इन दिनों जितनी भी कारें लॉन्च हो रही हैं, चाहे वो मर्सिडीज़-बेंज की हों या फिर महिंद्रा की, अब ये सभी कारें सिर्फ परिवहन का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि पहियों पर चलती-फिरती कंप्यूटर बन चुकी हैं. डिजिटल डैशबोर्ड, 5G कनेक्टिविटी, ऑटोमैटिक ड्राइविंग और एआई (AI) फीचर्स की बढ़ती मांग के कारण ऑटोमोबाइल कंपनियों को स्मार्टफोन जितने ही शक्तिशाली प्रोसेसर की जरूरत है.
यही वजह है कि BMW, Mercedes-Benz जैसी लग्जरी कार कंपनियों के अलावा भारत की Mahindra और Tata Motors जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी कारों में Qualcomm Snapdragon प्रोसेसर का इस्तेमाल कर रही हैं. हालांकि, MediaTek प्रोसेसर का भी इस्तेमाल होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल बजट कारों में या कुछ चाइनीज, जापानी और कोरियन कंपनियां ही अपनी गाड़ियों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर रही हैं. स्नैपड्रैगन ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की पहली पसंद क्यों बन रहा है, आइए जानते हैं.
Snapdragon Digital Chassis
Qualcomm कार कंपनियों को सिर्फ एक चिप नहीं बेचता, बल्कि वह एक पूरा प्लेटफॉर्म देता है जिसे 'डिजिटल चेसिस' कहा जाता है. इसमें चार मुख्य हिस्से होते है. इसमें स्नैपड्रैगन कॉकपिट, स्नैपड्रैगन राइड, ऑटो कनेक्टिविटी और कार-टू-क्लाउड शामिल हैं.
स्नैपड्रैगन कॉकपिट (Snapdragon Cockpit): यह कार के अंदर की बड़ी 3D स्क्रीन्स, पैसेंजर डिस्प्ले, वॉयस असिस्टेंस और म्यूजिक सिस्टम को संभालता है.
स्नैपड्रैगन राइड (Snapdragon Ride): यह ऑटोमैटिक ड्राइविंग (ADAS), ऑटो-पार्किंग और सुरक्षा से जुड़े AI फैसलों को कंट्रोल करता है.
ऑटो कनेक्टिविटी: ये कार में 5G, वाई-फाई और जीपीएस जैसी कनेक्टिविटी को बेहद सुचारू बनाता है.
कार-टू-क्लाउड: इसके जरिए कंपनियां कार को घर बैठे सॉफ्टवेयर अपडेट (OTA Updates) दे सकती हैं.
कम बिजली में दमदार परफॉर्मेंस
इलेक्ट्रिक वाहनों के इस दौर में बैटरी बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. कारों में लगे प्रोसेसर को बिना पंखे के ठंडा रहना पड़ता है और वे ज्यादा बिजली भी नहीं खा सकते. स्नैपड्रैगन को स्मार्टफोन की तकनीक से डेवलप किया गया है, इसलिए यह बहुत कम इलेक्ट्रिसिटी लेकर भी भारी-भरकम काम आसानी से कर लेता है, जिससे इलेक्ट्रिक कारों की रेंज पर बुरा असर नहीं पड़ता है.
इन-बिल्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कैमरा सपोर्ट
महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों की आधुनिक कारों में दर्जनों कैमरे, रडार और सेंसर्स लगे होते हैं. स्नैपड्रैगन चिप्स में एक खास न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (NPU) होती है. यह कार के आसपास की चीजों, जैसे- लेन बदलना, सड़क पर आए पैदल यात्री या ड्राइवर को नींद आने की स्थिति को बिना इंटरनेट (लोकल एआई के जरिए) पलक झपकते ही पहचान लेती है.
तारों का जंजाल और खर्च कम होना
पहले की कारों में हर छोटे काम के लिए एक अलग चिप या इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) लगानी पड़ती थी (जैसे- रेडियो के लिए अलग, मीटर के लिए अलग). स्नैपड्रैगन के आने से कंपनियां कई अलग-अलग सिस्टम्स को एक ही शक्तिशाली चिप पर चला पा रही हैं. इससे कार के अंदर तारों का जंजाल कम हुआ है, गाड़ी का वजन घटा है और कंपनियों की निर्माण लागत भी कम हुई है.
भविष्य के लिए तैयार
कार कंपनियां अब गाड़ियां बेचने के बाद भी उनमें नए फीचर्स जोड़ना चाहती हैं. स्नैपड्रैगन प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कार खरीदने के कई सालों बाद भी इंटरनेट के जरिए इसमें नए फीचर्स, बेहतर ऑटोपायलट सिस्टम या नए सुरक्षा अपडेट्स शामिल किए जा सकते हैं.
Snapdragon को MediaTek से मिल रही कड़ी टक्कर
मीडियाटेक ने भी कारों के लिए 'Dimensity Auto' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है और यह मुख्य रूप से बजट या चाइनीज कारों में इस्तेमाल होता है. लेकिन ग्लोबल स्तर पर क्वालकॉम का दबदबा काफी ज्यादा देखने को मिल रहा है.
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