- अमेरिका ने Anthropic के AI मॉडल Fable 5 और Mythos 5 को दूसरे देशों के लिए बैन कर दिया है
- यूरोप का डर है कि अगर अमेरिका चाहे, तो क्या वह अपने सहयोगी देशों का AI स्विच भी कभी बंद कर सकता है
- अमेरिका का यह फैसला फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में छाया, जहां तीसरे दिन AI के भविष्य पर चर्चा हो रही थी
आप कल्पना कीजिए कि किसी देश की सरकार एक आदेश जारी करे और अगले ही कुछ घंटों में दुनिया के बाकि देशों के वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंपनियां सबसे एडवांस AI टेक्नोलॉजी से कट जाएं. न कोई चेतावनी, न कोई मोहलत... बस एक फैसला और AI टेक तक पहुंच खत्म. यूरोप सालों से इसी डर को अमेरिका के हाथ में मौजूद 'AI किल स्विच' कहता रहा है. उसे चिंता थी कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली AI टेक्नोलॉजीज पर अंतिम कंट्रोल वॉशिंगटन के पास है. अबतक तो इस डर को केवल एक थ्योरी माना जाता था, लेकिन पिछले हफ्ते कुछ ऐसा हुआ जिसने यूरोप की चिंता को हकीकत में बदल दिया.
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने AI कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के सबसे ताकतवर मॉडल Fable 5 और Mythos 5 तक गैर-अमेरिकियों की पहुंच बंद कर दी. यानी दूसरे देशों के लिए इसे बैन कर दिया. यहां तक कह दिया कि खुद एंथ्रोपिक कंपनी के अपने विदेशी कर्मचारी भी इन मॉडलों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.
अमेरिका ने क्या किया है?
अमेरिका ने शुक्रवार को नए निर्यात को कंट्रोल करने वाले नियम लागू किए. इसके तहत किसी भी विदेशी नागरिक को Anthropic के सबसे एडवांस माने जाने वाले AI मॉडल Fable 5 और Mythos 5 तक पहुंच नहीं दी जा सकती. नियम लागू होते ही Anthropic को इन मॉडलों की पहुंच अचानक बंद करनी पड़ी. अमेरिका ने अपने फैसले के पीछे कारण राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये AI मॉडल साइबर कमजोरियों को खोजने और उनका फायदा उठाने में बेहद सक्षम हैं. अमेरिका का कहना है कि गलत हाथों में पड़ने पर ये शक्तिशाली हैकिंग टूल बन सकते हैं.
यूरोप का डर
यूरोप के लिए यह सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं था. उसके लिए यह एक चेतावनी थी. यूरोपीय नेताओं को एहसास हुआ कि दुनिया की सबसे एडवांस AI टेक तक उनकी पहुंच पूरी तरह अमेरिका के फैसलों पर निर्भर है. अगर अमेरिका चाहे तो वह किसी भी समय यह पहुंच रोक सकता है. यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय आयोग के टेक संप्रभुता प्रवक्ता थॉमस रेग्नियर ने कहा कि यूरोप अमेरिका का भरोसेमंद पार्टनर है, माना कि इन जोखिमों से निपटना जरूरी है, लेकिन भरोसेमंद साथियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए.
अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय आया जब यूरोपियन यूनियन अमेरिका के Pax Silica गठबंधन में शामिल होने की तैयारी कर रहा था. यह गठबंधन AI चिप्स और महत्वपूर्ण खनिजों (रेयर अर्थ मेटल्स) की ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए बनाया जा रहा है. ऐसे समय पर लगी पाबंदियों ने यूरोप में नाराजगी और बढ़ा दी. इस पूरे विवाद की छाया G7 की AI चर्चा पर पड़ी. सम्मेलन में Anthropic के CEO डारियो अमोदेई मौजूद थे. यूरोपीय देशों को अपनी चिंताएं सीधे उनके सामने रखने का मौका मिला.
ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिकी AI को दुनिया का 'गोल्ड स्टैंडर्ड' बनाना चाहता है और चाहता है कि उसके सहयोगी अमेरिकी तकनीक पर ही निर्माण करें. लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस घटना ने एक अलग मैसेज दिया है- अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वह दोस्त और दुश्मन, दोनों को अपनी पसंद की टेक्नोलॉजी से रातों-रात बाहर कर सकता है.
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