करने में असफल रहे.

अमेरिका की खुफिया एजेंसियां भी कर रहीं काम 

  1. यह ट्रंप प्रशासन की तरफ से राज्य और स्थानीय सरकारों के चुनाव कराने के अधिकार पर अतिक्रमण करने का हिस्सा माना जा रहा है. राज्यों और स्थानीय सरकारों को यह अधिकार उन्हें अमेरिकी संविधान में कार्यपालिका को सत्ता हथियाने से रोकने के लिए दिया गया है. ओल्सन मतदान में धांधली के दावों की जांच के लिए देश की शीर्ष खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम कर रहे हैं.
  2. इस महीने की शुरुआत में रॉयटर्स की एक जांच में पता चला कि कम से कम आठ राज्यों से प्रशासनिक अधिकारियों और जांचकर्ताओं ने गोपनीय रिकॉर्ड मांगे हैं. साथ ही मतदान उपकरणों तक पहुंच के लिए दबाव डाला है और मतदाता धोखाधड़ी के उन मामलों की फिर से जांच की है, जिन्हें अदालतों और द्विदलीय समीक्षाओं ने खारिज कर दिया है. ट्रंप और उनके रिपब्लिकन सहयोगी नवंबर में होने वाले मध्यावधि कांग्रेस चुनावों में लाभ हासिल करने के लिए चुनावी जिलों को फिर से निर्धारित करने की योजनाओं पर भी काम कर रहे हैं.
  3. ओल्सेन को डेमोक्रेटिक सीनेटर उनके पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं. ओल्सन का उद्देश्य मध्यावधि चुनावों से पहले डोमिनियन की मतदान मशीनों को अमान्य घोषित करना था. मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले दो सूत्रों में से एक के अनुसार, विचार-विमर्श में शामिल अन्य लोगों में ट्रंप की खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड के वरिष्ठ सहयोगी पॉल मैकनामारा और ट्रंप के घरेलू नीति परिषद में कार्यरत विशेष सहायक ब्रायन सिकमा शामिल थे. ओल्सेन ने गैबार्ड के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ओडीएनआई) के साथ मिलकर काम किया है.
  4. दो सूत्रों ने बताया कि पिछले साल गर्मियों की शुरुआत में, मैकनामारा ने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों से डोमिनियन चिप्स और सॉफ्टवेयर को राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम घोषित करने की संभावना पर विचार करने का अनुरोध किया था. उस समय, मैकनामारा ओडीएनआई के एक टास्क फोर्स के प्रमुख थे. ये टास्क फोर्स देश की मतदान मशीनों में खामियों की जांच के लिए प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों के साथ काम कर रहा था. दो सूत्रों ने बताया कि मैकनामारा ने इस मुद्दे पर अमेरिकी वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की थी, जिसका नेतृत्व सचिव हॉवर्ड लटनिक करते हैं. 
  5. रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि लटनिक उन चर्चाओं में शामिल थे या उन्हें उनकी जानकारी थी. वाणिज्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि लटनिक ने मैकनामारा से कभी मुलाकात नहीं की और न ही चुनाव की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या लटनिक का कार्यालय या अन्य अधिकारी इसमें शामिल थे.ओल्सेन, मैकनामारा और सिकमा ने रायटर्स के इस मामले पर बात करने के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया.
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पेपर बैलेट अच्छा या वोटिंग मशीन

डेमोक्रेट्स और चुनाव की निष्पक्षता के विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन को हार का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन मतदान को दबाने और चुनाव धोखाधड़ी के और अधिक निराधार दावों के साथ हार को चुनौती देने का रास्ता बनाने का लक्ष्य रख रहा है.

अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका के 98% से अधिक चुनाव क्षेत्राधिकार पहले से ही प्रत्येक वोट का पेपर रिकॉर्ड तैयार करते हैं. ये वोट ज्यादातर उन मशीनों पर डाले जाते हैं, जो पेपर रिकॉर्ड प्रिंट करती हैं, या हाथ से चिह्नित किए जाते हैं लेकिन इलेक्ट्रॉनिक रीडर द्वारा गिने जाते हैं. इलेक्शन सिक्योरिटी एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी और पेपर बैलेट दोनों का एक-साथ समर्थन करते हैं. अभी यही अमेरिका में लागू है, जो चुनाव के बाद के ऑडिट के लिए मतदाता-सत्यापित प्रमाण प्रदान करता है.

वहीं हाथ से चिह्नित और हाथ से गिने जाने वाले मतपत्रों के समर्थकों का तर्क है कि इससे हैकिंग की आशंकाएं खत्म हो जाती हैं. लेकिन मिशिगन विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर एलेक्स हल्दरमैन ने कहा कि इससे गिनती में गलतियां और मतपेटियों में फर्जी वोट डलवाने जैसे अलग-अलग जोखिम पैदा होते हैं. उन्होंने कहा, "हाथ से गिनती करने से अव्यवस्था फैल जाएगी और इससे धोखाधड़ी को बढ़ावा मिल सकता है." भारत में भी फिलहाल वोटिंग मशीनों से वोटिंग होती है. यहां विपक्षी पार्टियां अक्सर पेपर बैलेट से वोटिंग की मांग करती हैं. साथ ही कई बार वोटिंग मशीनों पर आरोप लगाए जाते हैं.

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