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ट्रंप ने तुर्किए के राष्ट्रपति को बताया दोस्त, क्या नेतन्याहू की अर्दोआन को घेरने की रणनीति कमजोर पड़ रही है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए कहा- मेरे रहते तुर्किए-इजराइल टकराव नहीं होगा. क्या इस एक बयान ने इजराइल की रणनीति को झटका दिया है?

ट्रंप ने तुर्किए के राष्ट्रपति को बताया दोस्त, क्या नेतन्याहू की अर्दोआन को घेरने की रणनीति कमजोर पड़ रही है?
ट्रंप का अर्दोआन को बार-बार दोस्त कहना इजरायल के लिए क्या संदेश है?
AFP
  • ट्रंप ने अर्दोआन की तारीफ करते हुए कहा कि उनके रहते तुर्किए और इजरायल के बीच टकराव की संभावना नहीं है.
  • इस बयान को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अमेरिका अब भी तुर्किए को क्षेत्र की अहम ताकत मानता है.
  • इससे इजरायल की वो रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है जिसमें वो तुर्किए को अविश्वसनीय देश के तौर पर पेश करता रहा है.

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि क्या तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के इजरायल विरोधी बयानों से दोनों देशों के बीच टकराव हो सकता है? ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर इससे इनकार करते हुए अर्दोआन को अपना अच्छा दोस्त और मजबूत नेता बताया. ट्रंप ने कहा कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, उन्हें नहीं लगता कि ऐसा कोई टकराव होगा क्योंकि अर्दोआन उनका सम्मान करते हैं. ट्रंप का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ट्वीट के जरिए अर्दोआन पर हमला किया और यह भी कहा कि वो ईरान के प्रॉक्सी पर कार्रवाई जारी रखेंगे. साथ ही अर्दोआन की तरफ से भी लगातार नेतन्याहू पर हमले होते रहे हैं.

तो ट्रंप के इस ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका, तुर्किए को इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ताकत मानता है. यह बात इजरायल की उस कोशिश को भी झटका देती है जिसमें वह तुर्किए को अपने लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बताने की कोशिश करता रहा है.

Benjamin Netanyahu and Erdogan

Photo Credit: AFP

नेतन्याहू ने कहा क्या?

ट्रंप के अर्दोआन को मित्र बताने के आए बयान से ठीक एक दिन पहले नेतन्याहू ने ट्वीट कर अर्दोआन को यहूदी विरोधी तानाशाह बताया जो कुर्दों का नरसंहार कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अर्दोआन आतंकी संगठन हमास का समर्थन करते हैं और अपने ही लोगों को जेल में डालते हैं, जो उनका विरोध करते हैं. अपने इस पोस्ट में नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया कि वो ईरान और उसकी प्रॉक्सी (हिज्जबुल्लाह और अन्य) संगठनों पर हमले जारी रखेंगे.

इजरायल क्या चाहता है?

पिछले कुछ वर्षों में इजरायल की कोशिश रही कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के सामने तुर्किए को एक मुश्किल और अविश्वसनीय देश के तौर पर पेश किया जाए. इजरायल को उम्मीद थी कि समय के साथ ईरान कमजोर होगा, गाजा पर उसका नियंत्रण मजबूत होगा और सीरिया भी उसकी शर्तें मान लेगा. ऐसे माहौल में तुर्किए क्षेत्र में अकेला पड़ सकता था. लेकिन हालात इजरायल की उम्मीदों के मुताबिक नहीं चले.

हालांकि इजरायल, ग्रीस, साइप्रस और अमेरिका मिलकर ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं. रक्षा और अन्य रणनीतियों से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं. तुर्किए का मानना है कि इन पहलों का एक मकसद उसे क्षेत्रीय राजनीति में सीमित करना भी हो सकता है. ऐसे में तुर्किए ने टकराव की बजाय आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग का रास्ता चुना है.

Erdogan

तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन
Photo Credit: AFP

तुर्किए ने क्या रास्ता चुना?

तुर्किए ने सऊदी अरब के साथ मिलकर ऐसे व्यापारिक और परिवहन मार्ग विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिनसे खाड़ी क्षेत्र का तेल और सामान उसके बंदरगाहों और रेल नेटवर्क के जरिए दुनिया तक पहुंच सके. तुर्किए का कहना है कि इस क्षेत्र को संघर्ष नहीं बल्कि विकास और सहयोग की जरूरत है.

हाल ही में अर्दोआन ने कहा कि तुर्किए की सुरक्षा सिर्फ उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि सीरिया और लेबनान जैसे पड़ोसी इलाकों से भी जुड़ी हुई है. इजरायल लेबनान में स्थित हिज्जबुल्लाह के ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है. ऐसे में तुर्किए का कहना है कि इजरायल की नीतियां पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं, और इस खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन ट्रंप के 'दोस्त' वाले बयान ने फिलहाल किसी की टकराव की आशंका को शांत किया है.

