- अमेरिका में हत्यारे मेजर निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा दी जाएगी, जो लाइवस्ट्रीम होगी
- यह पहली बार होगा जब आधुनिक अमेरिकी इतिहास में सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी जाएगी, जो लगभग 90 साल बाद है
- निदाल हसन ने 2009 में फोर्ट हुड में 13 लोगों की हत्या की थी, जिसमें 12 मृतक सैनिक थे
अमेरिका में वह होने जा रहा है जो आधुनिक इतिहास में कभी नहीं हुआ. 2009 में फोर्ट हुड में हुई गोलीबारी में 13 सैनिकों की जान लेने वाले दोषी आर्मी अफसर निदाल हसन को दुनिया के सामने मौत की सजा दी जाएगा, उसे टीवी पर दिखाया जाएगा. यह तरीका अमेरिका में लगभग एक सदी पहले बंद हो गया था और अब यह ईरान, नॉर्थ कोरिया और अफगानिस्तान में तालिबान सरकार जैसे कुछ ही देशों में अपनाया जाता है.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक बयान में कहा कि 3 दिसंबर को निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड गोली मारेगी और इस मिलिट्री एग्जीक्यूशन को लाइवस्ट्रीम भी किया जाएगा. खास बात है कि इस तरह सजा ए मौत के लाइव टेलीकास्ट का कोई खास उदाहरण नहीं मिलता और यह अक्सर इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी मिलिटेंट ग्रुप्स से जुड़ा होता है.
बता दें कि मेजर निदाल मलिक हसन ने टेक्सास के फोर्ट हुड में अपनी पर्सनल हैंडगन से 13 लोगों की जान ले ली थी और 32 अन्य को घायल कर दिया था. मरने वालों में से 12 सैनिक थे. यह हमला अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हुई सबसे घातक गोलीबारी थी और इसने अमेरिकी सेना को हिलाकर रख दिया था.
90 साल पहले सरेआम अमेरिका में दी गई थी मौत की सजा
दुनिया में बहुत कम देश हैं जहां सबके सामने मौत की सजा दी जाती है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कुछ ऐसे मामलों का जिक्र किया है जिनमें ईरान और सऊदी अरब में सबके सामने दी गई फांसी को आस-पास मौजूद लोगों ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया था. मौत की सजा मिलने की घटना को फिल्माना और उसे ब्रॉडकास्ट करना इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी समूहों में अधिक प्रचलित है. यह समूह उन कैदियों की क्रूर हत्याओं के वीडियो के लिए कुख्यात हो गए थे जिन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करने सजा नहीं दी गई थी या जिन्हें किसी अपराध के लिए दोषी ही नहीं ठहराया गया था.
अगस्त 1936 में रेनी बेथिया नाम के एक युवा अश्वेत व्यक्ति को फांसी दी गई थी, जिसे एक बुजुर्ग श्वेत महिला के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था. इस घटना को देखने के लिए लगभग 20,000 लोग जमा हुए थे.
फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा कैसे देते हैं?
फायरिंग स्क्वाड से सजा-ए-मौत देने के लिए, कैदी को कुर्सी पर चमड़े की पट्टियों से कमर और सिर के पास बांधा जाता है. कैदी के सिर पर एक काला हुड पहनाया जाता है. एक डॉक्टर स्टेथोस्कोप से कैदी के दिल की जगह का पता लगाता है और उसके ऊपर गोल सफेद कपड़े का निशाना लगाता है. 20 फीट दूर एक घेरे में खड़े पांच निशानेबाजों के पास .30 कैलिबर की राइफलें होती हैं जिनमें एक-एक गोली भरी होती है. निशानेबाजों में से एक को खाली कारतूस (ब्लैंक राउंड) दिए जाते हैं. किसी को पता नहीं होता कि किसके राइफल खाली है. खाली कारतूस इसलिए ताकि स्क्वाड का हर सदस्य यह मान सकता है कि हो सकता है कि कैदी की जान लेने वाली गोली उसने न चलाई हो. 1976 के बाद से अबतक अमेरिका में 6 लोगों को इस तरीके से मौत की सजा दी गई है.
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