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अगर मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोकता, तो इजरायल का वजूद नहीं होता: डोनाल्ड ट्रंप

यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के अस्तित्व में बने रहने का क्रेडिट खुद को दिया है. फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "सच कहूं तो, अगर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति न होता, तो आज इजरायल का वजूद ही नहीं होता."

अगर मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोकता, तो इजरायल का वजूद नहीं होता: डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने इजरायल को लेकर बड़ा दावा किया है.
AFP

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि इजरायल और मिडिल ईस्ट का अस्तित्व उन्हीं की वजह से बचा हुआ है. अपने डींग मारने वाले अंदाज में ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो इजरायल और पूरा मिडिल ईस्ट आज मौजूद ही नहीं होते. यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब अमेरिका द्वारा ईरान पर फिर से हमला करने की चर्चा जोरों पर है. डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "अगर मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो इजरायल और पूरा मध्य पूर्व आज मौजूद ही नहीं होता. कोई यह बात कहना नहीं चाहता, लेकिन सब जानते हैं कि यह सच है."

यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने इजरायल के अस्तित्व में बने रहने का श्रेय खुद को दिया है. 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "सच कहूं तो, अगर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं होता, तो आज इजरायल का वजूद ही नहीं होता."

इजरायल को US नहीं देगा सैन्य सहायता!

जून में ओवल ऑफिस में बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो न तो इजरायल बचता और न ही मध्य पूर्व.

यह बयान इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता नीति में एक बड़े बदलाव के कुछ दिनों बाद आया है. 2018 में शुरू हुए 10 साल के एक समझौते के तहत, अमेरिका हर साल इजरायल को 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता देता है. ट्रंप ने ऐलान किया है कि इस साल यह सहायता बंद कर दी जाएगी, क्योंकि इजरायल को इसकी जरूरत नहीं है.

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इसका मतलब सैन्य सहायता है या नकद राशि, तो उन्होंने कहा, "आप इसे जैसे चाहें परिभाषित कर सकते हैं." इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इजरायल जो चाहे खरीद सकता है.

ट्रंप के ये बयान मिडटर्म इलेक्शन के बाद आए हैं, जिनमें डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों में जीत हासिल की है.

मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ट्रंप की स्पीच के दौरान, एक रिपोर्टर ने उनसे उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पूछा, जिसमें वेंस ने कहा था कि रिपब्लिकनों को इतनी बुरी हार इसलिए मिली क्योंकि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी. इससे जुड़े सवाल पर कहा, "मुझे लगता है कि यह काफी हद तक सच है." हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पीछे जाने का मौका मिले, तो भी वे कुछ अलग नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार कहा है कि ईरान पर हमला करने का मुख्य कारण परमाणु हथियार थे. 1 नवंबर को आयोवा में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा, "मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका." अपने फैसले के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "मैंने कहा था, 'चलो मिडिल ईस्ट की तरफ चलते हैं, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दे सकते.'"

क्या अमेरिका फिर से ईरान पर हमला करेगा?

पिछले 3 दिनों में, ईरान पर हमले फिर से शुरू करने को लेकर ट्रंप ने कई बार अपना रुख बदला है. मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले, जब उनसे पूछा गया कि क्या वोटिंग के बाद भी वे हमले जारी रखने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ तौर पर 'नहीं' में जवाब दिया. मंगलवार को उन्होंने 'फाइनेंशियल टाइम्स' से बात करते हुए कहा- फिलहाल उनकी नए हमले करने की कोई योजना नहीं है, हालांकि अमेरिकी सेनाएं तैयार हैं.

गुरुवार को, जब ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह देश काफी हद तक बर्बाद हो चुका है और आपको जल्द ही पता चल जाएगा.

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