Erdogan and Trump

ट्रंप के साथ अर्दोआन
Photo Credit: AFP

क्या अमेरिका-तुर्किए के रिश्ते बदल रहे हैं?

साल 2000 में अमेरिका ने रूस में बने मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती को लेकर नेटो के सहयोगी देश तुर्की पर प्रतिबंध लगाया था. लेकिन जब बीते वर्ष सितंबर में ट्रंप ने अर्दोआन से मुलाकात की थी, तब दोनों के बीच काफी गर्मजोशी देखी गई थी.

तुर्किए ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिशों में भी भूमिका निभाई. इसी दौरान अमेरिका में इजरायल को लेकर कुछ आलोचनात्मक आवाजें भी सुनाई देने लगीं.

तुर्किए का दावा है कि वह एक ऐसी विदेश नीति अपनाता है जिसमें वह सभी पक्षों से बातें कर सकता है. वह नेटो का सदस्य भी है, रूस से भी संवाद रखता है, ईरान से भी बातचीत करता है और खाड़ी देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रहा है.

Erdogan and Trump

Photo Credit: AFP

ट्रंप पहले भी कर चुके हैं अर्दोआन की तारीफ

पिछले वर्ष दिसंबर में ग्रीस, साइप्रस और इजरायल के सम्मेलन में नेतन्याहू ने तुर्किए को चेतावनी देते हुए कहा था कि वो ऑटोमन साम्राज्य के समय जैसी महत्वाकांक्षा को भूल जाएं.

1914 से पहले ऑटोमन साम्राज्य का मध्य-पूर्व और यूरोप के बड़े हिस्से पर 600 साल तक नियंत्रण था. ओटोमन साम्राज्य इतिहास के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक चलने वाले साम्राज्यों में से एक था. 

अर्दोआन के बारे में कहा जाता है कि वो तुर्किए को ऑटोमन साम्राज्य वाली ताकत दिलाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं.

लेकिन ट्रंप ने नेतन्याहू की तुर्किए को इस चेतावनी के बावजूद उनके सामने ही अर्दोआन की तारीफ शुरू कर दी थी. यानी उन्हें ये फर्क नहीं पड़ता कि तुर्की और इजरायल के आपसी संबंध कैसे हैं.

ट्रंप ने बीते साल दिसंबर में नेतन्याहू के साथ उसी जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्दोआन की तारीफ करते हुए उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया था, और बोले कि वे जानते हैं कि नेतन्याहू और अर्दोआन के बीच कोई परेशानी नहीं होगी.

तुर्किए को घेरने की रणनीति कमजोर पड़ रही है? 

दरअसल बीते कुछ सालों से दौरान तुर्किए और इजरायल के बीच रिश्ते सामान्य होने लगे थे लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच जुबानी जंग चल रही है. खासकर यह अक्तूबर 2023 में हमास के इजरायल के किए गए हमले के बाद से बढ़े हैं.

तीखी बयानबाजी और कड़े आरोपों के बीच रिश्ते सामान्य करने की प्रक्रिया थम गई और तुर्किए ने इजरायल के साथ व्यापार बंद करने का एलान भी कर दिया है.

31 मई 2010 को तुर्की के टीवी चैनल से ली गई एक तस्वीर में इजरायली सेना की एक नाव को तुर्किए की सहायता वाली नाव 'मावी मरमारा' के पास जाते हुए दिखाया गया है. यह नाव गाजा के लिए सहायता सामग्री ले जा रही थी.इजरायली नौसेना की कार्रवाई में कम से कम 15 लोग मारे गए, मरने वालों में अधिकांश तुर्किए के नागरिक थे.
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जानकार कहते हैं कि दोनों देशों के आपसी संबंध 2010 से 2016 के दरम्यान हुए मावी मरमारा संकट के बाद से अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. 31 मई 2010 को गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे तुर्किए के जहाज मावी मरमारा पर इजरायली सेना ने घातक हमले किए थे. इससे तुर्किए-इजरायल संबंधों में भारी तनाव उभर आया था.

मावी मरमारा पर की गई इजरायली कार्रवाई का तुर्किए में जबरदस्त विरोध हुआ. एक साल बाद भी जब इस घटना की बरसी मनाई गई तो बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ा.
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इजरायल पहले से ही तुर्किए को क्षेत्रीय खतरे के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है, पर ट्रंप के लगातार तुर्किए के राष्ट्रपति अर्दोआन को दोस्त बताने से फिलहाल उसकी यह रणनीति सफल होती नहीं दिख रही है.

ट्रंप का बार-बार अर्दोआन के पक्ष में दिया गया बयान यह संकेत भी दे रहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र की एक अहम ताकत और जरूरी साझेदार के रूप में उन्हे देखता है. दूसरी तरफ रेचेप तय्यैप अर्दोआन यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मध्य पूर्व का भविष्य आपसी टकराव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक साझेदारी से तय होना चाहिए.

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