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फांसी नहीं इन 4 तरीकों से अमेरिका में मिलती है सजा-ए-मौत, गोली मारते एक जल्लाद की राइफल क्यों रहती है खाली?

अमेरिका में हर साल बड़े तादाद में अपराधियों को मौत की सजा दी जाती है. साल 2025 में अमेरिका में 47 लोगों को मौत की सजा दी गई. यह 2009 के बाद किसी भी साल के मुकाबले ज्यादा है. यहां जानिए अमेरिका में किन किन तरीकों से मौत की सजा दी जाती है.

फांसी नहीं इन 4 तरीकों से अमेरिका में मिलती है सजा-ए-मौत, गोली मारते एक जल्लाद की राइफल क्यों रहती है खाली?
US Methods of Execution: अमेरिका में सजा-ए-मौत कैसे दी जाती है
  • अमेरिका में मौत की सजा के लिए मुख्य तौर पर जहरीला इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है, जो अधिक मानवीय माना जाता है
  • फांसी पर लटकाने की सजा अमेरिका में अब प्रचलित नहीं है, इसे क्रूर और असामान्य सजा माना गया है
  • अमेरिका में इलेक्ट्रिक चेयर और गैस चेंबर जैसी विधियां भी मौत की सजा के लिए इस्तेमाल होती हैं लेकिन कम प्रचलित

अमेरिका में खूंखार अपराधों के लिए मिलने वालीं मौत की सजाएं फिर 2 वजहों से सुर्खियों में हैं. पहली वजह है कि क्रिस्टा पाइक नाम की एक अमेरिकी महिला, जिसे मौत की सजा सुनाई गई है, वह हाल ही में जहर वाला इंजेक्शन लगाए जाने के बावजूद बच गई और अब उसकी हालत बुरी हो रही है. दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के साइकेट्रिस्ट निदाल हसन को गोली मारकर (फायरिंग स्क्वाड) मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है. हसन ने 2009 में एक मिलिट्री बेस पर 13 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

ऐसे में आपके दिल में भी यह सवाल आ सकता है कि आखिर अमेरिका में किन तरीकों से मौत की सजा दी जाती है? क्या वहां दोषी करार दिए गए अपराधियों को फांसी पर लटकाकर मौत के घाट नहीं उतारा जाता? चलिए आपको इन तरीकों के बारे में बताते हैं.

काम की बात- साल 2025 में अमेरिका में 47 लोगों को मौत की सजा दी गई. यह 2009 के बाद किसी भी साल के मुकाबले ज़्यादा है. हालांकि 1999 में हुई 98 लोगों की मौत की सजा के सबसे ऊंचे आंकड़े से यह अभी भी कम है. फिर भी, टेक्नोलॉजी के विकास और मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों पर नए तरीकों के इस्तेमाल के बावजूद, अधिकारी मौत की सजा देने की प्रक्रिया में गड़बड़ियां करते रहते हैं.

फांसी पर लटाकना 

फांसी पर लटकाना आज दुनिया भर में मौत की सजा देना का सबसे कॉमन तरीका माना जाता है लेकिन अमेरिका में नहीं. 1890 के दशक तक अमेरिका में भी फांसी देना ही सजा-ए-मौत का मुख्य तरीका था. लेकिन अब अमेरिका ने इसे छोड़ ही दिया है. इसे इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि इसे क्रूर और असामान्य सजा माना जाता था. इसमें प्रक्रिया के गलत होने का बहुत ज्यादा जोखिम भी था, और इसकी जगह ज्यादा "मानवीय" माने जाने वाले दूसरे तरीके अपनाए गए. अमेरिका में आखिरी बार फांसी 25 जनवरी 1996 को डेलावेयर में दी गई थी.

19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी में, अमेरिका के राज्यों ने मौत की सजा के लिए ऐसे तरीकों की तलाश की जो मेडिकल प्रक्रिया जैसे लगें. बिजली का झटका देने (जो 1890 के दशक में शुरू हुआ) और बाद में जानलेवा इंजेक्शन लगाने के तरीकों को इसलिए अपनाया गया क्योंकि ये ज्यादा व्यवस्थित, साफ-सुथरे और वैज्ञानिक रूप से कंट्रोल्ड लगते थे.

घातक इंजेक्शन

अमेरिका में आज के वक्त अधिकतर मौत की सजा जहरीला इंजेक्शन देकर ही दी जाती है. 1976 के बाद से अबतक अमेरिका में 1492 अपराधियों को इस तरीके से मौत की सजा मिली है. 1977 में, ओक्लाहोमा मौत की सजा देने के लिए 'लीथल इंजेक्शन' (जानलेवा इंजेक्शन) का तरीका अपनाने वाला अमेरिका का पहला राज्य बना. वैसे यह तरीका भी इतना सिंपल नहीं है. टेक्सास में 7 दिसंबर 1982 को चार्ल्स ब्रूक्स को इस तरीके से मौत की सजा दिए जाने में पांच और साल लग गए थे. अब क्रिस्टा पाइक काम ताजा मामला देख लीजिए. 50 साल की पाइक को पिछले हफ्ते बुधवार को लंबे इंतजार के बाद मौत की सजा दी जानी थी. लेकिन जहरीला इंजेक्शन के रूप में पेंटोबार्बिटल दवा की दो घातक खुराक दिए जाने के बावजूद वह बच गईं और फिलहाल गंभीर हालत में हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. 

