विज्ञापन

ट्रंप की सबसे बड़ी परेशानी तो अब शुरू होगी! आगे की बातचीत में ईरान 5 वजहों से हावी होगा

US Iran Talks in Islamabad: अमेरिका और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पता है कि 40 दिन के बाद मिडिल ईस्ट की सच्चाई बदल गई है. इस जंग ने ही ईरान को उसका सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र दे दिया है.

US Iran Talks in Islamabad: इस्लामाबाद में होगी अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता

US Iran Talks in Islamabad: 40 दिन की जंग के बाद अमेरिका और ईरान की जंग 2 हफ्ते के लिए रुकी है. अब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में शुक्रवार से वार्ता करने बैठेंगे. वार्ता में एक फाइलन डील करने की कोशिश की जाएगी ताकि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म किया जा सके. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने नंबर-2 यानी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में टीम भेज रहे हैं. हालांकि इस वार्ता के दौरान ईरान के हाथ में एक दो नहीं 5 तुरुप के इक्के होंगे जिसके दम पर वह फाइनल डील में हावी होना चाहेगा. चलिए जानते हैं.

1- होर्मुज  

अमेरिका और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पता है कि 40 दिन के बाद मिडिल ईस्ट की सच्चाई बदल गई है. जो तुरुप का इक्का जंग से पहले ईरान के हाथ में था  ही नहीं, अब वो उसी के दम पर अपनी ताकत दिखा रहा है- होर्मुज जलडमरूमध्य. जंग से पहले तक तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का यह रास्ता पूरी तरह खुला था लेकिन जंग में इसकी नाकेबंदी करके ईरान को अपनी ताकत पता चल गई. इसकी दम पर ईरान अपनी बात मनवा सकता है. ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी में है. अमेरिका ने मानो उसे कमाई का एक नया जरिया दे दिया है. अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल होर्मुज को लेकर ईरान की शर्तों पर गुस्सा दिखा सकता है और बातचीत छोड़ने की धमकी भी दे सकता है. लेकिन उसे यह भी पता है कि ईरान पेट्रोल की सप्लाई पर अपने नियंत्रण के जरिए डोनाल्ड ट्रंप सरकार को गंभीर आर्थिक दर्द दे सकता है.

2- पूरा ताकत लगाकर भी खत्म न कर पाए ट्रंप 

दूसरा तुरुप का इक्का खुद ईरानी सरकार का जिंदा बचा होना है. ईरान की सरकार जब पाकिस्तान में बातचीत करने पहुंचेगी तो वह दिखाएगी कि काफी नुकसान झेलने के बाद भी भी वो अपने पैरों पर खड़ी है. वह दुनिया और ईरान की जनता को यह दिखा चुकी होगा कि अपने दुश्मनों के सबसे बड़े हमलों के बाद भी वह टिक सकती है, भले ही उसे भारी नुकसान हुआ हो, जिसमें सुप्रीम लीडर की मौत भी शामिल है. सीजफायर घोषित होने के समय भी ईरानी सेना लड़ाई में बनी हुई थी, जबकि ट्रंप दावा कर रहे थे कि उसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. उस समय भी ईरानी सेना इजरायल और अमेरिका के अन्य सहयोगियों पर मिसाइलें दागे जा रही थी.

3- 400 किलोग्राम उच्च स्तर का यूरेनियम

ट्रंप को पता है कि ईरान के हाथ में अभी भी उच्च स्तर पर शुद्ध किया हुआ यूरेनियम (HEU) का भंडार है. तेहरान ने कहा है कि वह यूरेनियम एनरिचमेंट के मुद्दे पर लचीलापन दिखाने को तैयार है. इसमें 400 किलोग्राम उच्च स्तर का यूरेनियम सौंपना शामिल हो सकता है. लेकिन ईरान यह भी कहता है कि यूरेनियम एनरिच करने के उसके अधिकार पर कोई बातचीत होनी होगी. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, न कि सैन्य उपयोग के लिए. जबकि अमेरिका और इजरायल उस पर पहले परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं.

4- ट्रंप की मजबूरी

ट्रंप को यह भी पता है कि अगर युद्ध फिर से शुरू होता है तो ईरान की तरफ से भारी गुस्सा देखने को मिलेगा और शांति प्रक्रिया बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगी. अगर अमेरिका फिर से सैन्य हमले करता है तो पूरे मिडिल ईस्ट में लड़ाई और बढ़ सकती है. पहले से चल रहा तेल-गैस संकट और भी गंभीर हो जाएगा और दुनिया में आर्थिक संकट आने का खतरा बढ़ सकता है. खुद ट्रंप की अपनी राजनीतिक असर भी पड़ सकता है, खासकर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले. सीजफायर को पहले ही डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी जीत के रूप में पेश किया गया है, अगर अब उससे पीछे हटते हैं तो उन्हें कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है. यह बात ईरान को पता है. ईरान जानता है कि ट्रंप की टीम फाइलन डील करने के लिए आतुर होगी.

5- नैरेटिव गेम

आखिरी तुरुप का इक्का नैरेटिव वॉर का होगा. ट्रंप ने 'सभ्यता खत्म कर दूंगा' की धमकी देकर दुनिया की नजर में ईरान को विक्टिम पार्टी बना दिया है. अब बड़ी जिम्मेदारी अमेरिका पर है कि वह फाइनल डील के लिए पूरी कोशिश करे और अपनी इमेज बचाए.

यह भी पढ़ें: हिज्बुल्लाह को ईरान से बड़ा दुश्मन क्यों मानता है इजरायल? सीजफायर के बावजूद बमबारी की 7 वजहें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com