लिथल इंजेक्शन रूम का व्यू (फोटो- एएफपी)

लिथल इंजेक्शन रूम का व्यू (फोटो- एएफपी)

आज, अमेरिका के जिन भी राज्यों में मौत की सजा का प्रावधान है, वे सभी इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं. इसे ही प्रॉयरिटी दी जाती है.

फायरिंग स्क्वाड

फायरिंग स्क्वाड से सजा-ए-मौत देने के लिए, कैदी को कुर्सी पर चमड़े की पट्टियों से कमर और सिर के पास बांधा जाता है. कैदी के सिर पर एक काला हुड पहनाया जाता है. एक डॉक्टर स्टेथोस्कोप से कैदी के दिल की जगह का पता लगाता है और उसके ऊपर गोल सफेद कपड़े का निशाना लगाता है. 20 फीट दूर एक घेरे में खड़े पांच निशानेबाजों के पास .30 कैलिबर की राइफलें होती हैं जिनमें एक-एक गोली भरी होती है. निशानेबाजों में से एक को खाली कारतूस (ब्लैंक राउंड) दिए जाते हैं. किसी को पता नहीं होता कि किसके राइफल खाली है. खाली कारतूस इसलिए ताकि स्क्वाड का हर सदस्य यह मान सकता है कि हो सकता है कि कैदी की जान लेने वाली गोली उसने न चलाई हो. 1976 के बाद से अबतक अमेरिका में 6 लोगों को इस तरीके से मौत की सजा दी गई है.

इस पेटिंग के जरिए आप फायरिंग स्कॉड को समझ सकते हैं (प्रतिकात्मक फोटो)

इस पेटिंग के जरिए आप फायरिंग स्कॉड को समझ सकते हैं (प्रतिकात्मक फोटो)

ट्रंप ने निदाल हसन के मामले में इसी की मंजूरी दी है. हसन को 2013 में फोर्ट हुड में अल-कायदा से प्रेरित होकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने के लिए एक मिलिट्री जूरी ने मौत की सजा सुनाई थी. 

इलेक्ट्रिक चेयर पर बैठाकर बिजली के झटके

फांसी देने के बजाय मौत की सजा देने का ज्यादा मानवीय तरीका खोजने के लिए, न्यूयॉर्क ने 1888 में पहली इलेक्ट्रिक चेयर बनाई और 1890 में विलियम केमलर को मौत की सजा दी. जल्द ही, अमेरिका के दूसरे राज्यों ने भी मौत की सजा देने का यह तरीका अपना लिया. आज, किसी भी राज्य में मौत की सजा देने के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. हालांकि कुछ राज्य इसे तब भी इस्तेमाल करते हैं जब कैदी इसे चुनता है या जब जानलेवा इंजेक्शन नहीं दिया जा सकता.

ऐसी ही कुर्सी पर बैठाकर बिजली के झटके दिए जाते हैं (फोटो- deathpenaltyinfo.org)

ऐसी ही कुर्सी पर बैठाकर बिजली के झटके दिए जाते हैं (फोटो- deathpenaltyinfo.org)

इसमें 500 से 2000 वोल्ट का झटका दिया जाता है, जो लगभग 30 सेकंड तक रहता है. करंट फिर बंद कर दिया जाता है. डॉक्टर शरीर के शांत होने का कुछ सेकंड इंतजार करते हैं और फिर देखते हैं कि कैदी का दिल अभी भी धड़क रहा है या नहीं. अगर धड़क रहा होता है, तो एक और झटका दिया जाता है. यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कैदी की मौत न हो जाए.

गैस चेंबर

1924 में, अमेरिका के नेवादा राज्य ने कैदियों को मौत की सजा देने का ज्यादा मानवीय तरीका अपनाया और साइनाइड गैस का इस्तेमाल शुरू किया. जी जॉन वह पहले व्यक्ति थे जिन्हें जहरीली गैस से मौत की सजा दी गई थी. अमेरिका में गैस चैंबर का आखिरी बार इस्तेमाल 1999 में हुआ था.

मौत की सजा देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गैस चैंबर का व्यू (फोटो- एएफपी)

मौत की सजा देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गैस चैंबर का व्यू (फोटो- एएफपी)

आज 11 राज्यों में मौत की सजा देने के लिए जहरीली गैस का इस्तेमाल करने की मंजूरी है, लेकिन सभी राज्यों में मुख्य तरीका जहरीला इंजेक्शन ही है.

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